कमोडिटी मार्केट में इस तरीके से रिस्क कम कर कमाया जाता है मोटा मुनाफा, आप भी जानिए

फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड के जरिए विभिन्न एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में एक साथ खरीद-बिक्री की जा सकती है.

फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड के जरिए विभिन्न एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में एक साथ खरीद-बिक्री की जा सकती है.

फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड (Futures Calendar Spread) की स्ट्रैटजी से कमोडिटी मार्केट में कम हो जाती है रिस्क

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2021, 5:32 PM IST
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नई दिल्ली. शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच आजकल लोग कमोडिटी मार्केट में भी हाथ आजमा रहे हैं. लेकिन अधिकांश लोग रिस्क ज्यादा होने की वजह से इससे दूरी बनाए रखते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों ने एक एेसा फामूर्ला बताया है, जिससे रिस्क कम हो जाती है और मुनाफे की गारंटी बढ़ जाती है.

आप भी कमोडिटी मार्केट में ज्यादा जोखिम होने की वजह से अब तक इस मार्केट से दूरी बनाए हुए हैं, तो यह जानकारी आपको काफी मदद करेगी. हम बात कर रहे हैं- फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड (Futures Calendar Spread) स्ट्रैटेजी की. इसके जरिए ना सिर्फ आप अपने सौदे पर जोखिम कम करते हैं, बल्कि इसमें मुनाफे की गारंटी भी बढ़ जाएगी.

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फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड क्या है

फ्यूचर कैलेंडर स्प्रेड (Futures Calendar Spread) के जरिए विभिन्न एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में एक साथ खरीद-बिक्री की जा सकती है. एक ही कमोडिटी के दो अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट खरीदें और बेचें जा सकते है. दोनों सौदे के प्राइस अंतर को Calendar Spread कहते हैं. दोनों महीने के भाव में जो अंतर होगा वही आपका प्रॉफिट होता है.

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Spread स्ट्रैटेजी के फायदे

लॉन्ग या शॉर्ट टर्म के मुकाबले वोलेटिलिटी (Volatility) काफी कम होती है. कैपिटल पर कम मार्जिन के साथ बेहतर रिटर्न मिलता है. Calendar Spread में Directional Risk नहीं होता है. Spread में भाव पर सिर्फ डिमांड-सप्लाई का असर होता है. Money Flow या अन्य बाहरी प्रभाव का असर इसपर नहीं होता है.

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विदेशी बाजार के दाम 9 महीने के ऊपरी स्तर पर

चावल की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है. विदेशी बाजार के दाम 9 महीने के ऊपरी स्तर पर है. निवेशक और सट्टेबाजों का रुझान अब तेल-तिलहन से हटकर अनाजों की तरफ बढ़ा है जिससे चावल में तेजी देखने को मिल रही है. इसके अलावा मक्का, गेहूं और सोयबीन में भी जोरदार तेजी है. ग्लोबल मार्केट में चीनी  2 महीने के ऊपरी स्तर पर भाव पहुंच गया है. अप्रैल में रॉ शुगर के दाम 15% बढ़े है. यूरो जोन, ब्राजील के उत्पादन में कमी आई है. भारत में खपत के होने के आसार है। इधर BOT पर मक्का 8 साल और गेहूं 7 साल के ऊपरी स्तर पर पहुंचा है.
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