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ओपन ऑफर क्‍या है और कैसे तय होती है इसकी कीमत? विस्‍तार से जानिए इसके बारे में

एनडीटीवी की 26 फीसदी हिस्‍सेदारी के लिए अडानी समूह द्वारा ओपन ऑफर जारी करने के बाद से ही यह चर्चा में है.

एनडीटीवी की 26 फीसदी हिस्‍सेदारी के लिए अडानी समूह द्वारा ओपन ऑफर जारी करने के बाद से ही यह चर्चा में है.

ओपन ऑफर (Open Offer) का उद्देश्‍य कंपनी पर नियंत्रण में बदलाव होने या फिर फिर शेयरों का पर्याप्‍त अधिग्रहण होने पर कंपन ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

ओपन ऑफर वह कंपनी ला सकती है जो किसी कंपनी के शेयरों का अधिग्रहण कर रही है.
ओपन ऑफर का उपयोग कंपनियों द्वारा दूसरी फर्म का अधिग्रहण के लिए किया जाता है.
अडानी समूह ने एनडीटीवी के अतिरिक्‍त 26 फीसदी शेयर अधिग्रहण करने को ओपन ऑफर जारी किया है.

नई दिल्‍ली. अडानी समूह ने अप्रत्यक्ष रूप से एनडीटीवी में 29.18 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने के बाद कंपनी के अतिरिक्‍त 26 फीसदी शेयर पाने के लिए ओपन ऑफर जारी कर दिया है. अडानी समूह ने 294 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर एनडीटीवी को 26 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 493 करोड़ रुपये का ऑफर दिया है. मंगलवार को हुए इस घटनाक्रम ने ओपन ऑफर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है, जिसका उपयोग कंपनियों द्वारा दूसरी फर्म का अधिग्रहण के लिए किया जाता है.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अनुसार, ओपन ऑफर वह कंपनी ला सकती है जो किसी कंपनी के शेयरों का अधिग्रहण कर रही है. अधिग्रहण करने वाली कंपनी टार्गेट कंपनी के शेयरधारकों को जब एक निश्चित मूल्‍य पर शेयर बेचने को आमंत्रित करती है तो वह ओपन ऑफर कहलाता है. एक ओपन ऑफर का उद्देश्‍य कंपनी पर नियंत्रण में बदलाव होने या फिर फिर शेयरों का पर्याप्‍त अधिग्रहण होने पर कंपनी के शेयरधारकों को कंपनी से बाहर निकले का विकल्‍प देना होता है. सरल शब्‍दों में कहें तो यह कंपनी के माइनॉरिटी शेयर होल्डर को पहले से तय कीमत पर अपने शेयर अपनी मर्जी से नए निवेशक को बेचने का एक साधन है.

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ओपन ऑफर कब लाया जाता है?

लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, शेयरधारकों से स्टॉक खरीदने के लिए ओपन ऑफर तब लाया जाता है जब एक इकाई ने टार्गेट कंपनी के शेयरों, मतदान के अधिकार या नियंत्रण का अधिग्रहण कर लिया है या ऐसा करने की सहमति व्‍यक्‍त की है. सेबी ने इसके लिए कुछ मानक स्‍थापित किए हैं. ओपन ऑफर के लिए ऑफर लाने वाली कंपनी ने टार्गेट कंपनी के 25 फीसदी से ज्‍यादा शेयरों का अधिग्रहण कर लिया हो या फिर एक वित्‍त वर्ष में पांच फीसदी से ज्‍यादा शेयर या वोटिंग अधिकार हासिल कर लिया हो.

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ओपन ऑफर की कीमत कैसे तय की जाती है?

सेबी का टेकओवर कोड में एक ओपन ऑफर में प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से अधिग्रहित किए जाने वाले शेयरों की कीमत निर्धारण के फामूर्ले का वर्णन किया गया है. ओपन ऑफर के मूल्‍य तय करने के चार मेट्रिक्‍स हैं- (क) मूल्‍य 52 सप्ताह में किसी शेयर के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस से अधिक होना चाहिए या (ख) ओपन ऑफर की घोषणा से पहले 26 सप्ताह में अधिग्रहणकर्ता द्वारा भुगतान की गई उच्चतम कीमत के बराबर इसका रेट होना चाहिए या (ग) ओपन ऑफर घोषणा से 60 दिन पहले शेयर की वॉल्‍यूम वेटेड एवरेज मार्केट प्राइस के बराबर रेट हो (घ) शेयर खरीद समझौते के तहत उच्चतम नेगोशिएटिड मूल्य हो.

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