अमेरिका-चीन की ट्रेड वॉर से भारत को हो सकता है बड़ा फायदा, जानिए कैसे?

अमेरिका-चीन की ट्रेड वॉर से भारत को हो सकता है बड़ा फायदा, जानिए कैसे?
चीन और हांगकांग पर ड्यूटी बढ़ा सकता है अमेरिका

हांगकांग (Hong Kong) को लेकर अमेरिका ने संकेत दिया है कि वो मौजूदा 3.3 फीसदी की ड्यूटी को बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर ​सकता है. ऐसे में हांगकांग और चीन स्थित जेम्स एंड जूलरी (Jems and Jewellery) के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. परिणामस्वरूप भारत के लिए इस क्षेत्र में अवसर होंगे.

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नई दिल्ली. इस महीने अमेरिका द्वारा हांगकांग (Hong Kong) से व्यापार वरीयता का स्टेटस वापस लेने के बाद अब भारत के जेम्स एंड जूलरी निर्यात (Gems and Jewellery Export) का भविष्य सुनहरा हो सकता है. जूलरी एक्सपोर्ट काउंसिल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात कही है. जेम्स एंड जूलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल यानी (GJEPC) के अधिकारी ने कहा कि चीन ने हांगकांग पर नेशनल सिक्योरिटी कानून (China National Security Law) लागू कर दिया है. इसके बाद अब अमेरिका ने संकेत दिया है कि वो मौजूदा ड्यूटी को 3.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी कर सकता है.

भारत के लिए नए अवसर
GJEPC के चेयरमैन कोलिन शाह ने कहा, 'अमेरिका के इस फैसले को मोटे तौर पर देखें तो मुझे लगता है कि इससे भारत के जेम्स एंड जूलरी ट्रेड के ​लिए संभवत: अवसर पैदा होंगे.' अमेरिका के ​लिए, भारत के बाद हांगकांग और चीन चौथे सबसे बड़े जेम्स एंड जूलरी एक्सपोर्टर्स हैं. भारत के अलाव इस लिस्ट में फ्रांस और इटली भी शामिल हैं.

चीन से भारत शिफ्ट हो सकती है जूलरी मैन्युफैक्चरिंग
पिछले साल हांगकांग और चीन ने अमेरिका में क्रमश: 980.85 मिलियन डॉलर और 2,622.19 मिलियन डॉलर कीमत के जेम्स एंड जूलरी का निर्यात किया है. शाह ने कहा, 'नए आदेश के तहत हांगकांग से वरीययत संधि को खत्म किए जाने के बाद भारत के लिए नए बिजनेस के अवसर मिलेंगे. मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में क्षमता है कि वो चीन से शिफ्ट कर भारत में आ जाएं.'



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जेम्स एंड जूलरी सेक्टर में वैश्विक लीडर बनने का मौका
उन्होंने कहा, 'भारत में कच्चे माल, श्रमबल और स्किल की नैसर्गिक क्षमता है. इस सेक्टर में 50 लाख लोगों की वर्कफोर्स है जो काम करती है. ऐसे में अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत के लिए मौका है कि वो जेम्स एंड जूलरी का ट्रेडिंग हब बने और वैश्विक लीडर के नाम पर अग्रसर हो.'

आसान नहीं है गणित
हालांकि, भारत के जेम्स एंड जूलरी व्यापार की गणित हांगकांग और चीन जितनी सरल नहीं होगी क्योंकि ये दोनों जगहें भी एक महत्वपूर्ण गंतव्य माने जाते हैं. करीब 27 फीसदी निर्यात का रुख इन बाजारों की तरफ है, जहां हीरा व अन्य जेम्सस्टोन्स निर्यात किए जाते हैं. अमेरिका में स्टडेड जूलरी के लिए इन्हें कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

भारत की कई हीरा व जूलरी कंपनियों का ऑफिस हांगकांग में है और अमेरिका के इस फैसले के बाद इनके कारोबार पर भी असर पड़ेगा.

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अमेरिका में कितना जेम्स व जूलरी निर्यात करता है भारत?
GJEPC के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने 10.48 अरब डॉलर कीमत के जेम्स एंड जूलरी का अमेरिका में निर्यात किया था. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए यह आंकड़ा 9.17 अरब डॉलर का रहा है जोकि भारत के कुल निर्यात का 26 फीसदी है.
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