विदेश से धन प्राप्त करने के मामले में भारत दुनिया में टॉप पर, जानिए रेमिटेंस के बारे में सबकुछ...

देश के बाहर रहने वाले नागरिकों द्वारा अपने देश में पैसे भेजने के मामले में भारत एक बार फिर अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखेगा.

News18Hindi
Updated: December 8, 2018, 2:09 PM IST
विदेश से धन प्राप्त करने के मामले में भारत दुनिया में टॉप पर, जानिए रेमिटेंस के बारे में सबकुछ...
प्रतीकात्मक तस्वीर
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Updated: December 8, 2018, 2:09 PM IST
विदेश में बसे अपने देश के लोगों से धन प्राप्त करने में भारत पहले स्थान पर कायम रहने की उम्मीद है. वर्ल्ड बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल भारत में 8000 करोड़ डॉलर (करीब 5.68 लाख करोड़ रुपये) का रमिटेंस आ सकता है. वहीं, पिछले साल यानी 2017 में विदेश में बसे भारतीयों ने अपने घर – परिवार के लोगों को 69 अरब डॉलर करीब 4.89 लाख करोड़ रुपये भेजे (रेमिटेंस) थे.

वर्ल्ड बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के बाद दूसरा नंबर चीन का रह सकता है. इस साल चीन में 6700 करोड़ डॉलर (करीब 4.75 लाख करोड़ रुपये) आ सकता है. तीसरे नंबर पर मैक्सिको और फिलीपींस रह सकते है. विदेश में बसे लोग वहां 3400 करोड़ डॉलर (करीब 2.41 लाख करोड़ रुपये) भेज सकते है. इसके बाद मिस्र का नंबर रहने की उम्मीद है. मिस्र को इस साल 2600 करोड़ डॉलर (करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये) मिलने का अनुमान है. (ये भी पढ़ें-रोज सिर्फ 7 रुपए जमा कर मोदी सरकार की इस स्कीम से पाएं पेंशन की गारंटी)

वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि विकासशील देशों में रेमिटेंस (धन प्रेषण) 2018 में 10.8 प्रतिशत बढ़कर 528 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. यह नया रेकॉर्ड स्तर 2017 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का के बाद का है. ऐसा अनुमान जताया जा रहा है कि वैश्विक रेमिटेंस जिसमें हाई इनकम वाले देश भी शामिल हैं, 10.3 प्रतिशत बढ़कर 689 अरब डॉलर हो जाएगा. भारत में रेमिटेंस 2016 में 62.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2017 में 65.3 अरब डॉलर हो गया था. कहा जा रहा है कि 2017 में रेमिटेंस भारत की जीडीपी का 2.7 प्रतिशत था. (ये भी पढ़ें-ये कंपनी देने वाली हैं 34 हजार लोगों को नौकरी, जानें प्रोसेस)

क्या होता है रेमिटेंस- जब एक प्रवासी अपने मूल देश को बैंक, पोस्ट ऑफिस या ऑनलाइन ट्रांसफर से धनराशि भेजता है तो उसे रेमिटेंस कहते हैं. अगर आसान शब्दों में समझे तो मान लीजिए खाड़ी के देशों में काम कर रहे भारतीयों, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में डॉक्टर और इंजीनियर की नौकरी कर रहे एनआरआई भारतीय जब भारत में अपने माता-पिता या परिवार को धनराशि भेजते हैं तो उसे रेमिटेंस कहते हैं. (ये भी पढ़ें-65000 नए पेट्रोल पंप खोलने का लोकसभा चुनाव से कोई लेना-देना नहीं: धर्मेंद्र प्रधान)

कैसे डालता है देश की अर्थव्यवस्था पर असर- जो देश रेमिटेंस प्राप्त करता है, उसके लिए यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का जरिया होता है और वहां की अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता है. खासकर छोटे और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने में रेमिटेंस ने अहम भूमिका निभाई है. कई देश ऐसे हैं, जिनके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में रेमिटेंस से प्राप्त राशि का योगदान अन्य क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक है. जैसे नेपाल, हैती, ताजिकिस्तान और टोंगा जैसे देश अपने जीडीपी के एक चौथाई के बराबर राशि रेमिटेंस के रूप में प्राप्त करते हैं. (ये भी पढ़ें-LIC की खास पॉलिसी! एक बार पैसा जमा करें, जीवनभर पेंशन की गारंटी)

आंकड़ों पर एक नज़र
>> 2017 में विदेश में बसे भारतीयों ने देश में 69 अरब डॉलर भेजे. यह इससे पिछले साल की तुलना में अधिक है, लेकिन 2014 में प्राप्त 70.4 अरब डॉलर के रेमिटेंस से कम है.
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>> यह 2016 के 429 अरब डॉलर से 8.5 प्रतिशत अधिक है. वैश्विक स्तर पर रेमिटेंस 2017 में सात प्रतिशत बढ़कर 613 अरब डॉलर पर पहुंच गया , जो 2016 में 573 अरब डॉलर रहा था. (ये भी पढ़ें-मोदी से पूछकर ही होगा कच्चे तेल पर फैसला, सऊदी अरब के तेल मंत्री का बयान)

 
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