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उपराष्‍ट्रपति नायडू ने कही बड़ी बात! कर्जमाफी से किसानों को मिलती है सिर्फ अस्‍थायी राहत, खेती को बनाएं और लाभदायक

 उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि किसान असंगठित हैं और उनकी कोई आवाज नहीं है.
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि किसान असंगठित हैं और उनकी कोई आवाज नहीं है.

संयुक्त राष्‍ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (UNFAO) और नीति आयोग की ओर से कृषि पर आयोजित 'नेशनल डायलॉग - इंडियन एग्रीकल्चर टुवार्ड्स 2030' में उपराष्‍ट्रपति एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) ने कहा कि कृषि क्षेत्र में खेती की लागत कम करने और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र (Food Processing Sector) में संभावनाओं का दोहन करने की जरूरत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 4:08 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के खिलाफ दिल्‍ली की सीमाओं पर लंबे समय से डटे किसानों के विरोध प्रदर्शन (Farmers' Protest) के बीच उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu) ने कहा कि देश में कृषि की लागत (Agriculture Cost) घटाकर इसे ज्‍यादा मुनाफा देने वाली बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कर्ज माफी (Loan Waiver) और सब्सिडी (Subsidy) से किसानों को केवल अस्थायी राहत ही मिल सकती है. उन्होंने किसानों को आसान शर्त पर कर्ज (Loans) और निर्बाध बिजली उपलब्ध (Uninterrupted Power Supply) कराने पर भी जोर दिया.

संयुक्त राष्‍ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (UNFAO) और नीति आयोग की ओर से कृषि पर आयोजित 'नेशनल डायलॉग - इंडियन एग्रीकल्चर टुवार्ड्स 2030' में नायडू ने कहा कि कृषि क्षेत्र में खेती की लागत कम करने और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र (Food Processing Sector) में संभावनाओं का दोहन करने की जरूरत है. उपराष्ट्रपति ने राष्‍ट्र के स्वास्थ्य के लिए रसायनों पर निर्भरता कम करने और जैविक खेती (Organic Farming) को अपनाने पर भी जोर दिया. नायडू ने कृषि को लाभदायक बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर पहल करने का भी आह्वान किया.

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'किसानों के लिए 4P को सक्रिय रहने की जरूरत'
उपराष्ट्रपति ने कहा कि किसान असंगठित (Unorganized) हैं और उनकी कोई आवाज नहीं है. इसलिए संसद (Parliament), नेता (Politician), नीति निर्माता (Policy Makers) और प्रेस (Press) यानी 4P को सक्रिय रूप से कृषि के प्रति सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए. उन्‍होंने कहा कि कृषि को लाभदायक बनाने के लिए क्रांतिकारी बदलाव करना समय की मांग है. नायडू ने कहा कि कर्ज माफी और सब्सिडी किसानों को अस्थायी राहत दे सकते हैं. यह स्थायी समाधान नहीं है. किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों तहत के उपायों की जरूरत है.

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नायडू ने बताईं कृषि क्षेत्र की चार अहम चुनौतियां
नायडू ने खाद्य व पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, किसानों, कृषि मजदूरों की दशा और खेती को लेकर नई पीढ़ी की रुचि में कमी को कृषि क्षेत्र की चार अहम चुनौतियों में रखा. उन्‍होंने इन चारों चुनौतियों का समाधान निकालने पर जोर दिया. नायडू ने कहा कि हमें अवसरों का फायदा उठाने और कृषि को विशेष प्रोत्साहन देने की जरूरत है. यह काम न केवल आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए हो, बल्कि अन्य देशों को निर्यात करने के लिए भी हो सके. अगर ऐसा हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा. उन्होंने बड़े पैमाने पर जैविक खेती को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया.
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