Gratuity क्या होती है? इसका पैसा कैसे कैलकुलेट होता है, जानिए सबकुछ विस्तार से

ग्रैच्युटी कैसे कैलकुलेट होती है

नौकरी करने वाले तमाम लोग ग्रैच्युटी (Gratuity) के बारे में अच्छी तरह नहीं जानते हैं. बस नाम सुने होते है. लेकिन किसी इम्लाई के लिए यह एक महत्वपूर्ण फंड होता है. दरअसल, कंपनी द्वारा कर्मचारी को सालों तक काम करने के एवज में दिया जाने वाला उपहार “ग्रैच्युटी” (Gratuity) कहलाता है.

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    नौकरी करने वाले तमाम लोग ग्रैच्युटी (Gratuity) के बारे में अच्छी तरह नहीं जानते हैं. बस नाम सुने होते है. लेकिन किसी इम्लाई के लिए यह एक महत्वपूर्ण फंड होता है. दरअसल, कंपनी द्वारा कर्मचारी को सालों तक काम करने के एवज में दिया जाने वाला उपहार “ग्रैच्युटी” (Gratuity) कहलाता है.

    ग्रैच्युटी का छोटा हिस्सा कर्मचारी की सैलरी से कटता है, लेकिन बड़ा हिस्सा कंपनी की तरफ से दिया जाता है.

    ऐसे समझें 
    जब कर्मचारी लंबे समय तक काम करने के बाद कंपनी छोड़ता है, तब उसको पेंशन और प्रोविडेंट फंड के अलावा ग्रेच्युटी भी दी जाती है.

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    आमतौर पर ग्रैच्युटी रिटायरमेंट के बाद मिलती है, लेकिन, यदि आप नौकरी बदल रहे हैं या बीच में छोड़ रहे हैं, तो कुछ शर्तों के पूरा करने बाद भी आप पहले भी ग्रेच्युटी ले सकते हैं.

    4 साल, 10 महिने, 11 दिनः
    अगर कर्मचारी नौकरी की कुछ शर्तों को पूरा करता है, तो ग्रैच्युटी का भुगतान एक निर्धारित फॉर्मूले के तहत गारंटीड तौर पर उसे दिया जाएगा.

    पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी एक्ट, 1972 के मुताबिक ग्रैच्युटी किसी भी ऐसे कर्मचारी को दी जाती है, जो नौकरी में लगातार 4 साल, 10 महीने, 11 दिन तक काम कर चुका हो.

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    क्योंकि पांच साल की नौकरी के बाद ही कोई भी कर्मचारी कानून ग्रैच्युटी का हकदार बनता है. मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक, अगर कोई शख्स एक कंपनी में कम से कम 5 साल तक काम करता है, तो वह ग्रैच्युटी का हकदार होता है.

    पेमेंट ऑफ ग्रेच्‍युटी एक्‍ट, 1972
    पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी एक्‍ट, 1972 के तहत इसका लाभ उस संस्‍थान के हर कर्मचारी को मिलता है जहां 10 से ज्‍यादा एंप्‍लॉई काम करते हैं.

    अगर कर्मचारी नौकरी बदलता है, रिटायर हो जाता है या किसी कारणवश नौकरी छोड़ देता है, लेकिन वह ग्रैच्‍युटी के नियमों को पूरा करता है, तो उसे ग्रैच्युटी का लाभ मिलता है.

    ग्रैच्युटी का कैलकुलेशनः
    आप ग्रैच्युटी की गणना करना चाहते हैं, तो पिछला वेतन और सेवा की अवधि के बारे में पता होना चाहिए.

    ग्रैच्युटी गिनने का फॉर्मूला = (15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) / 26

    यहां पिछली सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाले कमीशन से है.

    मान लीजिए, आपकी पिछली सैलरी 60,000 रुपये महीना है और आपने किसी कंपनी में लगातार 12 साल तक काम किया है, तो आपकी ग्रेच्युटी ऐसे गिन सकते हैं

    ग्रैच्युटी = (15 X 60,000 X 12)/26 = 4,15,385 रुपये

    यानी 12 साल की नौकरी करने के बाद आपकी ग्रैच्युटी 4,15,385 रुपये होगी.

    ग्रैच्युटी पर टैक्स लगता है?
    आयकर कानून के सेक्शन 10(10) के तहत कंपनी या किसी संस्थान द्वारा कर्मचारी को ग्रैच्युटी के तौर पर मिलने वाली 20 लाख रुपये तक की रकम टैक्स-फ्री है. पहले 10 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी टैक्स-फ्री थी.

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