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Bad Bank क्या है? बैंकिंग सेक्टर में सुधार के लिए बजट में सरकार इसका क्यों ऐलान कर सकती है?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को आम बजट 2021 पेश करेंगी. (सांकेतिक तस्वीर)
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को आम बजट 2021 पेश करेंगी. (सांकेतिक तस्वीर)

Budget 2021: बैंकिंग सिस्टम में बढ़ते एनपीए को देखते हुए बैड बैंक (Bad Bank) बनाने को लेकर लंबे समय से विचार हो रहा है. अब उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस दिशा में कोई कदम उठा सकती है. आरबीआई ने अनुमान जताया है कि मार्च तक एनपीए 12.5 फीसदी तक पहुंच सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 11:54 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के बीच भारतीय बैंकिंग सेक्टर (Banking Sector) के लिए 2020 एक कठिन साल रहा है. एक तरफ सरकार ने अपने 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज में ऐसे कई उपायों का ऐलान किया जिससे छोटे एवं मध्यम स्तर के उद्योगों को मौजूदा संकट से उबारा जा सके. दूसरी तरफ, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी अपने स्तर पर लिक्विडिटी उपायों का ऐलान किया. पिछले साल फरवरी से लेकर ये सभी उपाय करीब 12.7 लाख करोड़ रुपये के रहे. हालंकि, अब इन सबके बीच भारतीय बैंकों पर फंसे कर्ज यानी एनपीए का बोझ बढ़ता जा रहा है. अब केंद्र सरकार एक ‘बैड बैंक’ (Bad Bank) बनाने पर विचार कर रही है.

क्या है बैड बैंक?
बैड बैंक के आइडिया पर लंबे समय से विचार हो रहा है. वर्तमान में देखें तो भारतीय बैंकिंग सिस्टम में कुल NPA करीब 8.5 फीसदी है. आरबीआई का अनुमान है कि मार्च तक यह बढ़कर करीब 12.5 फीसदी हो जाएगा. इस बात की संभावना है कि बुरी स्थिति में यह आंकड़ा 14.7 फीसदी तक भी पहुंच सकता है. एक बैड बैंक सिस्टम में मौजूदा फंसे संपत्तियों को वापस लाने के लिए एग्रीगेटर का काम करता है. बैड बैंक के होने की वजह से बैंक अपने बिज़नेस पर सामान्य रूप से फोकस कर पाते हैं. चूंकि, बैंकिंग सिस्टम में सरकार का ही वर्चस्व है, ऐसे में उम्मीद है कि सरकार ही बैड बैंक के आइडिया को लेकर सामने आए.

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चूंकि, यह एक ऐसा समय है जब बैंकिंग सिस्टम में एनपीए बढ़ता रहा है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) इसके लिए रोडमैप का ऐलान करें. बैड बैंक को लेकर सरकार के ही एक हिस्से का कहना है कि बिना आरबीआई की अनुमति के यह मुमकिन नहीं हो सकेगा. उनका कहना है कि फंड्स मुहैया कराने के लिए कैपिटल इनफ्यूज़न (Capital Infusion in Banks) पर अधिक निर्भर रहना और बाद में एनपीए बढ़ना पब्लिक सेक्टर बैंको (PSBs) आगे चलाने में बाधा बनता रहेगा. रिकैप बॉन्ड्स की सर्विसिंग को लेकर ही सरकार पर 3 लाख करोड़ रुपये का बोझ है. इसमें से ही मैच्योरिटी की तारीख तक सरकार को 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज ही भरना है.



रोचक बात है कि 18 दिसंबर 2020 को CII के एक वेबिनार में आर्थिक मामलों के विभाग सचिव तरुण बजाज (Tarun Bajaj) ने बैड बैंक की संभावनाओं पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘बैंक एक ऐसा महत्वपूर्ण एरिया है जिसे हमें ठीक करने की जरूरत है. आपके द्वारा बताए गए विकल्प यानी बैड बैंक समेत हम कई अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. इसपर अभी भी काम जारी है, इसलिए थोड़े समय के लिए इंतजार कीजिए.’

सरकार के मुताबिक, इस साल पब्लिक सेक्टर बैंक बाजार से 60,000 करोड़ रुपये उठाने वाले हैं. जबकि, इन सरकारी बैंकों ने इक्विटी और बॉन्ड्स के जरिए पहले ही 40,000 करोड़ रुपये जुटाया है.

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इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष में अब तक 20,000 करोड़ रुपये के रिकैपिटलाइजेशन की स्वीकृति दी जा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, अतिरिक्त रिकैपिटलाइजेशन अब अगले वित्त वर्ष में ही होगा. हालांकि, यह रकम भी बहुत ज्यादा होने की उम्मीद नहीं की जा रही है. बैंकिंग सिस्टम देश के अर्थव्वस्था की रीढ़ हैं.
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