ट्रेन में बैठने से पहले यात्रियों के लिए जरूरी होंगे ये दो काम! रेलवे ने यहां शुरू की ये खास पहल

ट्रेन में बैठने से पहले यात्रियों के लिए जरूरी होंगे ये दो काम! रेलवे ने यहां शुरू की ये खास पहल
Railway ने शुरू की खास सर्विस! अब एयरपोर्ट की तरह स्टेशन पर की जाएगी टिकट चेक

रेलवे पैसेंजर्स को यात्रा से पहले टिकटों की चेकिंग (Train Ticket Checking) और थर्मल स्क्रीनिंग के लिए साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के विजयवाड़ा डिवीजन (Vijayawada Railway Division) ने एक खास पहल की है. सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करते हुए तकनीक की मदद से ये काम पूरा किया जा रहा है.

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नई दिल्ली. लॉकडाउन के बाद रेल सेवाएं शुरू होने की वजह से रेलवे के लिए कोरोना वायरस संक्रमण रोकने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. हालांकि, इस संबंध में रेलवे ने यात्रियों से लेकर TTE तक के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं. साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) के विजयवाड़ा डिवीजन (Vijayawada Railway Division) ने रेलवे स्टेशन पर घुसने से पहले सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने के लिए एक खास पहल की है. इसके तहत पैसेंजर्स की स्क्रीनिंग और टिकटों की चेकिंग (Train Ticket Checking) के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है.

पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाये?
इसके तहत अब पैसेंजर्स के​ टिकटों की चेकिंग कॉन्टैक्टलेस (Contactless Train Ticket Checking) तरीके से की जा रही है. इसके लिए अब ​कम्प्यूटर असिस्टेड कैमरा और मॉनिटर्स की मदद ली जा रही है. वहीं, पैसेंजर की स्क्रीनिंग के लिए एंट्रेंस पर कैमरे की ​मदद से उनके शरीर का तापमान मापा जा रहा है.

कैसे चेक किया जा रहा टिकट?



स्टेशन परिसर में घुसने से पहले पैसेंजर्स को हैं​ड सेैनेटाइजर का इस्तेमाल करना होगा. उसके बाद उन्हें टिकट चेक कराने के लिए आगे बढ़ना होगा. सैनेटाइजेशन के बाद टिकट चेकिंग प्वाइंट पर पैसेंजर अपना आईडी कार्ड और टिकट कैमरे को दिखाता है. यहां पर दो मॉनिटर्स इस कैमरे से अटैच किये गये हैं. एक मॉनिटर पैसेंजर्स की तरफ है और दूसरा रेलवे कर्मचारी की तरफ.



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कैसे हो रही थर्मल स्क्रीनिंग
इसके बाद पैसेंजर्स के शरीर का तापमान पता करने के लिए पर्याप्त उंचाई पर थर्मल कैमरा लगाया गया है. यहां पर पैसेंजर्स का मास्क भी चेक किया जाता है. अगर पैसेंजर ने मास्क पहना है और उसके शरीर का तापमान नॉर्मल है तो स्क्रीन पर ग्रीन सिग्नल मिलता है. अगर पैसेंजर ने मास्क नहीं पहना है और तापमान ठीक है तो यह सिग्नल ऑरेंज रंग का होता है. इसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाती है. वहीं. अगर पैसेंजर्स के शरीर का तापमान अधिक है तो उन्हें यात्रा करने से रोक दिया जाता है.

इस सिस्टम में 15 दिनों के लिए पैसेंजर्स के ये डेटा स्टोर किए जाते हैं ताकि अगर किसी जांच की जरूरत होती है तो इसका इस्तेमाल किया जा सके.

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(दिपाली नंदा, संवाददाता, CNBC आवाज़)
First published: June 4, 2020, 4:49 PM IST
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