आंध्र प्रदेश: कार चलाना और खाना पकाना हुआ महंगा, नेचुरल गैस पर टैक्स 10 फीसदी बढ़ा

आंध्र प्रदेश: कार चलाना और खाना पकाना हुआ महंगा,  नेचुरल गैस पर टैक्स 10 फीसदी बढ़ा
राजस्व में कमी की वजह से राज्य सरकार ने नेचुरल गैस का दाम बढ़ाने का फैसला लिया है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

आंध्र प्रदेश सरकार ने राजस्व में कमी होने की वजह से नेचुरल गैस पर 10 फीसदी तक टैक्स बढ़ा दिया है. लॉकडाउन की वजह से राज्य के राजस्व में भारी गिरावट आई है. नई बढ़ोतरी तत्काल रूप से लागू कर दी गई है. इससे राज्य को करीब 300 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2020, 9:16 PM IST
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अमरावती. आंध्र प्रदेश में नेचुरल गैस (Nautral Gas) पर लगने वाला टैक्स 10 फीसदी बढ़ गया है. यहां की सरकार ने कहा लॉकडाउन की वजह से रेवेन्यू (Revenue) में भारी ​गिरावट आई है, जिसकी वजह से यह फैसला लेना पड़ा है. राज्य सरकार का अनुमान है कि नेचुरल गैस पर लगने वाले टैक्स में 10 फीसदी का इजाफा करने के बाद राज्य के राजस्व में सालाना 300 करोड़ रुपेय का लाभ होगा. करीब एक महीने पहले ही राज्य सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले टैक्स में इजाफा किया था ताकि सालाना 600 करोड़ रुपये का रेवेन्यू प्राप्त हो सके.

आंध्र प्रदेश के स्पेशल चीफ सेक्रेटरी (राजस्व) रजत भार्गव ने इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि नेचुरल गैस पर अब 14.5 फीसदी की जगह 24.5 फीसदी टैक्स देना होगा. यह बढ़ोतरी एपी वैल्यु एडेड टैक्स एक्ट के शेड्यल पांच के तहत की गई है. अन्य वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लगाने के बाद वर्तमान में केवल नेचुरल गैस पर ही शेड्यूल 5 के तहत टैक्स नहीं लगा था.

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रजत भार्गव ने कहा, 'हमनें यह देखा कि एक तरफ राज्य का रेवेन्यू लगातार कमहो रहा हे और दूसरी तरफ गरीब वर्ग के उत्थान के लिए फाइनेंस की जरूरत है. ऐसे में रेवेन्यू बढ़ाना बेहद अनिवार्य हो गया है.' आंध्र प्रदेश के स्पेशल चीफ सेक्रेटरी ने कहा कि सरकार ने सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखने के बाद ही नेचुरल गैस पर वैट को बढ़ाने का फैसला किया है. इस बढ़ोतरी तत्काल रूप से लागू कर दिया गया है.
जीएसटी के दायरे में आ सकता है नेचुरल गैस
बता दें कि नेचुरल गैस को जीएसटी (GST-Goods and Service Tax) के दायरे में लाया जा सकता है. इसकी कवायद लंबे समय से चल रही है. लेकिन इस पर अब जल्द फैसला हो सकता है. पिछले महीने ही सीएनबीसी आवाज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गैस ट्रेडिंग रेग्युलेशन (Gas Trading Regulations) से पहले इस पर फैसला हो सकता है. क्योंकि कंपनियों का कहना है कि, हर राज्य में अलग-अलग टैक्स लगते है. ऐसे में ट्रेडिंग करना पाना बहुत मुश्किल जाएगा. इसीलिए उन्होंने इसे जीएसटी के दायरे में लाने का सुझाव दिया है.

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जीएसटी के दायरे में आने से क्या होगा ग्राहकों पर असर?
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि नेचुरल गैस को जीएसटी के दायरे में लाने पर पर पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) कुछ सस्ती हो सकती है. यहां आपको यह भी बता दें फिलहाल पांच पेट्रोलियम उत्पाद कच्चा तेल, डीजल, पेट्रोल, एटीएफ और नेचुरल गैस जीएसटी से बाहर हैं. अब यह जीएसटी काउंसिल को तय करना है कि इन पांचों उत्पादों पर कब से जीएसटी लगाया जाए. क्योंकि इन पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की डिमांड काफी समय से उठ रही है.
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