दिवाली पर गहनों से ज्यादा लोग क्यों खरीदते हैं सोने-चांदी के सिक्के

ये हैं वो कारण जो बताते हैं कि आखिर कैसे है सोने और चांदी के सिक्के खरीदना फायदे का सौदा -
ये हैं वो कारण जो बताते हैं कि आखिर कैसे है सोने और चांदी के सिक्के खरीदना फायदे का सौदा -

हमारे यहां कई मौकों पर सोने और चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है. धनतेरस, दिवाली, अक्षय तृतीया आदि पर तो जमकर सोना खरीदा जाता है. लेकिन दुविधा यह रहती है कि ऐसे में सिक्के खरीदे जाएं या गहने.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 14, 2020, 7:24 AM IST
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नई दिल्ली. त्योहर के इस मौके पर धनतेरस से शुरू होकर बड़ी दिवाली (Diwali) तक सोने- चांदी (Gold- Silver) की जमकर खरीदारी होती है. जानकारों की मानें तो इस मौके पर सोने- चांदी की खरीदारी बेहद शुभ मानी जाती है. हालांकि अपनी समार्थ्य के अनुसार कुछ लोग धनतेरस पर स्टील का बर्तन खरीदकर शुभ कार्य कर लेते हैं. लेकिन जूलर्स की मानें तो ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान एक- एक ग्राहक लाखों रुपये का सोना- चांदी खरीदता हो. आमतौर पर धनतेरस से लेकर दिवाली तक 50 हज़ार से 2 लाख रुपये की खरीदारी करने वाला ग्राहक ही सुनार की दुकान पर चढ़ता है.

सबसे ज़्यादा बिकता है सोने-चांदी का बना सिक्का

रिटेल में सोने-चांदी का करोबार करने वाले रवि वर्मा का कहना है कि दिवाली के मौके पर सबसे ज़्यादा डिमांड सोने और चांदी से बने सिक्कों की होती है. चांदी में 1000 हज़ार रुपये से एक सिक्के की कीमत शुरू हो जाती है. उसके बाद कीमत आप पर तय करती है कि कितनी प्योर चांदी का सिक्का ले रहे हैं या फिर कितने वजन का है.



इसके बाद नंबर आता है सोने के सिक्के का. सोने के आज के भाव को देखते हुए आप कितने भी टंच का सिक्का ले लें अच्छा सिक्का 10 हज़ार रुपये से कम का नहीं है. सॉलिड धातु को ध्यान में रखकर दिवाली पर आने वाला ग्राहक सिक्कों की खरीदारी करता है. सोने का हो या चांदी का इस मौके पर ग्राहक 4-5 सिक्कों से कम नहीं खरीदता है.
1 किलो चांदी से बने लक्ष्मी-गणेश भी बिकते हैं- रवि का कहना है कि बाज़ार में 50 ग्राम और 100 चांदी से बने लक्ष्मी-गणेश भी मौजूद हैं तो 1 किलो से लेकर 8 किलो चांदी से बने लक्ष्मी- गणेश भी हैं. लेकिन एक किलो और 8 किलो वाले के ग्राहक कम होते हैं. सबसे ज़्यादा लक्ष्मी- गणेश 200 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक के बिकते हैं. क्योंकि यह मामला श्रद्धा से जुड़ा है तो आने वाला ग्राहक सोचकर तो 250 ग्राम की आता है, लेकिन मन बनने पर 500 ग्राम तक के ले जाता है. कुछ ग्राहक तो सोने से बने लक्ष्मी- गणेश भी खरीदते हैं.

खास बात यह है कि लक्ष्मी-गणेश की बिक्री के साथ ही इस दौरान दियों की बिक्री भी खूब होती है. क्योंकि जो ग्राहक सोने-चांदी के लक्ष्मी-गणेश खरीदता है तो चांदी या सोने का दिया भी खरीद लेता है.

ऐसा भी नहीं है कि जेवर नहीं बिकते- जूलर अशफाक का कहना है कि मैं तीसरी पीढ़ी का हूं जो बाप- दादा की इस दुकान को संभाल रहा हूं. कोई दिवाली मैंने ऐसी नहीं देखी जब सिक्के और लक्ष्मी- गणेश जी की मूर्ति के साथ जेवर न बिकते हों. लेकिन आम दिनों के ग्राहक और दिवाली वाले ग्राहक में एक बुनियादी फर्क यह होता है कि दिवाली वाला ग्राहक बहुत ही लाइट वैट जूलरी खरीदता है. हालांकि इस बार कोरोना- लॉकडाउन के चलते ग्राहक कम है, लेकिन फिर भी जूलरी वाले कुछ ग्राहक तो आ रहे हैं.

हमारे यहां कई मौकों पर सोने और चांदी की खरीदारी शुभ मानी जाती है. धनतेरस, दिवाली, अक्षय तृतीया आदि पर तो जमकर सोना खरीदा जाता है. लेकिन दुविधा यह रहती है कि ऐसे में सिक्के खरीदे जाएं या गहने.

त्योहारों के मौके पर कई ऑफर हमें लुभाते हैं और गहनों के आकर्षक डिजाइन देखकर लगता है कि बस यही राइट चॉइस है. लेकिन थोड़ा रुक कर सोचेंगे और समझदारी दिखाएंगे तो पता लगेगा कि गहनों से ज्यादा सिक्के खरीदना बेहतर रहता है.

ये हैं वो कारण जो बताते हैं कि आखिर कैसे है सोने और चांदी के सिक्के खरीदना फायदे का सौदा -

(1) मेंकिग चार्ज- जब भी सोने की जूलरी खरीदते है तो उस पर मेकिंग चार्ज देना पड़ता है. लेकिन जब आप वही जूलरी बेचने जाते हैं या एक्सचेंज करते हैं तो यह अमाउंट आपको वापस नहीं मिलती. इसलिए मेकिंग चार्ज के बोझ से बचना है तो सोने के सिक्के को ही प्रिफर करें. इस तरह आपको त्योहार पर ज्यादा खरीदारी के लिए और रकम भी मिल जाएगी.

(2) कभी भी सिक्कों से बनवा लें जूलरी- अगर आप सोने की जूलरी को सोने के सिक्के, बिस्कुट या फिर और किसी डिजाइन में बदलवा रहें हैं तो आपको इसके बदले मेंकिग चार्ज के बगैर केवल सोने की कीमत मिलेगी और आपको नए डिजाइन के बदले जो एडिशनल चार्ज देना होगा सो अलग. लेकिन अगर आपके पास सोने का सिक्का है तो आप बिना किसी नुकसान के इससे कभी भी जूलरी बनवा सकते हैं.

(3) निवेश का फायदेमंद सौदा- निवेश का मतलब ही है पैसे को प्रॉफिट कमाने के लिए लगाना. जब आप सोने की जूलरी में निवेश करते हैं तो आपको उसे बेचने पर मेंकिग चार्ज का नुकसान होता है. लेकिन अगर आपने सोने का सिक्का खरीदकर निवेश किया है तो भविष्य में सोने की कीमत बढ़ने पर अगर आप उसे बेचते है तो आपको बिना किसी नुकसान उसी सिक्के की ज्यादा कीमत मिलती है.

(4) सेफ्टी के लिहाज से भी फायदा- सोने की जूलरी के चोरी होने का खतरा ज्यादा होता है, चाहे आप उसे पहनें या फिर रखे रहें. वहीं सोने के सिक्कों को एक बैग में रखना आसान और सेफ होता है.
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