US की मार से चीन में ठप हुआ ये बिज़नेस, भारतीयों के पास है बड़ा मौका

चीन की एक समस्या से भारत में नए बिज़नेस के अवसर बन रहे हैं. जो भारत के मांस कारोबारियों के लिए हैं.

News18Hindi
Updated: May 16, 2019, 1:08 PM IST
US की मार से चीन में ठप हुआ ये बिज़नेस, भारतीयों के पास है बड़ा मौका
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: May 16, 2019, 1:08 PM IST
US और चीन के ट्रेड वॉर से भारत के लिए बिज़नेस के अवसर तैयार हो रहे हैं. चीन की एक समस्या से भारत में भी एक ऐसा ही अवसर बन रहा है. जो भारत के मांस कारोबारियों के लिए. दरअसल, चीन में अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैल गया है. इस महामारी के कारण वहां पिछले दो सालों में 1.4 अरब सूअरों की जान लेनी पड़ गई. सूअरों की संख्या चीन की जनसंख्या के बराबर है. इतनी बड़ी तादाद में सूअरों को मारने से चीन में इस वर्ष सूअर के मांस के दाम में बड़े इजाफे का अनुमान लगाया जा रहा है. (ये भी पढ़ें: सावधान! अगर यूज नहीं कर रहे हैं Aadhaar तो हो जाएगा डीएक्टिवेट)

चीन सूअर मांस के उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है. आपको बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा सूअर के मांस की खपत भी चीन में ही होती है. अब भारत के फायदे के लिहाज से सोचें तो दुनिया में सूअरों की पांचवीं सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के कारण भारत को चीनी मार्केट से अपनी हैसियत बढ़ाने का मौका है. भारत में सूअर-मांस के उद्योग के फलने-फूलने की अपार संभावना है क्योंकि यहां अभी दुनिया के महज 1.05% सूअर ही हैं.



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सूअरों की तादाद 20 करोड़ तक घटने की आशंका 

चीनी कैलेंडर के मुताबिक, 2019 सूअरों का वर्ष है. लेकिन, विडंबना देखिए कि वहां इस वर्ष के आखिर तक सूअरों की तादाद 20 करोड़ तक घटने की आशंका है. इसकी वजह बीमारी से सूअरों की मौत और एहतियातन उसे मारना है. इतनी एहतियात तब बरती जा रही है जब अफ्रीकन स्वाइन फ्लू इंसानों के लिए नुकसानदायक नहीं होता है. लेकिन, दूसरा पक्ष यह है कि सूअरों की इस बीमारी का कोई इलाज या वैक्सिन इजाद नहीं हो पाया है. इस कारण से यह अफ्रीका से यूरोप और रूस होते हुए वियतनाम और कंबोडिया जैसे एशियाई देशों में फैल रहा है.

पिछले वर्ष अगस्त में यह महामारी फैलने के बाद चीन में सूअरों के मांस की कीमतें इस वर्ष फरवरी-अप्रैल के बीच आसमान छूने लगीं. वहां, अभी जिंदा सूअर 1.73 डॉलर से लेकर 2.25 डॉलर प्रति किलो की दर से बिक रहे हैं. अनुमान है कि जल्द ही यह आंकड़ा 2016 के 3.05 डॉलर प्रति किलो के सर्वोच्च स्तर को पार कर जाएगा. इसके बाद भी ये कीमतें और बढ़ सकती हैं. उन्हें डर सता रहा है कि कहीं जनता का गुस्सा न फूट पड़े क्योंकि वहां सूअर के मांस की जबर्दस्त डिमांड है.

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ट्रेड वॉर का संकट
दरअसल, ट्रेड वॉर के चलते पिछले वर्ष अमेरिका पोर्क प्रॉडक्ट्स के आयात पर 62% टैरिफ लगाने के बावजूद चीन में अमेरिका से 1.70 लाख टन पोर्क प्रॉडक्ट्स आयात हो चुका है जो 2017 में हुए आयात की मात्रा से भी ज्यादा है. कहा जा रहा है कि इस वर्ष यह आंकड़ा 3 लाख टन तक पहुंच सकता है जो एक नया रेकॉर्ड होगा.

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