जानिए कब-कौन और कैसे उठा सकता है टैक्स छूट वाली विवाद से विश्वास स्कीम का फायदा

विवाद से विश्वास स्कीम के बारे में जानें सबकुछ
विवाद से विश्वास स्कीम के बारे में जानें सबकुछ

इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) की ओर से शुरू की गई विवाद से विश्वास स्कीम (Vivad Se Vishwas scheme) के जरिए केंद्र सरकार को अब तक 72,480 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 21, 2020, 1:15 PM IST
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नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) की ओर से शुरू की गई विवाद से विश्वास स्कीम (Vivad Se Vishwas scheme) के जरिए केंद्र सरकार को अब तक 72,480 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है. बुधवार को वित्तमंत्रालय (Finance Ministry) इस बारे में जानकारी दी है. मीटिंग में विभाग ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक कुल 1,00,195 करोड़ रुपये की विवादित रकम से जुड़े मामलों को सुलझाया गया है, जिनकी 72,480 करोड़ रुपये की समझौता कर राशि 17 नवंबर तक जमा कराई जा चुकी थी. आइए आपको इस स्कीम के बारे में डिटेल में बताते हैं कि कब-कौन और कैसे इस स्कीम का फायदा उठा सकता है.

इनकम टैक्स विभाग ने उच्चस्तरीय बैठक में टैक्सपेयर्स को इस योजना के बारे में जानकारी देने के लिए ई-अभियान शुरू करने का फैसला किया गया था. इस योजना के तहत करदाताओं को विवादित कर, विवादित ब्याज और विवादित जुर्माने या शुल्क का निपटान करने के लिए 100 फीसदी विवादित कर और 25 फीसदी विवादित जुर्माने, ब्याज या शुल्क अदा करना पड़ता है.

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हाल ही में बढ़ाई थी तारीख
बता दें हाल ही में इनकम टैक्स (Income Tax) से जुड़े विवाद सुलझाने के लिए शुरू की गई 'विवाद से विश्वास' (Vivad Se Vishwas) स्कीम की आखिरी तारीख एक बार फिर बढ़ा दिया था. विभाग ने इस तारीख को 31 दिसंबर 2020 से बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक बढ़ा दिया था. यानी अब टैक्सपेयर्स 31 मार्च तक टैक्स से जुड़े विवाद सुलझा सकते हैं.

कौन ले सकता है इस स्कीम का फायदा?
बिल के अनुसार, 31 जनवरी 2020 तक जो मामले कमिश्‍नर (अपील), इनकम टैक्‍स अपीलीय ट्रिब्‍यूनल, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित थे, उन टैक्‍स के मामलों पर यह स्‍कीम लागू होगी. बता दें जो भी लंबित केस हैं वह टैक्स, विवाद, पेनाल्टी और ब्याज से जुड़े हुए हो सकते हैं. फिलहाल इनका एसेसमेंट या रीएसेसमेंट से कोई संबध नहीं होता है.

कौन नहीं ले सकते हैं स्‍कीम का फायदा?
>> बता दें जहां पर एसेसमेंट ईयर के संबंध में डेक्‍लेरेशन फाइल करने से पहले साबित हो चुका है कि देनदारी वाजिब है.
>> देश के बाहर से किसी स्रोत से इनकम हुई है और उसे छुपाया गया है. उनको भी नहीं मिलेगा फायदा.
>> एसेसमेंट ईयर के संबंध में जिसमें सेक्‍शन 153ए या सेक्‍शन 153सी के तहत एसेसमेंट किया गया है.
>> इसके अलावा सेक्‍शन 90 या सेक्‍शन 90 से जुड़े मामलों में भी स्‍कीम का फायदा नहीं लिया जा सकेगा.
>> बता दें जिनके खिलाफ विभिन्‍न प्रावधानों के तहत डेक्‍लेशन फाइल करने से पहले हिरासत का आदेश पारित हो गया है.

कैसे काम करती है स्‍कीम?
बिल में स्‍कीम के विवरण के अनुसार, प्राधिकृत अधिकारी 15 दिनों के भीतर उस देय राशि को तय करेगा जो करदाता अपने डेक्‍लरेशन में बताएगा. इसके बाद करदाता को एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इसमें निर्धारण के बाद टैक्‍स एरियर या देय रकम बताई जाएगी. निर्धारण के बाद बनी रकम को करदाता को अदा करना होगा. यह काम सर्टिफिकेट मिलने के 15 दिनों के अंदर करना है. ऐसा करके उसे प्राधिकृत अधिकारी को जानकारी देनी है. इसके बाद प्राधिकृत अधिकारी के आदेश पारित करेगा जिसमें वह बताएगा कि करदाता ने राशि जमा कर दी है. गोराडिया कहते हैं, ''यह स्‍कीम 31 जनवरी, 2020 तक लंबित सभी मामलों को कवर करती है. यह अच्‍छा मौका है. करदाता अपने विवाद को निपटाकर दोबारा नई शुरुआत कर सकते हैं.''

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क्या है ये स्कीम?
इस स्कीम का मकसद लंबित कर विवादों का समाधान करना है. इस स्कीम के तहत करदाताओं को केवल विवादित टैक्स राशि का भुगतान करना होगा. उन्हें ब्याज और जुर्माने पर पूरी छूट मिलेगी.
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