सितंबर महीने में आम आदमी मिलेगी राहत! इस वजह से कम हो सकती है सब्जियों की कीमतें

10 सितंबर के बाद सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने लगेगी.

10 सितंबर के बाद सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने लगेगी.

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई बड़े शहरों में जो सब्जियां 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकती थी, अब उन्हें खरीदने के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं. ब्रोकली (Broccoli) जैसी सब्जियों के दाम तो 400 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा हो गए है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 2:35 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना के इस संकट (Coronavirus Pandemic) में आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है. जहां, एक और लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से नौकरियों पर संकट बढ़ गया है. वहीं, दूसरी ओर महंगाई (Inflation) ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है.  दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR)  सहित देश के कई हिस्सों में जो सब्जियां 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकते थे, उन्हीं सब्जियों के दाम (Vegetable Prices Shoot) अब 100 रुपये के पार हो गए हैं. ब्रोकली (Broccoli) जैसी सब्जियां तो 400 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा दामों में बिक रही हैं. कारोबारियों का मानना है कि भारी बारिश की वजह से आवक घट गई है. साथ ही, टमाटर जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों को भी भारी बारिश ने नुकसान पहुंचाया है. हालांकि, 10 सितंबर के बाद सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने लगेगी.

सब्जियों के बढ़ते दाम से सभी वर्गों के लोग परेशान- दिल्ली की मंडियों में टमाटर 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तो आलू 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे हैं. गाजीपुर मंडी में धनिया 200 रुपये प्रति किलोग्राम और लहसुन 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है. वहीं मिर्च 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है. बैंगन, भिंडी और प्याज के दामों भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है.



10 सितंबर के बाद सस्ती होंगी सब्जियां-  एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर सब्जी मंडी के अध्यक्ष और ट्रेडर राजेंद्र शर्मा कहते हैं, 'देखिए किसानों के नजरिए से देखें तो अभी स्थिति काफी अच्छी है. देश में जैसे-जैसे अनलॉक के तहत छूट मिल रहे हैं सब्जियां मंडी में आना शुरू हो गई हैं.

दिल्ली में साप्तहिक बाजार खुलने से सब्जी विक्रेताओं को फायदा होना शुरू हो गया है. रही सब्जी के दाम आसमान छूने की तो मैं सरकार से कहना चहता हूं कि आप रेट मत फिक्स करें पर एक नॉर्मल रेट तय कर दें. अगर उससे ऊपर रेट जाता है तो आप कह सकते हैं रेट आसमान छू रहा है.



बरसात के समय में अक्सर मंडियों में सब्जियों की सप्लाई कम हो जाती है. इससे सब्जियों की कीमतें एक दम से बढ़ जाती हैं, लेकिन सितंबर से लेकर मार्च तक स्थिति सामान्य रहती है. यह कोई नई बात नहीं है 10 सितंबर से सब्जियां सस्ती होनी शुरू हो जाएंगी.

सब्जियों के दाम क्यों आसमान छू रहे हैं?

बता दें कि निम्न और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी आमदनी के मुताबिक रसोई का बजट तय करते हैं. लॉकडाउन खुलने के बाद से ही सब्जियों के दामों में लगातार तेजी आ रही है. हर सप्ताह सब्जियों के दाम बढ़ते जा रहे हैं, जिससे लोगों के घर का बजट बिगड़ रहा है. मार्च से लेकर जुलाई के शुरुआत तक सब्जियों के दाम सामान्य थे, लेकिन जुलाई के दूसरे सप्ताह से सब्जियों के दामों में तेजी आनी शुरू हो गई है, जो अभी तक जारी है.



कीमतों ने इस तरह बिगाड़ा बजट

गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर 6 की रहने वाली एक महिला पिंकी कहती हैं, 'मैं पांच लोगों के लिए सब्जियां खरीदती हूं. लॉकडाउन से पहले या लॉकडाउन के बाद कुछ दिनों तक हर महीने 1500 से 2000 रुपये के बीच सब्जी खरीदते थे तो काम चल जाता था. लेकिन, आज अगर पांच लोगों के लिए सब्जियां खरीदती हूं तो यह बजट 3000 रुपये तक पहुंच जाएगा. सब्जी कोई भी लें तो वह 60 रुपये से कम नहीं मिल रहा है. आलू-प्याज भी 40 पार है. बैगन, मूली, परवल, तोरी पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है. अब हमलोग एक सप्ताह में दो-तीन दिन साग-दाल खा कर काम चलाने का सोच रही हूं.'
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