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क्या होता है 'न्यूनतम समर्थन मूल्य'? कैसे किसानों को मिलता है इससे फायदा

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 1:43 PM IST
क्या होता है 'न्यूनतम समर्थन मूल्य'? कैसे किसानों को मिलता है इससे फायदा
गेंहू के एमएसपी में 85 रुपये की बढ़ोतरी हुई

क्या आप जानते हैं MSP है क्या नहीं? नहीं.. तो यहां पढ़ें क्या होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य, कैसे होता है तय और क्या है MSP का फायदा..

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  • Last Updated: October 23, 2019, 1:43 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) ने दिवाली से पहले किसानों (Farmer) को बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने रबी फसलों के न्यून्तम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (MSP) को मंजूरी मिल गई है. सूत्रों के मुताबिक गेंहू के एमएसपी में 85 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है. वहीं, बाजारे के दाम में भी 85 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये से बढ़कर 1925 रुपये हो गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं MSP है क्या नहीं? नहीं.. तो यहां पढ़ें क्या होता है न्यूनतम समर्थन मूल्य, कैसे होता है तय और क्या है MSP का फायदा..

किसानों को उसकी फसल का लागत से ज्यादा मूल्य मिले, इसके लिए भारत सरकार देशभर में एक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है. खरीददार नहीं मिलने पर सरकार MSP पर किसान से फसल खरीद लेती है. जानिए इसकी पूरी प्रक्रिया और खामियां.

अगर देश में फसल का उत्पादन बढ़ता है तो बिक्री मूल्य कम हो जाता है. कृषि उत्पादों के मूल्यों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है. जो एक सत्र के लिए मान्य होता है.

 

अगर देश में फसल का उत्पादन बढ़ता है तो बिक्री मूल्य कम हो जाता है. कृषि उत्पादों के मूल्यों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है. जो एक सत्र के लिए मान्य होता है.

एमएसपी निर्धारित करते वक्त उत्पादक की लागत, मूल्यों में परिवर्तन, इनपुट आउटपुट मूल्य में समानता, मांग-आपूर्ति जैसी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है.

एमएसपी निर्धारित करते वक्त उत्पादक की लागत, मूल्यों में परिवर्तन, इनपुट आउटपुट मूल्य में समानता, मांग-आपूर्ति जैसी कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है.
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कृषि जानकारों का मानना है कि एमएसपी तय करने की प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है. ये कारण खेती, जलवायु, भौगोलिक, मिट्टी आदि की विविधता से उपजती हैं. खेतिहर मजदूरों की भी इस प्रक्रिया में ज्यादा भागीदारी नहीं है.

हालांकि कृषि जानकारों का मानना है कि एमएसपी तय करने की प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है. ये कारण खेती, जलवायु, भौगोलिक, मिट्टी आदि की विविधता से उपजती हैं. साथ ही खेतिहर मजदूरों की भी इस प्रक्रिया में ज्यादा भागीदारी नहीं है.

प्रक्रिया में बेशक कई खामियां हों लेकिन एमएसपी के कई फायदे भी हैं. इसके चलते कीमतों में स्थिरता बनी रहती है. न्यूनतम मूल्य मिलने की गारंटी होती है.

प्रक्रिया में बेशक कई खामियां हों लेकिन एमएसपी के कई फायदे भी हैं. इसके चलते कीमतों में स्थिरता बनी रहती है. न्यूनतम मूल्य मिलने की गारंटी होती है.

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First published: October 23, 2019, 1:43 PM IST
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