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युद्ध यानी नुकसान ही नुकसान, भारत को भी एक लाख करोड़ की चपत लगेगी, घरेलू महंगाई भी बढ़ने की आशंका

युद्ध यानी नुकसान ही नुकसान, भारत को भी एक लाख करोड़ की चपत लगेगी, घरेलू महंगाई भी बढ़ने की आशंका

 यूक्रेन कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है. आयात रुका तो गेहूं-मकई जैसे अनाज के दाम बढ़ सकते हैं.

यूक्रेन कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है. आयात रुका तो गेहूं-मकई जैसे अनाज के दाम बढ़ सकते हैं.

रूस और यूक्रेन लड़ रहे हैं लेकिन हजारों किमी दूर स्थित हमारे देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. युद्ध की वजह से क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल का दाम तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. इसकी वजह से भारत को करीब एक लाख करोड़ रुपये तक का चपत लगेगी.

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नई दिल्ली . युद्ध यानी नुकसान ही नुकसान. मानवीय से लेकर आर्थिक तबाही जैसे हर तरह के संकट लेकर युद्ध आता है. लड़ने वाले देशों के साथ -साथ उनसे जुड़े देश भी भारी नुकसान उठाते हैं. इस रूस और यूक्रेन लड़ रहे हैं लेकिन हजारों किमी दूर स्थित हमारे देश को भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. युद्ध की वजह से क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल का दाम तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. इसकी वजह से भारत को करीब एक लाख करोड़ रुपये तक का चपत लगेगी.

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही है. रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध खिंचा तो अगले वित्त वर्ष में सरकार के राजस्व में 95 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपये तक कमी आ सकती है. साथ ही घरेलू महंगाई भी बढ़ेगी. क्योंकि सभी वस्तुओं व उत्पादों की कीमतों पर असर हो सकता है.

हर महीने 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान 
जापानी शोध कंपनी नोमुरा का भी दावा है, इस संकट में भारत को एशिया में सर्वाधिक नुकसान होगा. एसबीआई के समूह प्रमुख आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2021 से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है.

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हालांकि भारत में सरकार ने इसे काबू रखा है. अगर कीमत 100 से 110 डॉलर की सीमा में रहती है तो वैट के ढांचे के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की कीमत मौजूदा दर से 9 से 14 रुपये प्रति लीटर अधिक होनी चाहिए. सरकार उत्पाद कर घटा कीमत बढ़ने से रोकती है, तो हर महीने 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा.

महंगाई पर सीधा असर 
अगले वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल की मांग 8 से 10 प्रतिशत बढ़ती है, तो पूरे वर्ष में नुकसान एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा. ये कीमतें महंगाई पर सीधा असर डालेंगी. अप्रैल 2021 में 63.4 डॉलर से तेल की कीमतें जनवरी 2022 में 84.67 डॉलर तक पहुंच गईं, यानी करीब 33.5 फीसदी वृद्धि हुई. यह 100 डॉलर के पारी चली जाती है, तो महंगाई और भी बढ़ेगी.

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भले ही इस युद्ध से भारत के रणनीतिक हित नहीं जुड़े हैं पर आर्थिक असर तो होगा ही. यूरोप को दी जाने वाली सेवाओं पर नकारात्मक असर होगा. रूस पर प्रतिबंधों से भारत से निर्यात होने वाली चाय और अन्य नियमित उत्पादों पर भी असर पड़ सकता है.

यूक्रेन कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक
सोने, प्लेटिनम और पैलेडियम जैसी मूल्यवान धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. यूक्रेन कृषि उत्पादों का बड़ा निर्यातक है. आयात रुका तो गेहूं-मकई जैसे अनाज के दाम बढ़ सकते हैं. जनवरी में महंगाई र 6.01 फीसदी पर थी, जो 7 महीने में सर्वाधिक है.

 नई चुनौतियां
यूक्रेन-रूस युद्ध, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वैश्विक शांति के लिए पहली बार बड़ी चुनौतियां लेकर आया है. यह हालात भारत के विकास के लिए भी नई चुनौतियां पेश करेंगे. महामारी से हुए आर्थिक नुकसान के बाद अब सुधार हो रहा है. इतने बड़े स्तर का युद्ध न केवल विश्व शांति के लिए बल्कि हमारे लिए भी नई चुनौतियां पैदा कर रहा है. -निर्मला सीतारमण, वित्तमंत्री

Tags: Crude oil, Crude oil prices, Inflation, Russia, War

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