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पत्नी से 50 हजार रुपये उधार मांगकर रमेश चंद्रा ने शुरू की थी यूनिटेक, इस गलती ने किया बर्बाद

यूनि‍टेक की बर्बादी का सफर, ऐसे पहुंची अर्श से फर्श पर देश की बड़ी रि‍यल एस्‍टेट कंपनी

रियल्टी सेक्टर की कंपनी यूनिटेक को शुरू करने वाले रमेश चंद्रा हैं. उन्होंने अपनी पत्नी से 50 हजार रुपये उधार मांगकर इस कंपनी की नींव रखी थी. साल 2007 में यूनिटेक देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी थी, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट, बढ़ते कर्ज का बोझ ने तो कंपनी की कमर तोड़ दी.

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    नई दिल्ली. देश के रियल्टी सेक्टर की जानमानी कंपनी यूनिटेक (Unitech) को अब केंद्र सरकार टेकओवर करने जा रही है. ये फैसला यूनिटेक के 30 हजार होमबायर्स (Home Buyers) के लिए बड़ी राहत लाया है. यूनिटेक को शुरू करने वाले रमेश चंद्रा (Unitech Founder) हैं. उन्होंने अपनी पत्नी से 50 हजार रुपये उधार मांगकर इस कंपनी की नींव रखी थी. साल 2007 में यूनिटेक देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट (India Real Estate Market) कंपनी थी, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट, बढ़ते कर्ज के बोझ ने तो कंपनी की कमर तोड़ दी. वहीं, 2G घोटाले में कंपनी के मालिक चंद्रा परिवार के शामिल होने से उसकी छवि और कारोबार को बड़ा झटका लगा.

    आइए जानते है कैसे कंपनी अर्श से फर्श पर पहुंची...  

    ऐसे शुरू हुई यूनिटेक- रमेश चंद्रा, एसपी श्रीवास्तव, पीके मोहंती, रमेश कपूर और डॉक्टर बाहरी ने सन 1972 में यूनिटेक टेक्निकल कंसल्टेंट नाम से कंपनी की नींव रखी थी. उस समय यह कंपनी जमीन की जांच करती थी. सन 1974 में कंपनी ने पहला इंजीनियरिंग कॉन्ट्रेक्ट हासिल किया. सन 1986 में कंपनी पूरी तरह से रियल्टी सेक्टर में कूद चुकी थी.

    ऐसे बन गई देश की सबसे बड़ी रियल्टी कंपनी- 2003 से 2008 के दौरान कंपनी तेजी से ग्रोथ कर रही थी, लेकि‍न चंद्रा फैमि‍ली की इस कंपनी की कि‍स्‍मत 2008 के बाद से बि‍गड़नी शुरू हो गई. यूनि‍टेक वायरलेस (यूनि‍टेक की सब्‍सि‍डि‍यरी में से एक) ने देश भर में 2 जी स्‍पेक्‍ट्रम के लि‍ए टेलि‍कॉम लाइसेंस के लि‍ए बोली लगाई और लाइसेंस हासि‍ल किया.

    यूनिटेक को शुरू करने वाले रमेश चंद्रा


    2008 के अंत होते-होते लेहमेन ब्रदर्स के बर्बाद होने के बाद ग्‍लोबल लि‍क्‍वि‍डि‍टी संकट पैदा हो गया और उस वक्‍त ऊंचाई पर चल रही इंडि‍यन प्रॉपर्टी मार्केट में गि‍रावट आनी शुरू हो गई. ज्‍यादातर रि‍यल्‍टी डेवलपर्स को पैसे की कमी होने लगी. यूनि‍टेक की परेशानी और भी बड़ी थी, क्‍योंकि‍ एक ओर पैसे की कमी हो गई और दूसरी ओर 2जी स्‍कैम में उनके प्रमोटर्स जेल में थे.

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    संजय चंद्रा की गि‍रफ्तारी- यूनिटेक के फाउंडर रमेश चंद्रा के बेटे संजय चंद्रा की 2G घोटाले में गिरफ्तारी हुई. 2जी स्‍कैम पर सीएजी की रि‍पोर्ट आने के बाद यूनि‍टेक के एमडी संजय चंद्रा के साथ राजनेताओं और कॉरपोरेट्स को गि‍रफ्तार कि‍या गया.

    साल 2009 तक रियल एस्टेट क्षेत्र में गिरावट शुरू होने लगा था. यूनिटेक तब तक देशभर में 14,000 एकड़ जमीन खरीद चुकी थी.



    इसके लिए रकम जुटाने के क्रम में कंपनी ने अपने कुछ एसेट्स को सिंगापुर में एक रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट में लि‍स्‍टेड कर 1.5 अरब डॉलर और अन्य निवेशकों से 1 अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई.

    इस ओर कदम बढ़ाने से पहले ही बाजार में मंदी आ गई और रकम जुटाने संबंधी कंपनी की सारी योजना बेकार हो गई और यूनिटेक हजारों करोड़ रुपए कर्ज के बोझ तले दब गई.

    कभी 7वीं सबसे अमीर फैमली था चंद्रा परिवार- साल 2007 में चंद्रा परिवार (पिता रमेश और बेटे अजय एवं संजय) 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध हैसियत के साथ देश के सबसे अमीर लोगों की वार्षिक सूची में 7वें पायदान पर थे.

    उस समय कंपनी का रियल एस्टेट कारोबार अपने चरम पर था और जनवरी 2008 में इस कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये थी.

    यूनिटेक एक जबरदस्त मुनाफा कमाने वाली कंपनी थी और 2007-08 में उसने 4,280 करोड़ रुपये की आमदनी पर 1,669 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था. साथ ही, कंपनी के पास 3,275 करोड़ रुपये का कैश था.

    यूनिटेक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला


    अब क्या हुआ-केंद्र सरकार ने यूनिटेक के 30 हजार होमबायर्स को राहत देते हुए कंपनी को टेक ओवर करने का फैसला किया है. ऐसा दूसरी बार हुआ है जब केंद्र ने इस तरह किसी कंपनी का टेक ओवर किया हो. इससे पहले 2009 में सत्यम का सरकार ने टेक ओवर किया था, बाद में महिंद्रा ग्रुप की आईटी ने कंपनी ने इसे खरीद लिया था.

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सरकार ने पूर्व आईएएस अधिकारी यदुवीर सिंह मलिक को चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है. इसके अलावा 6 अन्य डायरेक्टर की नियुक्ति का भी प्रस्ताव है.

    यूनिटेक के डायरेक्टर्स ने होमबायर्स और अन्य सोर्स से आए फंड का ज्यादातर हिस्से का गलत इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से सारे प्रॉजेक्ट्स बीच में लटक गए.

    होमबायर्स ने मिलकर करीब 14270 करोड़ रुपये जमा किए थे. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से साफ-साफ कहा है कि वह इसमें पैसा नहीं लगाएगा, बल्कि अन्य विकल्पों पर काम किया जाएगा.

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