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Standard Tax Deduction : जानिए क्‍या है यह छूट और क्‍यों इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं कर्मचारी

Standard Tax Deduction : जानिए क्‍या है यह छूट और क्‍यों इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं कर्मचारी

स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा फिलहाल 50,000 रुपये वार्षिक है. इस छूट का लाभ वेतनभोगी कर्मचारियों और पैंशनर्स को मिलता है.

स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा फिलहाल 50,000 रुपये वार्षिक है. इस छूट का लाभ वेतनभोगी कर्मचारियों और पैंशनर्स को मिलता है.

स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा फिलहाल 50,000 रुपये वार्षिक है. इस छूट का लाभ वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलता है. Budget 2022 में इस छूट में बढ़ोतरी की मांग उठ रही है.

नई दिल्‍ली. Standard Tax Deduction : वर्ष 2018 के बजट से एक बार फिर शुरू हुए स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन लाभ में बढ़ोतरी की उम्‍मीद आगामी बजट (Budget 2022) से भी कर्मचारी कर रहे हैं. फिलहाल स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा 50,000 रुपये वार्षिक है. इसे शुरू करने का उद्देश्‍य कर्मचारियों को टैक्‍स छूट देकर उनके हाथ में ज्‍यादा पैसा देना है.

कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि इनकम टैक्‍स के नियम वेतनभोगी कर्मचारियों के पक्ष में नहीं दिखते हैं. यहां कारोबारी और कंसल्‍टेंट्स महीने में कई तरह के खर्च पर एक्जंप्शन क्‍लेम कर सकते हैं, लेकिन वेतनभोगियों के लिए बहुत सीमित विकल्‍प उपलब्‍ध हैं. इसी अंतर को दूर करने के लिए सरकार ने 2018 (Budget 2022) के बजट में इसे वापस लागू कर दिया. तो आइये जानते हैं कि क्‍या है स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन और कौन-कौन है इसका हकदार.

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क्‍या है स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन (What is Standard Tax Deduction)
स्टैंडर्ड डिडक्शन वह रकम होती है, जिसे आपकी अपनी आमदनी से सीधे-सीधे काटकर अलग कर दी जाती है. बची हुई आमदनी पर ही टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स की गणना की जाती है. स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन में कुल वेतन में से कुछ खास राशि पर छूट दी जाती है ताकि कुल टैक्‍स योग्‍य आय कम हो जाए.

कौन उठा सकता है इसका लाभ
स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन का लाभ वे वेतनभोगी कर्मचारी और पैंसनर्स उठा सकते हैं, जिन्‍होंने नए टैक्‍स नियमों का विकल्‍प नहीं चुना है. नए नियमों में कम टैक्‍स दर का प्रावधान है. इसके अलावा पेंशन लेने वाले पेंशनर्स भी इस कटौती को पाने के हकदार हैं. लेकिन फैमिली पैंशन पर स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन नहीं मिलता. इसका अर्थ यह हुआ कि अगर किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसका कोई आश्रित पारिवारिक पेंशन ले रहा है, तो वह इस कटौती या छूट का हकदार नहीं है.

ऐसे समझिए इसे
स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा 50,000 रुपये या कुल सैलरी, जो भी कम हो, वह है. उदाहरण के लिए, एक ‘A’ नाम का कोई करदाता का कुल वार्षिक वेतन 5 लाख रुपये है तो इस स्थिति में उसे 50,000 रुपये का स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन मिलेगा. अगर ‘A’ व्‍यक्ति ने साल में केवल एक महीने ही काम किया और उसे 42000 रुपये वेतन मिला तो उस स्थिति में वह 42000 रुपये का स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन पाने का अधिकारी होगा.

जॉब बदलने का नहीं असर
स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन छूट पर नौकरी बदलने का कोई असर नहीं होता. Nangia Andersen LLP पार्टनर सुनील गिडवानी ने लाइव मिंट को बताया कि कुल सैलरी में यहां नियोक्‍ता द्वारा दी जानी वाली सैलरी के सभी कंपोनेंट और सभी अलांउसेज और पर्क के सारे टैक्‍सएबल भाग शामिल हैं. साल में अगर कोई कर्मचारी अपनी जॉब बदलता है तो भी वह स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन का लाभ पाने का हकदार है.

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बजट में बढ़ोतरी की आशा
बजट 2022 कर्मचारी आस कर रहे हैं कि स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन की सीमा में बढ़ोतरी होगी. Deloitte India के पार्टनर आलोक अग्रवाल ने बताया कि अन्‍य छूट के अलावा वेतनभोगी कर्मचारी स्‍टैंडर्ड डिडक्‍शन में भी बढ़ोतरी करने की अपेक्षा बजट में कर रहे हैं. अग्रवाल का कहना है कि इसकी 50,000 रुपये से इसे बढ़ाकर ज्‍यादा करने से अच्‍छा है कि इसे कास्‍ट इन्‍फ्लेशन इंडेक्‍स से जोड़ दिया जाए. इससे वेतनभोगी कर्मचारियों को ज्‍यादा फायदा होगा.

Tags: Budget, Income tax

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