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सोशल मीडिया पर अपने संघर्ष की कहानी बताने के बाद अनिल अग्रवाल को मिल रहे हैं फिल्मों के ‘ऑफर’

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अग्रवाल को रॉकस्टार सा सम्मान मिल रहा है.

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अग्रवाल को रॉकस्टार सा सम्मान मिल रहा है.

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इस साल फरवरी में ट्विटर पर अपने संघर्ष की कहानी बयां की थी. उन्होंने बताया कि ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली . कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो. वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल ने इस कहावत को सही साबित किया है. भले ही आज उन्हें हर कोई जानता हो, लेकिन हकीकत यह है कि अपने सपनों को पूरा करने जब वह बिहार से सपनों के शहर मुंबई आए थे, तो उनका हाथ बिल्कुल खाली था.

उन्होंने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर अपने संघर्ष को साझा किया. मेटल किंग के नाम से विख्यात अग्रवाल ने कबाड़ की धातुओं से कारोबार शुरू कर इतना बड़ा बिजनेस एम्पायर स्थापित करने की कहानी बताई है. 68 वर्षीय अग्रवाल की किस्मत खुद लिखने की कहानी जानने के बाद अब उनको किताब लिखने से लेकर उनकी ‘बायोपिक’ बनाने के लिए बड़े-बड़े निर्माताओं की ओर से ‘ऑफर’ मिल रहे हैं. उनका ऐसा स्वागत हो रहा है, जैसा किसी ‘रॉकस्टार’ का होता है.

पहली यात्रा को लेकर ट्वीट किया था
दरअसल, इस साल 15 फरवरी को अग्रवाल ने बिहार से मुंबई की अपनी यात्रा के बारे में पहला ट्वीट किया था. उन्होंने लिखा, ‘‘करोड़ो लोग अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आते हैं, मैं भी उन्हीं में से एक था. मुझे याद है कि जिस दिन मैंने बिहार छोड़ा, मेरे हाथ में सिर्फ एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर बंद था. इसके साथ आंखों में सपने, मैं विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन पहुंचा और पहली बार कई चीजों को देखा.’’

इसके बाद उन्होंने अपनी लंदन यात्रा के बारे में बताया, जहां उन्होंने एक मल्टीनेशनल नेचुरल रिसोर्स कंपनी को लीड किया. यह कंपनी जस्ता-सीसा-चांदी, लौह अयस्क, इस्पात, तांबा, एल्युमीनियम, बिजली, तेल और गैस क्षेत्रों में कारोबार करती है. मेटल किंग ने पीटीआई-भाषा से इंटरव्यू में कहा, ‘‘मैं कोई स्टार नहीं हूं. मैं बहुत पढ़ा-लिखा नहीं हूं. मैं फिल्म एक्टर नहीं हूं, लेकिन मुझे जो रिस्पांस मिला (ट्वीट के लिए), वह जबर्दस्त है. मेरे एक ट्वीट पर 20 लाख प्रतिक्रियाएं मिली हैं. मैं खुद हैरान हूं.’’

मैं कर सकता, तो आप भी कर सकते

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का जन्म 24 जनवरी, 1954 को पटना में लोअर-मिडिल इनकम मारवाड़ी परिवार में ​हुआ था. उनके पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्युमीनियम कंडक्टर का छोटा सा कारोबार करते थे. पिता के कारोबार में मदद के लिए उन्होंने 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ दी. उसके बाद 19 साल की उम्र में सिर्फ एक टिफिन बॉक्स, बिस्तर और सपने लेकर मुंबई चले आए. उन्होंने कहा, ‘‘मैं केवल इतना कह रहा हूं कि कृपया विफलता से डरें नहीं. कभी छोटा मत सोचें और न ही छोटे सपने मत देखें. अगर मैं यह कर सकता हूं, तो आप कर सकते हैं.’’

बेटी प्रिया से बात करने के बाद फैसला

अग्रवाल कहते हैं कि पब्लिशर लगातार उनके लोगों से पुस्तक अधिकार (कॉपीराइट) के लिए संपर्क कर रहे हैं. फिल्मों के ऑफर भी उनके पास आए हैं. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘कोई एक फिल्म कंपनी नहीं है, जिसने संपर्क किया हो. सभी बड़े निर्माताओं ने संपर्क किया है. वे मुझे ‘बायोपिक’ के लिए पैसे देना चाहते हैं. मैं अपने सहयोगियों और बेटी प्रिया से बात करने के बाद इस पर फैसला करूंगा.’’

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शमशेर स्टर्लिंग केबल पहली कंपनी

अनिल अग्रवाल ने 1976 में कॉपर कंपनी के रूप में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना की थी. बाद में उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों के लिए कॉपर केबल क्षेत्र में भी उतरने का फैसला किया. 2001 में उनकी कंपनी ने सरकारी एल्युमीनियम कंपनी बाल्को का अधिग्रहण किया था. 2 बाद वेदांता लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी. वैसे, उनकी पहली कंपनी ‘शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी’ थी. अपने ट्वीट की श्रृंखला में अग्रवाल ने अपनी शुरुआती यात्रा, अपने मुश्किल वर्ष, अपने संघर्ष और ‘डिप्रेशन’ का जिक्र किया है.

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