कोरोना की वजह से बर्बाद हुआ ऑटो सेक्टर! जुलाई में फिर 36% गिरी वाहनों की बिक्री

कोरोना की वजह से बर्बाद हुआ ऑटो सेक्टर! जुलाई में फिर 36% गिरी वाहनों की बिक्री
कोरोना की वजह से बर्बाद हुआ ऑटो सेक्टर जुलाई में फिर 36% गिरी वाहनों की बिक्री

ऑटोमोबाइल सेक्टर पर कोरोना वायरस महामारी (Covid-19 Pandemic) के कारण बुरा असर पड़ा है. आकड़ों के मुताबिक बिक्री में पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी की गिरावट आई. इस दौरान दोपहिया वाहनों की बिक्री में 37.47 फीसदी, तिपहिया वाहनों की बिक्री 74.33 फीसदी, कमर्शियल वाहनों की बिक्री 72.18 फीसदी और पर्सनल वीकल्स की बिक्री में 25.19 फीसदी की गिरावट आई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 10, 2020, 6:32 PM IST
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नई दिल्ली. ऑटोमोबाइल सेक्टर पर कोरोना वायरस महामारी (Covid-19 Pandemic) के कारण बुरा असर पड़ा है. देश में ऑटोमोबाइल रिटेल इंडस्ट्री की सर्वोच्च संस्था फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने जुलाई में वाहनों की बिक्री के नए आंकड़े जारी किए हैं. इन आकड़ों के मुताबिक बिक्री में पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी की गिरावट आई. इस दौरान दोपहिया वाहनों की बिक्री में 37.47 फीसदी, तिपहिया वाहनों की बिक्री 74.33 फीसदी, कमर्शियल वाहनों की बिक्री 72.18 फीसदी और पर्सनल वीकल्स की बिक्री में 25.19 फीसदी की गिरावट आई है. हालांकि इस साल जून की तुलना में जुलाई के आंकड़े बेहतर रहे हैं.

इस वजह से गिर रही है सेल
फाडा का कहना है कि पर्याप्त नकदी के बावजूद बैंक और एनबीएफसी जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं. जिससे कमर्शियल, तिपहिया और दोपहिया वाहनों की मांग प्रभावित हो रही है. उसका कहना है कि सरकार को मांग बढ़ाने के लिए हरेक इंडस्ट्री के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए और तुरंत स्क्रैपेज पॉलिसी लागू करनी चाहिए. फाडा ने प्रेसिडेंट आशीष हर्षराज काले ने कहा कि देश अभी अनलॉक की प्रक्रिया में है. जून की तुलना में जुलाई के आंकड़ें बेहतर रहे हैं लेकिन पिछले साल की तुलना में ऑटो सेक्टर की रिकवरी अभी दूर की कौड़ी है.

मॉनसून से ट्रैक्टरों, छोटे कमर्शियल वाहनों और मोटरसाइकल की बिक्री अच्छी रही 
उन्होंने कहा कि अच्छे मॉनसून के कारण ग्रामीण बाजार में अच्छी रिकवरी दिख रही है. मॉनसून से ट्रैक्टरों, छोटे कमर्शियल वाहनों और मोटरसाइकल की बिक्री में सकारात्मक रुख दिख रहा है. बैंकों और एनबीएफसी के पास नकदी की कोई कमी नहीं है लेकिन वे लोन देने से कतरा रहे हैं. इससे जिससे कमर्शियल, तिपहिया और दोपहिया वाहनों की मांग प्रभावित हो रही है. कई सेंगमेंट में वीकल फंडिंग परसेंटेज में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आई है जिससे वाहन खरीदना कई उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो गया है.
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