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    Farm Laws Controversy: पंजाब के चार संशोधित कृषि विधेयकों में किसानों के लिए क्या है?

    पंजाब के नए कृषि बिलों के बारे में जानिए.
    पंजाब के नए कृषि बिलों के बारे में जानिए.

    पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों में ऐसा क्या संशोधन किया कि कांग्रेस उसे किसान हितैषी करार दे रही है?

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 26, 2020, 1:45 PM IST
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    नई दिल्ली. मोदी सरकार के कृषि कानूनों (Farm laws) के खिलाफ देश भर में हो रहे विरोध को देखते हुए पंजाब सरकार ने उसे अपने राज्य के लिए खारिज कर दिया है. साथ ही संशोधन करके चार नए कृषि विधेयकों को पारित किया है. इन विधेयकों को कानून बनवाने के लिए उसे राज्यपाल से लेकर राष्ट्रपति के दर तक जाना पड़ेगा. फिलहाल लोग यह जानना चाहते हैं कि अगर मोदी सरकार (Modi Government) का कृषि कानून किसान हितैषी नहीं था तो उसमें संशोधन करके कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ऐसा क्या कर दिया कि वो किसानों (Farmers) के लिए लाभकारी हो गया. आईए, समझते हैं कि आखिर इसमें क्या प्रावधान किए गए हैं.

    >>किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020: इसमें कहा गया है कि गेहूं और धान की बिक्री तभी वैध मानी जाएगी जब केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बराबर या उससे अधिक पर उसकी बिक्री हो रही हो. अगर कोई कंपनी, व्यक्ति और कॉरपोरेट हाउस किसी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर फसल बेचने को मजबूर करता पाया गया तो उसे कम से कम तीन साल की सजा होगी.

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    केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ पंजाब में सबसे ज्यादा विरोध (File Photo-ANI)




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    यह बिल केंद्र सरकार के ‘किसानों के (सशक्तिकरण और सुरक्षा) कीमत के भरोसे संबंधी करार और कृषि सेवाएं एक्ट, 2020 की धारा 1(2), 19 और 20 में संशोधन करता है. इसमें नई धाराओं 4, 6 से 11 को शामिल करने का प्रस्ताव भी दिया गया है.

    >>किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान एवं पंजाब संशोधन विधेयक 2020: इसकी धारा 1(2), 14 और 15 में संशोधन को मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य में गेहूं या धान की फसल की बिक्री या खरीद एमएसपी से कम कीमत न होने को सुनिश्चित बनाया जा सके. यह विधेयक राज्य में एपीएमसी (Agricultural produce market committee) अधिनियम 2016 को लेकर यथास्थिति बहाल करने की बात करता है. बिल में यह भी कहा गया है कि इस मामले में केंद्र सरकार के कानून का उल्लंघन करने वालों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी.

    >>आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) बिल 2020: इस बिल में अनाज को जमाखोरी और कालाबजारी से बचाने का प्रावधान है. यह बिल पंजाब सरकार को विशेष हालात में कृषि उपज के उत्पादन, वितरण, आपूर्ति और भंडारण का विशेष अधिकार देता है ताकि किसानों और खेत-मजदूरों की रोजी-रोटी सुरक्षित की जा सके.

    विधेयक में इस बात का जिक्र किया गया है कि उत्पादन, आपूर्ति और वितरण भी राज्य के विषय हैं लेकिन केंद्र सरकार ने जो कानून बनाया है उसमें व्यापारियों को जरूरी चीजों की असीमिति जमाखोरी की शक्ति प्रदान की गई है. कुल मिलकार यह विधेयक एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodities Act) पर 4 जून, 2020 से पहले जैसी स्थिति बहाल करने की मांग करता है.

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    केद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ बिल लाने वाला पहला राज्य है पंजाब.


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    कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर (पंजाब संशोधन) बिल, 2020: इस चौथे बिल में किसानों को 2.5 एकड़ से कम जमीन की कुर्की से राहत प्रदान की गई है. कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर 1908 की धारा 60 में 2.5 एकड़ से कम की कृषि वाली जमीन को छूट देने की व्यवस्था शामिल करता है. नए संशोधन के तहत पशु, यंत्र, पशुओं के बाड़े आदि किस्मों की जायदादें कुर्की से मुक्त होगी.
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