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भगोड़े विजय माल्या के खिलाफ दिवालिया आदेश का क्या मतलब है, विस्तार से जानिए अभी तक का पूरा मामला

लंदन में विजय माल्‍या दिवालिया घोषित किया गया. (File pic)

लंदन में विजय माल्‍या दिवालिया घोषित किया गया. (File pic)

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का केस भारत के चर्चित लोन डिफाल्टर केस में से एक है. ब्रिटेन की एक अदालत ने सोमवार को माल्या को दिवालिया घोषित कर दिया. माल्या पर भारतीय बैंकों का 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है. आइए जानते हैं अब तक का पूरा मामला...

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    लंदन . भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन की एक अदालत ने सोमवार को दिवालिया घोषित कर दिया. माल्या के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व में भारतीय बैंकों के एक संघ ने ब्रिटिश कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. अब भारतीय बैंकों द्वारा दुनियाभर में फैली माल्या की संपत्ति को जब्त करना आसान होगा.



    माल्या देश से भागने के एक साल बाद 2017 से भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लड़ रहा है. हालांकि इस आदेश के बाद यह सवाल उठता है कि भारतीय बैंक अपने कर्ज की भरपाई कैसे कर पाएंगे.

    अब आगे क्या होगा 



    इस केस में ब्रिटेन के कानून के मुताबिक, अनिवार्य रूप से माल्या को अब अपने सभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ अपनी शेष संपत्ति एक दिवालियापन ट्रस्टी (bankruptcy trustee) को सौंपनी होगी. यह ट्रस्टी आगे की जांच करेगा और उसकी संपत्ति व देनदारियों का निर्धारण करेगा. इस मूल्यांकन का उपयोग भारतीय बैंकों के संघ द्वारा बैड लोन के भुगतान करने के लिए किया जाएगा.

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    साल 2013 से शुरू ये कहानी

    साल 2013 के आस-पास माल्या की Kingfisher Airlines Ltd फेल हुई. माल्या द्वारा एक दर्जन से ज्यादा भारतीय बैंकों के 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के लोन डिफाल्ट हुआ. इसके बाद माल्या प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की जांच के दायरे में है.

    कर्ज देने वाले बैंक 

    कर्ज देने वाले बैंकों की लिस्ट में Bank of Baroda, Corporation bank, Federal Bank Ltd, IDBI Bank, Indian Overseas Bank, Jammu & Kashmir Bank, Punjab & Sind Bank, Punjab National Bank, State Bank of Mysore, UCO Bank, United Bank of India और JM Financial Asset Reconstruction Co. Pvt Ltd शामिल हैं.



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    साल 2005 में शुरू हुई किंगफिशर एयरलाइन

    65 वर्षीय विजय माल्या, बैंगलोर स्थित United Breweries Holdings Limited (UBHL) का अध्यक्ष और किंगफिशर एयरलाइंस का मालिक था. इस एयरलाइन्स को माल्या ने वर्ष 2003 में लॉन्च किया था. एयरलाइन ने 2005 में a single-class (economy) के रूप में परिचालन शुरू किया था.

    साल 2007 में कर्ज में डूबी एयर डेक्कन को खरीदा

    2007 में, किंगफिशर एयरलाइंस ने कम लागत वाली वाहक एयर डेक्कन को खरीदने का फैसला किया, जो उस समय कर्ज में थी. खरीद को 2008 में अंतिम रूप दिया गया था. किंगफिशर एयरलाइंस ने एयर डेक्कन की मूल कंपनी डेक्कन एविएशन में लगभग 46 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.

    साल 2008 से किंगफिशर एयरलाइन का घाटा शुरू 

    इसके तुरंत बाद, मार्च 2008 में, माल्या की एयरलाइन ने घाटा दर्ज करना शुरू कर दिया. तेल की बढ़ती कीमतें भी एक कारण थी. यही वह टर्निंग प्वाइंट था, जहां से उसका कर्ज बढ़ना शुरू हुआ. अगले कुछ वर्षों में, एयरलाइन ने अपनी कुल संपत्ति का लगभग 50 प्रतिशत लोन (Loan) ले लिया.ग्लोबसिन बिजनेस स्कूल, कोलकाता ने साल 2013 के किंगफिशर एयरलाइन पर एक केस स्टडी की. इस स्टडी के मुताबिक, कंपनी ने अपनी स्थापना के बाद से कभी भी लाभ (profit) की सूचना नहीं दी.

    साल 2012 में किंगफिशर एयरलाइन बंद

    साल 2012 तक, एयरलाइन ने अपने सभी परिचालन बंद कर दिए क्योंकि वह खर्चों को नहीं उठा पा रही थी. 2013 में, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में भारतीय बैंकों के एक संघ ने यूबीएचएल से 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण की वापसी के लिए संपर्क किया. कंपनी ने ऋणों का भुगतान नहीं किया. साल 2014 के अंत में, यूबीएचएल, जो एयरलाइंस की गारंटर थी, ने इसे एक विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया.

    मार्च 2016 में माल्या ब्रिटेन भागा

    इसके बाद, मार्च 2016 में माल्या ब्रिटेन भाग गया. फरवरी 2017 में, भारत ने माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन को अनुरोध भेजा. तब से, माल्या भारत में अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ लड़ रहा है, लेकिन वहां जमानत पर है. इस तरह मामला ब्रिटेन की अदालतों तक पहुंचा.



    अप्रैल, 2020 में यूके के एक उच्च न्यायालय ने प्रत्यर्पण के खिलाफ उसकी अपील को खारिज कर दिया. उस समय, न्यायाधीश ने उनके खिलाफ आदेश में कहा, माल्या, जिसने किसी भी गलत काम से इनकार किया है, भारत में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, मनी लॉन्ड्रिंग और ऋण निधि के डायवर्जन के आरोपों का सामना कर रहा है. किंगफिशर एयरलाइंस सहित उनकी कुछ कंपनियों पर कंपनी अधिनियम, 2013 और पूंजी बाजार नियामक द्वारा निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन के आरोप हैं.

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