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रुपये की कमजोरी से शार्ट-टर्म में भारतीय एक्सपोर्ट्स को मिलेगा फायदा, पढ़ें पूरी डिटेल

रुपये में बड़ी गिरावट के बीच भारत के पारंपरिक निर्यात जैसे कि आईटी, कृषि उत्पाद, कपड़ा, चाय, चमड़ा और इंजीनियरिंग गुड्स प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल कर सकते हैं.

रुपये में बड़ी गिरावट के बीच भारत के पारंपरिक निर्यात जैसे कि आईटी, कृषि उत्पाद, कपड़ा, चाय, चमड़ा और इंजीनियरिंग गुड्स प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल कर सकते हैं.

रुपये में बड़ी गिरावट के बीच भारत के पारंपरिक निर्यात जैसे कि आईटी, कृषि उत्पाद, कपड़ा, चाय, चमड़ा और इंजीनियरिंग गुड्स ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली. डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट के संबंध में आपने खबरें तो पढ़ीं और सुनी ही होंगी. इसमें कोई शक नहीं है कि रुपये की गिरावट से मुद्रास्फीति की दर बढ़ रही है और भारत में महंगाई लगातार ऊपर की तरफ रुख किए हुए है. भारत के लिए ये स्थिति इसलिए अच्छी नहीं है, क्योंकि भारत शुद्ध रूप से एक इम्पोर्ट करने वाला देश है. मतलब भारत निर्यात के मुकाबले आयात ज्यादा करता है.

पिछले वित्त वर्ष में व्यापार घाटा 192.24 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. महंगे ईंधन और खाद्य मुद्रास्फीति के लगातार बढ़ने के चलते रिजर्व बैंक ने पहले ही अपने पॉलिसी रेट्स में 40 आधार अंकों (0.40%) की वृद्धि कर दी है.

परंतु, रुपये में बड़ी गिरावट के बीच भारत के पारंपरिक निर्यात जैसे कि आईटी, कृषि उत्पाद, कपड़ा, चाय, चमड़ा और इंजीनियरिंग गुड्स प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल कर सकते हैं. लाइव मिंट की एक स्पेशल खबर के मुताबिक निर्यातकों का कहना है कि उन्हें अपने विदेशी शिपमेंट के लिए बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है, खासकर डॉलर के मुकाबले वाले बाजारों में.

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छोटे समय के लिए लाभकारी
एक अधिकारी ने कहा, अगर रुपया और कमजोर होता है तो कृषि निर्यात और बेहतर हो सकता है. चावल और गेहूं का निर्यात विशेष रूप से कंपीटिटिव होगा और निर्यातकों को अधिक ऑर्डर प्राप्त करने में मदद मिलेगी. एक ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में कुल निर्यात का 11.4% कृषि निर्यात शामिल था.

भारत के सबसे बड़े जूता निर्माताओं और निर्यातकों में से एक, फरीदा समूह के अध्यक्ष रफीक अहमद ने कहा कि रुपये की कमजोरी छोटे समय के लिए लाभ दे सकती है, “यह थोड़ा और पैसा बनाने में मदद करता है.” उन्होंने आगे कहा कि लेकिन ज्यादातर निर्यातकों को कच्चा माल आयात करना पड़ता है और ट्रांसपोर्ट की लागत भी चुकानी होती है तो ऐसे में यह सबकुछ बराबर करने जैसा है. रफीक अहमद ने कहा कि रुपये में कमजोरी से हमें बांग्लादेश और चीन की करेंसी, इस समय वो भी गिरी हुई हैं, से मुकाबला करने में मदद करेगा.

चाय के निर्यातकों की अलग राय
चाय के निर्यातकों को लगता है कि सब जगहों पर कमजोर रुपये का फायदा नहीं होगा. टी एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमन कानोरिया के हवाले से लाइव मिंट ने लिखा कि रुपये की कमजोरी से केवल वहीं लाभ होगा, जहां डॉलर में कारोबार होता है. क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है, परंतु यूरो (Euro) और येन (Yen) के मुकाबले वार्षिक आधार पर रुपया मजबूत हुआ है. उन्होंने कहा कि रूस और यूएई में तो फायदा होगा, मगर यूरोपियन देशों और जापान में नहीं.

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चाय के निर्यात की बात करें तो भारत की चाय सबसे ज्यादा रूस में जाती है, और उधर श्रीलंका के घरेलु हालात खराब हैं. श्रीलंका के खराब आर्थिक स्थिति के चलते भारत के चाय निर्यातकों के लिए ज्यादा विकल्प खुल गए हैं.

रुपये गिरने से आयात के लिए चुकाने होंगे ज्यादा पैसे
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) के पूर्व अध्यक्ष अनुपम शाह ने कहा कि रुपये में हो रही गिरावट से निश्चित तौर पर निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन इस लाभ की सीमा ग्लोबल डिमांड, कच्चे माल की कीमतों, मुद्रास्फीति और यूक्रेन संकट समेत कई अन्य कारकों पर निर्भर करेगी.

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है, चूंकि भारत आमतौर पर निर्यात से अधिक आयात करता है, “इसलिए अंततः करेंसी की गिरावट होने के बाद भारत को आयात के लिए अधिक भुगतान करना होगा.” उन्होंने कहा, “इसके अलावा, जब मुद्रा का अवमूल्यन होता है, तो एफपीआई निवेश करने के लिए ललचाते हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आरबीआई क्या करता है. यह रुपये की रेंज निर्धारित करेगा.”

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि भिन्न-भिन्न तरह की वैश्विक परिस्तिथियों के बीच भारतीय रुपये के गिरने से निर्यातकों को फायदा तो हो सकता है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़े सिरदर्द महंगा कच्चा माल, महंगा ईंधन और ट्रांसपोर्ट की बढ़ती लागत बने हुए हैं.

Tags: Export, Indian currency

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