चीन को झटका देकर भारत आने की तैयारी में 200 बड़ी अमेरिकी कंपनियां! मिलेंगी हजारों नौकरियां

आम चुनाव के बाद अमेरिका की 200 से ज्यादा कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस चीन से हटाकर भारत में लगा सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो देश से एक्सपोर्ट बढ़ेगा. लिहाजा हजारों नौकरियों के मौके बनेंगे.

News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 4:10 PM IST
चीन को झटका देकर भारत आने की तैयारी में 200 बड़ी अमेरिकी कंपनियां! मिलेंगी हजारों नौकरियां
चीन को छोड़ भारत आने की तैयारी में हैं 200 बड़ी अमेरिकी कंपनियां!, मिलेंगी हजारों नौकरियां
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Updated: April 27, 2019, 4:10 PM IST
आम चुनाव के बाद अमेरिका की 200 से ज्यादा कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस चीन से हटाकर भारत में लगा सकती है. अमेरिका के बड़े सलाहकार समूह का कहना है कि इन अमेरिकी कंपनियों को चीन से बढ़िया ऑप्शन भारत दिख रहा है. USISPF (यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक एंड पार्टनरशिप फोरम) के प्रेसीडेंट मुकेश आघी के मुताबिक, भारत में निवेश के लिए कंपनियां उनसे सलाह ले रही हैं. उनका कहना है कि आम चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार को आर्थिक सुधारों की रफ्तार तेज करनी होगी. आपको बता दें कि अमेरिका के दक्षिण और केंद्रीय एशिया मामलों के लिए पूर्व व्यापारिक सहायक प्रतिनिधि मार्क लिनस्कॉट इस समय यूएसआईएसपीएफ में सदस्य के तौर पर काम कर रहे हैं.

बनेंगे हजारों नौकरियों के मौके- मुकेश आघी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि कि अगली सरकार अधिक पारदर्शी  होनी चाहिए. आघी के मुताबिक नई सरकार को अधिक से अधिक निवेश देश में आकर्षित करने के लिए रिफॉर्म और ट्रांसपेरेंसी पर जोर देना होगा. इन कंपनियों के भारत में आने से हजारों नौकरियों के मौके तैयार होंगे.


यूपी बोर्ड रिजल्ट 2019

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भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी पूरी-मुकेश आघी ने बताया कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए उन्होंने एक हाई-लेवल मैन्युफैक्चरिंग काउंसिल का गठन किया है. यह काउंसिल चुनाव पूरा होने तक एक डॉक्यूमेंट तैयार करेगी जिसमें भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की योजना तैयार है.

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मुक्त व्यापार समझौता के जरिए होना चाहिए कारोबार-आघी ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच अगर मुक्त व्यापार समझौता (FTA) होता है तो इससे भारत का निर्यात बढ़ेगा. इससे चीन से आने वाले सस्ते सामान की समस्या खत्म होगी. चीन के सामान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिका और भारत की कंपनियों को एक-दूसरे देश में बड़ा बाजार मिलेगा.

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