वर्ल्ड बैंक ने बताया- घर पैसे भेजने में सबसे आगे हैं भारतीय! पाकिस्तान की हालत हुई खराब

देश के बाहर रहने वाले नागरिकों द्वारा अपने देश में पैसे भेजने के मामले में भारत एक बार फिर टॉप पर है. आइए जानें इससे क्या होता है देश पर असर!

News18Hindi
Updated: April 9, 2019, 6:24 PM IST
वर्ल्ड बैंक ने बताया- घर पैसे भेजने में सबसे आगे हैं भारतीय! पाकिस्तान की हालत हुई खराब
विदेश से धन प्राप्त करने के मामले में भारत दुनिया में टॉप पर, जानिए रेमिटेंस के बारे में सबकुछ...
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Updated: April 9, 2019, 6:24 PM IST
वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विदेश से अपने देश पैसा भेजने के मामले में भारतीय सबसे आगे रहे हैं. 2018 में विदेशों में बसे भारतीयों ने 79 अरब डॉलर (करीब 5.53 लाख करोड़ रुपये) अपने देश में भेजे हैं. भारत के बाद चीन का नंबर आता है. चीनी नागरिकों ने 67 अरब डॉलर अपने देश भेजे. भारत और चीन के बाद मैक्सिको इस सूची में तीसरे स्थान (36 अरब डॉलर) पर रहा. अगर आसान शब्दों में समझे तो मान लीजिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीयों, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे एनआरआई भारतीय जब भारत में अपने माता-पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं.

भारत में रेमिटंस क्यों बढ़ा- केरल में बाढ़ की आपदा के कारण भारत में रेमिटेंसेज (दुनियाभर में फैले भारतीयों से मिले पैसे) में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इस आपदा में भारतीयों ने विदेशों से अपने परिवारों की मदद के लिए ज्यादा-से-ज्यादा पैसे भेजे. साल 2016 में भारत को 62.7 अरब डॉलर (करीब 42.65 खरब रुपये) का रिमिटंस हासिल हुआ था.(ये भी पढ़ें-दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे हैं ये 5 बड़े खतरे, जानें भारत पर क्या होगा असर!)

पाकिस्तान की हालत हुई खराब- पाकिस्तान को सबसे ज्यादा रेमिटेंस सऊदी अरब से मिलता है, लेकिन वहां से प्राप्त रेमिटेंस में बड़ी गिरावट के कारण पाकिस्तान में रेमिटेंस ग्रोथ महज 7% रही. वहीं, बांग्लादेश को पिछले वर्ष 15 फीसदी ज्यादा रेमिटेंस प्राप्त हुआ.



FDI से ज्यादा रेमिटेंस की प्राप्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, कम या मध्य आय वाले देशों को 2017 के मुकाबले 2018 में 9.6 प्रतिशत ज्यादा रेमिटेंस मिले और 2018 में यह आंकड़ा 529 अरब डॉलर (करीब 37,030 अरब रुपये) रहा.

ग्लोबल रिमिटंस बढ़कर 689 अरब डॉलर (करीब 48,230 अरब रुपये) तक पहुंच गया जो 2017 में 633 अरब डॉलर (करीब 43,044 अरब रुपये) था. 2018 में चीन को छोड़कर कम एवं मध्यम आय वाले देशों को एफडीआई से ज्यादा रेमिटेंस मिले.

क्या होता है रेमिटेंस- जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर से धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं.

>> अगर आसान शब्दों में समझे तो मान लीजिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीयों, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे एनआरआई भारतीय जब भारत में अपने माता-पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं.

कैसे डालता है देश की अर्थव्यवस्था पर असर- जो देश रेमिटेंस प्राप्त करता है, उसके लिए यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का जरिया होता है और वहां की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है.



>> खासकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में रेमिटेंस ने अहम भूमिका निभाई है. कई देश ऐसे हैं, जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रेमिटेंस से प्राप्त राशि का योगदान अन्य क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक है.

>> नेपाल, हैती, ताजिकिस्तान और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी के एक चौथाई के बराबर राशि रेमिटेंस के रूप में प्राप्त करते हैं. (ये भी पढ़ें: PF और PPF का सवाल आपको करता है परेशान, तो जानें इससे जुड़ी सारी खास बातें)



>>  बाग्लादेश में उनके प्रवासियों द्वारा भेजे गए धन में 2018 में 15% की वृद्धि दर्ज की गई.पिछले तीन साल में विदेश से भारत को भेजे गए पैसे में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है.

>> साल 2016 में यह 62.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2017 में 65.3 अरब डॉलर हो गया था. वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि केरल में आई बाढ़ के चलते प्रवासी भारतीय अपने परिवारो को अधिक आर्थिक मदद भेजेंगे.

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