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क्या है हिन्दू अविभाजित परिवार, कौन खोल सकता है HUF अकाउंट, क्या हैं फायदे? जानिए सबकुछ

हिन्दू अविभाविज परिवार एक इमोशन है, जिसे कि कानूनी मान्यता दी गई है.

हिन्दू अविभाविज परिवार एक इमोशन है, जिसे कि कानूनी मान्यता दी गई है.

HUF न केवल हिन्दू, बल्कि सिख, बौद्ध और जैन भी बना सकते हैं. HUF एक प्रैक्टिस है, जिसे आयकर अधिनियम, 1961 (IT Act) के प्रावधानों के तहत एक अलग 'व्यक्ति' के रूप में माना गया है. इसे कई चीजों पर टैक्स छूट मिलती है.

नई दिल्ली. जब आयकर (Income Tax) की बात आती है तो यह इंडिविजुअल्स, कंपनियों, फर्म्स और अन्य एंटीटीज़ के लिए अलग-अलग होता है. ऐसी ही एक एंटीटी है हिन्दू अविभाजित परिवार (Hindu Undivided Family), जिसे कि शॉर्ट फॉर्म में HUF के नाम से जाना जाता है. इसके लिए टैक्स की अलग देनदारियां और छूट प्राप्त होती है.

आज हम आपको इसी के बारे में सबकुछ विस्तार से बताने वाले हैं कि यह क्या है, कैसे बनाया जाता है और इसके फायदे क्या होते हैं. दरअसल, यह भारत का एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जो परिवारों को एक-साथ रहने और अपने अलग-अलग बिजनेस को एक ही परिवार के तहत लाने को प्रेरित करता है. यह एक इमोशन है, जिसे कि कानूनी मान्यता दी गई है.

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वर्षों पहले बनाए गए इस कॉन्सेप्ट को लोग आज भी फॉलो करते हैं. और फॉलो करने का सबसे बड़ा कारण है इसके फायदे. यह सुनिश्चित करता है कि किसी व्यवसाय का धन और नियंत्रण परिवार के के भीतर बना रहे. चलिए समझते हैं इसके बारे में-

HUF में होता है एक कर्ता

हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF) किसी संहिताबद्ध कानून (Codified Law) बनाना नहीं है, बल्कि यह एक प्रैक्टिस है, जिसे आयकर अधिनियम, 1961 (IT Act) के प्रावधानों के तहत एक अलग ‘व्यक्ति’ के रूप में माना गया है. जी हां, अलग व्यक्ति के रूप में.

एक HUF में ऐसे लोग शामिल होते हैं जो एक कॉमन पूर्वज के वंशज हैं. एक व्यक्ति को एचयूएफ में जन्म से अधिकार प्राप्त होता है या फिर वह शादी के माध्यम से HUF में साझेदार बनता है. यह ‘बड़े पहले’ (Eldest First) की अवधारणा पर काम करता है.

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कैसे बनते हैं HUF का कर्ता

कर्ता (Karta) आमतौर पर परिवार का सबसे बड़ा सदस्य होता है. जब कर्ता की मृत्यु हो जाती है या सेवानिवृत्त हो जाता है, तो सबसे बड़ा बच्चा (पुरुष या महिला) एचयूएफ का अगला कर्ता बन जाता है, और एचयूएफ संपत्ति के बंटवारे के बिना हमेशा की तरह जारी रहता है. मतलब एक HUF की संपत्ति का बंटवारा नहीं होता, बल्कि उसक कर्ता बदल जाता है. जो भी बच्चे परिवार में पैदा हुए हैं, वे जन्म से अपने-आप ही एचयूएफ के सह-साझेदार बन जाते हैं.

शादी से सह-साझेदार बन जाती है महिला

जब कोई महिला किसी HUF के किसी सह-साझेदार से विवाह करती है तो वह भी स्वत: HUF की सदस्य बन जाती है. इस तरह महिलाओं के पास दो HUF में अधिकार मिलते हैं. पहला- वे अपने पिता के HUF में एक सह-साझेदार होती हैं और विवाह के बाद अपने पति के HUF में एक सदस्य बन जाती हैं. यहां सह-साझेदार को आप एक जॉइन्ट उत्तराधिकारी कह सकते हैं. इसके उलट, यदि हम पुरुष की बात करें तो वह शादी के बाद महिला के पेरेंट्स के HUF में सह-साझेदार नहीं बन सकता और न ही उसे कोई अधिकार मिलता है.

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HUF बनाने के लिए पैतृक संपत्ति की जरूरत नहीं

एचयूएफ बनाने के लिए परिवार का कोई विशेष प्रारूप नहीं होता है, जिसे कि एक संयुक्त परिवार में एक एकल परिवार की तरह ही स्थापित किया जा सकता हो. यही नहीं, एचयूएफ बनाने के लिए किसी पैतृक संपत्ति या विरासत में मिली संपत्ति का होना भी अनिवार्य नहीं है. खास बात यह है कि HUF न केवल हिन्दू, बल्कि सिख, बौद्ध और जैन भी बना सकते हैं. कानूनी रूप से कोई हिंदू, सिख, बौद्ध या जैन परिवार सिर्फ तभी HUF माना जाएगा, जब कोई व्यक्ति बैंकिंग व टैक्स संबंधी दस्तावेजों में खुद को अन्य पारिवारिक सदस्यों के साथ मिलाकर एक HUF के रूप में दर्ज करवा ले.

किसी भी अन्य व्यावसायिक इकाई (Business Entity) की तरह, HUF आय बनाने के लिए अपना बिजनेस चला सकता है. यह रियल एस्टेट, कीमती धातुओं, शेयर्स और म्यूचुअल फंड सहित किसी अन्य व्यक्ति की तरह अलग से भी निवेश कर सकता है.

फायदे : टैक्स में छूट (Tax benefits)

मनीकंट्रोल की एक खबर के अनुसार, चूंकि एक एचयूएफ एक अलग लीगल एंटीटी है, इसलिए उसे बेसिक टैक्स छूट प्राप्त है. इसे इसके सदस्यों से अलग माना जाता है और इसका अलग पैन कार्ड होता है, जिससे आय का एक अलग प्रवाह बनता है. एक एचयूएफ के सदस्यों को एचयूएफ से प्राप्त आय की किसी भी राशि पर टैक्स से पूरी छूट प्राप्त होती है, जहां HUF की आय में से राशि का भुगतान किया गया हो.

फायदे : लोन और इंश्योरेंस

एक एचयूएफ कुछ शर्तों के अनुसार अपने मैंबर्स को लोन दे सकता है. इसके अलावा, एक HUF आवासीय संपत्ति खरीदने के लिए होम लोन का भी लाभ उठा सकता है और लोन चुकाने के लिए और उस पर दिए गए ब्याज के लिए आईटी अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर लाभ प्राप्त कर सकता है.

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जिस तरह से साधारण लोगों को बीमा पॉलिसियों और अन्य निवेश साधनों पर वर्षभर अपने खर्चों के लिए टैक्स पर छूट प्राप्त होती है, ठीक उसी तरह के लाभ एक HUF के लिए भी लागू होते हैं. उदाहरण के लिए, एक HUF अपने व्यक्तिगत सदस्यों के लिए जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान कर सकता है और आईटी अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर लाभ का दावा कर सकता है.

इक्विटी-लिंक्ड पेमेंट स्कीम्स कुछ अन्य निवेश हैं जो इस छूट के लिए पात्र हैं. व्यक्ति, एचयूएफ के माध्यम से, आईटी अधिनियम की इस धारा के तहत लगभग 1.5 लाख रुपये की अधिकतम छूट और कटौती का दावा कर सकते हैं.

फायदे : निवेश (Investments)

एक HUF को आईटी अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स का लाभ पाने के लिए टैक्स-सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट और इक्विटी-लिंक्ड बचत योजनाओं (ELSS) में निवेश करने की अनुमति है. हालांकि एक HUF अपने नाम पर एक सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) खाता नहीं खोल सकता है, लेकिन यह अपने सदस्यों के संबंधित PPF खातों में HUF द्वारा जमा की गई राशि के लिए कर कटौती का दावा कर सकता है.

Tags: Business news in hindi, Income tax, Income tax exemption

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