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ई-सिग्नेचर से घर बैठे आपको मिलते हैं ये 5 फायदें, जानें इससे जुड़ी सारी जरूरी बातें

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट डीएल जैसा कार्ड होता है. इसे सरकारी अथॉरिटी जारी करती है. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...
डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट डीएल जैसा कार्ड होता है. इसे सरकारी अथॉरिटी जारी करती है. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट डीएल जैसा कार्ड होता है. इसे सरकारी अथॉरिटी जारी करती है. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब...

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आजकल देश में डिजिटल सिग्नेचर का चलन तेज हो रहा है. जिस तरह आपके सामान्य दस्तखत आपकी पहचान को प्रमाणित करते हैं, उसी तरह डिजिटल सिग्नेचर का काम भी आपकी पहचान प्रमाणित करना ही है. बस फर्क यह है कि इंटरनेट के जरिये भेजे जाने वाले डॉक्युमेंट्स के मामले में इन सिग्नेचर का यूज होता है. डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट सरकार की सर्टिफाइंग अथॉरिटी इश्यू करती है. डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट डीएल जैसा कार्ड होता है. इस सर्टिफिकेट में आपकी पहचान साबित करने वाले डेटा होते हैं मसलन आपका नाम, ईमेल, अड्रेस आदि. आपको बता दें कि इनकम टैक्स रिटर्न भरने में आजकल डिजिटल सिग्नेचर या ई-साइन का इस्तेमाल तेजी से होने लगा है. जिन लोगों के पास डिजिटल साइन होते हैं, उनके लिए रिटर्न भरने की प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है. कई और मामलों में भी डिजिटल सिग्नेचर जरूरी हैं. आइए जानें इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब

(1) सवाल: डिजिटल सिग्नेचर और ई-सिग्नेचर क्या होते है?
जवाब: डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट एक इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट कार्ड की तरह है, जो बिजनेस करते समय या वेब पर कोई भी ट्रांजैक्शन करते हुए आपकी पहचान को स्थापित करता है. इस सिग्नेचर के साथ इंटरनेट के जरिये आप जो भी डॉक्युमेंट भेजते हैं, उसकी विश्वसनीयता बनती है.

इस सिग्नेचर के साथ भेजे गए डॉक्युमेंट से भेजने वाला कभी इनकार नहीं कर सकता. यह साइन यह सुनिश्चित भी करता है कि अगर कोई डॉक्युमेंट एक बार डिजिटली साइन हो गया तो फिर उसमें कोई रद्दोबदल या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. (ये भी पढ़ें-इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त आपको इस बार जरूर बतानी होंगी ये 7 बातें! जारी हुआ नया फॉर्म)




(2) सवाल: डिजिटल सिग्नेचर और ई-सिग्नेचर से क्या फायदा मिलता है?
जवाब: जिन लोगों के पास डिजिटल साइन होते हैं, उनके लिए रिटर्न भरने की प्रक्रिया थोड़ी आसान हो जाती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ई-साइन या इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर वास्तव में डिजिटल इंडिया के दौर में एक जरूरी चीज है. यह आपके हाथ में असीम ताकत दे देता है.

इसके बाद आप पेपर-पेन के बिना किसी को भी डिजिटल हस्ताक्षर कर दस्तावेज दे सकते हैं. ई-सिग्नेचर होने से आप क्लिक कर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. एक बार आप दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो फिर कोई भी इसमें बदलाव नहीं कर सकता. आपका सिग्नेचर एक एनक्रिप्टेड कोड की तरह काम करता है. अगर आप न चाहें तो आपके दस्तावेज में कोई बदलाव नहीं कर सकता.(ये भी पढ़ें-मोदी सरकार का चुनावी ट्रंप कार्ड: 5 लाख युवाओं को देगी 6 हजार रुपये महीना)

आपको मिलते हैं ये 5 फायदें
(1) डिजिटली साइन किए गए मेल भेजने और रिसीव करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया जाता है.

(2)  इंटरनेट पर आधारित कोई भी लेन-देन सुरक्षित तरीके से करने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है.

(3) ई-टेंडरिंग के लिए, कंपनी रजिस्टर करने के लिए और इनकम टैक्स रिटर्न की ई-फाइलिंग के लिए इसकी जरूरत होती है.

(4) एमएसवर्ड, एमएस एक्सेल और पीडीएफ डॉक्युमेंट्स को साइन करने के लिए डिजिटल सिग्नेचर की जरूरत होती है.

(5) पेपरलेस ऑफिस में यह अहम भूमिका निभाता है.



(3) सवाल: मैं कैसे बनवा सकता हूं डिजिटल सिग्नेचर?
जवाब: भारत सरकार की इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री में कंट्रोलर ऑफ सर्टिफाइंग अथॉरिटी होती    है, जो कुछ एजेंसियों को इसका लाइसेंस देता है कि वे यूजर्स को डिजिटल सर्टिफिकेट जारी कर सकें. इन एजेंसियों को लाइसेंस्ड सर्टिफाइंग एजेंसियां कहा जाता है और इन्हीं के जरिये कोई शख्स डिजिटल सिग्नेचर ले सकता है.

कई लाइसेंस्ड सर्टिफाइंग एजेंसियां हैं, जिनके जरिये डिजिटल सिग्नेचर लिए जा सकते हैं. ई-मुद्रा (emudhra.com), सिफी (safescrypt.com) और एनकोड (ncodesolutions.com). तीनों में से किसी भी एक एजेंसी से आप अपना या अपनी कंपनी का डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट ले सकते हैं. इसके अलावा इन लाइसेंस्ड सर्टिफाइंग एजेंसियों की अपनी-अपनी लाइसेंस्ड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी भी होती हैं. वहां से भी डिजिटल सर्टिफिकेट ले सकते हैं.

digitalsignatureindia.com, digitalsignature.in जैसी वेबसाइट लाइसेंस्ड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी हैं. या तो सीधे ई-मुद्रा, सिफी जैसी लाइसेंस्ड सर्टिफाइंग एजेंसियों से ले सकते हैं.

(4) सवाल:क्या ई-सिग्नेचर में बदलाव किया जा सकता है?
जवाब:
ई-सिग्नेचर होने से आप एक क्लिक पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. एक बार आप दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर देते हैं, तो फिर कोई भी इसमें बदलाव नहीं कर सकता. आपका सिग्नेचर एक एनक्रिप्टेड कोड की तरह काम करता है. अगर आप न चाहें तो आपके दस्तावेज में कोई बदलाव नहीं कर सकता.

(4) सवाल:क्या ये सिग्नेचर पूरी तरह सुरक्षित है?
जवाब: 
आप भले ही आपका ई-सिग्नेचर कोई थर्ड पार्टी जेनरेट कर रही है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित है. आपके पहली बार इस्तेमाल करते ही आपका ई-साइन थर्ड पार्टी वेंडर के सर्वर से डिलीट हो जाता है. आपका ई-साइन पूरी तरह कानूनी है और वैध है. प्रधानमंत्री ने इसकी शुरुआत की है. ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या सुविधाओं के इस्तेमाल में ई-साइन जल्द ही रफ्तार पकड़ सकता है.

डिजिटल सिग्नेचर के बारे में जानिए


(5) सवाल: डिजिटल सिग्नेचर कितने तरह के होते हैं?
जवाब: डिजिटल सिग्नेचर तीन तरह के होते हैं

क्लास 2: किसी कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराने या इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए क्लास 2 डिजिटल सिग्नेचर की जरूरत होती है. यह एक या दो साल के लिए इश्यू किया जाता है. इसके बाद सर्टिफिकेट को रिन्यू कराना पड़ता है.

क्लास 3: क्लास 3 सर्टिफिकेट ई-टेंडरिंग, ट्रेडमार्क/पेंटेंट फाइलिंग जैसे कामों के लिए जरूरी होता है. इसे एक या दो साल के लिए इश्यू किया जाता है. इस पीरियड के बाद यूजर को डिजिटल सर्टिफिकेट को रीन्यू कराना पड़ता है.

DGFT/DSC: यह डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए होता है. इसके जरिये वे आपसी लेन-देन पूरी सुरक्षा के साथ कर पाते हैं.

(6) सवाल: डिजिटल सिग्नेचर लेने का क्या तरीका है?
जवाब: 
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ई-मुद्रा से डिजिटल सिग्नेचर लेने का तरीका बताया जा रहा है. दूसरी एजेंसियों से भी लगभग इसी तरीके से अप्लाई कर सिग्नेचर लिया जा सकता है.

स्टेप 1: फॉर्म भरना
ई मुद्रा की साइट पर ऑनलाइन ऐप्लिकेशन भरें.

स्टेप 2: पेमेंट करना
इसके बाद आपको पेमेंट गेटवे पर ले जाया जाएगा. यहां आपको ऑनलाइन पेमेंट कर देना है.

स्टेप 3: फॉर्म जमा
भरे फॉर्म का प्रिंट लेकर कुछ डॉक्युमेंट्स की अटेस्टेड फोटोकॉपी लगानी होगी. अपना एक फोटो, आईडी प्रूफ और अड्रेस प्रूफ की अटेस्टेड कॉपी ऐप्लिकेशन फॉर्म के साथ लगानी होगी. ई-मुद्रा ऐप्लिकेशन फॉर्म और डॉक्युमेंट्स आपसे ले लेगा.

स्टेप 4: सिग्नेचर डाउनलोड
डॉक्युमेंट्स का वेरिफिकेशन करने के बाद ई-मुद्रा की ओर से आपको ई-मेल मिलेगा जिसमें आपका डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट होगा. डाउनलोड करने का तरीका और जरूरी पासवर्ड होंगे. इससे ई-मुद्रा की साइट से डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं.

(7) सवाल: डिजिटल सिग्नेचर के लिए कितनी फीस चुकानी होती है?
जवाब: 
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि सर्टिफिकेट की फीस अलग-अलग होती है. एक ही तरह के डिजिटल सर्टिफिकेट के लिए अलग-अलग एजेंसियों की कीमतों में फर्क हो सकता है. वैसे डिजिटल सर्टिफिकेट कहीं से भी लिया जाए, उसमें कोई फर्क नहीं होता.

हमेशा रखें इन बातों का ख्याल
>> डिजिटल सिग्नेचर को अपने कंप्यूटर में रखना सेफ नहीं माना जाता है क्योंकि अगर कोई और आपके कंप्यूटर पर काम करेगा तो इसके मिसयूज होने के चांस हैं.

>> अगर आपके कंप्यूटर को फॉर्मैट कर दिया गया तो भी यह खो सकता है. ऐसे में इसे ई-टोकन में रखना ही सही रहता है. ई-टोकन एक यूएसबी पोर्ट डिवाइस होता है जो पासवर्ड प्रॉटेक्टेड होता है.

>> इसे किसी भी सिस्टम के यूएसबी पोर्ट से जोड़कर डिजिटल सिग्नेचर को यूज किया जा सकता है. आपको बता दें कि कि ई-टोकन खरीदने के लिए आपको अलग से पैसे देने होते हैं जिसका ऑप्शन डिजिटल सिग्नेचर के लिए पसी का पेमेंट करते वक्त ही आपके सामने आ जाता है.

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