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वित्त मंत्री ने कैबिनेट में लिए ये 5 बड़े फैसले, जानें इससे आप पर क्या होगा असर

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Updated: November 21, 2019, 9:11 AM IST
वित्त मंत्री ने कैबिनेट में लिए ये 5 बड़े फैसले, जानें इससे आप पर क्या होगा असर
कैबिनेट बैठक में लिए गए ये बड़े फैसले

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सरकार बीपीसीएल में स्ट्रैटजिक विनिवेश करेगी, लेकिन बीपीसीएल का एक हिस्सा असम में नुमलीगढ़ा रिफाइनरी (NRL) को सरकार नहीं बेचेगी.

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नई दिल्ली. कैबिनेट ने बुधवार को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) यानी बीपीसीएल समेत 5 सरकारी कंपनियों में स्ट्रैटेजिक विनिवेश को मंजूरी दे दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कैबिनेट बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कैबिनेट ने BPCL, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SCI), कॉनकोर (CONCOR) में समेत पांच कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी है. वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ CPSEs में हिस्सा 51% से घटाने को मंजूरी दी है. हालांकि इनमें मैनेजमेंट कंट्रोल सरकार के पास रहेगी.

नुमालीगढ़ रिफाइनरी नहीं बेचेगी सरकार
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बीपीसीएल में स्ट्रैटजिक विनिवेश करेगी, लेकिन बीपीसीएल का एक हिस्सा असम में नुमलीगढ़ा रिफाइनरी (NRL) को सरकार नहीं बेचेगी. उन्होंने कहा, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड की 61.65 फीसदी हिस्सेदारी नहीं बेची जाएगी. इसमें सरकार की हिस्सेदारी रहेगी. बीपीसीएल का पूरा मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर होगा.

इन कंपनियों में हिस्सेदारी घटाएगी सरकार

सीतारमण ने कहा कि कैबिनेट ने 7 CPSEs में विनिवेश को मंजूरी दी है. कैबिनेट ने SCI में 63.75 फीसदी हिस्सेदारी औऱ कॉनकोर में 30.8 फीसदी हिस्सेदारी घटाने की मंजूरी दी. खरीदार को SCI का मैनेजमेंट कंट्रोल भी मिलेगा. नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) की 100 फीसदी हिस्सेदारी NTPC को दी जाएगी. वहीं टीएचडीसीएल इंडिया लिमिटेड (THDCIL) का मैनेजमेंट कंट्रोल भी NTPC को मिलेगा.



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी बीपीसीएल से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को अलग किया जायेगा. उसके बाद प्रबंधन नियंत्रण के साथ बीपीसीएल में सरकार की 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी गई. मंत्रिमंडल ने एससीआई में सरकार की पूरी 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दे दी. सरकार की कॉनकार में फिलहाल 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

मंत्री ने कहा कि इसके अलावा सरकार टीएचडीसी इंडिया तथा नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लि. (एनईईपीसीओ) में सरकार की हिस्सेदारी को सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी लि. को बेच दिया जायेगा. सरकार ने इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) जैसे चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दे दी. हालांकि, इनमें प्रबंधन नियंत्रण सरकार अपने पास ही रखेगी.



विनिवेश की जाने वाली कंपनी की हिस्सेदारी दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों को बेचे जाने के आधार पर सरकार का उस इकाई में प्रबंधन नियंत्रण होगा. सरकार की फिलहाल आईओसी में 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसमें 25.9 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की एलआईसी के पास तथा ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) तथा ऑयल इंडिया लि. के पास है। सरकार 26.4 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 33,000 करोड़ रुपये में बेच सकती है. सीतारमण ने कहा कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी को सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी को सौंपा जायेगा. पूर्वोत्तर में निजीकरण की पहल को लेकर चिंता को दूर करते हुए यह कदम उठाया गया है.

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सरकार 1.2 लाख मीट्रिक टन प्याज होगा आयात
सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 1.2 लाख मीट्रिक टन प्याज आयात करने की मंजूरी दी है. इसके लिए प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है. सरकार ने बुधवार को घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिये 1.2 लाख टन प्याज आयात करने के खाद्य मंत्रालय के निर्णय को मंजूरी दे दी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इसकी जानकारी दी. खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने 16 नवंबर को कहा था कि सरकारी कंपनी एमएमटीसी के जरिये सरकार एक लाख टन प्याज का आयात करेगी.

सरकार ने प्याज की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिये निजी आयात को भी मंजूरी दी है और ध्रुमीकरण एवं स्वच्छता के प्रावधानों को भी सरल बनाया है. सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब घरेलू बाजार में प्याज की कमी से दाम आसमान पर पहुंच गये हैं. दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमतें 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गयीं. खरीफ सत्र 2019-20 में प्याज उत्पादन में 26 प्रतिशत गिरावट के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है. सरकार ने आयात सुनिश्चित करने के अलावा निर्यात को प्रतिबंधित करने, भंडार की सीमा तय करने समेत कई कदम उठाये हैं.

बता दें कि प्याज के निर्यात पर रोक के बाद भी अक्टूबर से नवंबर मध्य तक प्याज की कीमतों में जोरदार तेजी आई है. फिलहाल, कई जगह खुदरा बाजार में प्याज 60 रुपये किलो से ऊपर चल रहा है. दिल्ली में एक हफ्ते पहले तक फुटकर में प्याज का भाव 100 रुपये तक पहुंच गया था.

स्पेक्ट्रम पेमेंट में 2 साल तक राहत
सरकार ने वित्तीय संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनियों को राहत देते हुए उनके लिये स्पेक्ट्रम किस्त का भुगतान दो साल के लिए टालने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी. वित्त मंत्री ने कहा कि दूरसंचार कंपनियों को 2020-21 और 2021-22 दो साल के लिये स्पेक्ट्रम किस्त भुगतान से छूट दी गई है. सूत्रों ने बताया कि सरकार के इस फैसले से दूरसंचार कंपनियों भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो को 42,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी.

NHAI को लंबी अवधि के लिए फंड जुटाने की मंजूरी
कैबिनेट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को फंड जुटाने की मंजूरी दी है. वित्त मंत्री ने कहा कि NHAI टोल प्लाजा पर टोल रिसीप्ट के जरिए पैसा जुटा सकती है.

कॉरपोरेट कर में कटौती विधेयक को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कॉरपोरेट कर की दर को घटाकर 22 प्रतिशत करने संबंधी अध्यादेश की जगह लेने वाले विधेयक को बुधवार को मंजूरी दी. सरकार ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ये उपाय किए थे. सूत्रों के मुताबिक इस विधेयक को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. सीतारमण ने 20 सितंबर को कहा था कि कॉरपोरेट कर और अन्य उपायों से सरकारी खजाने को सालाना 1.45 करोड़ रुपये की हानि होने का अनुमान है.

इस फैसले के बाद , घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की दर कम होकर 22 प्रतिशत पर आ गई थी. हालांकि इसके लिये शर्त थी कि वे किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेंगे. एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित नई घरेलू विनिर्माण कंपनी के लिए कर की दर को घटाकर 15 प्रतिशत किया गया था. इसके अलावा , जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है , उन्हें भी किसी प्रकार का कर नहीं देना होगा.

कैबिनेट ने लिए ये अहम फैसले
>> इसके अलावा कैबिनेट ने दिल्ली की अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मंजूरी दी.

>> IFSC के लिए सिंगल विंडो अथॉरिटी बनाई जाएगी.
फाइनेंशियल सेवाओं के लिए रेगुलेटरी बॉडी बनेगी.

>> टैक्सेशन लॉ अमेंडमेंट बिल को मंजूरी मिली.

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First published: November 21, 2019, 4:53 AM IST
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