आलू के बाद अब महंगा हुआ प्याज, 1 महीने में डबल हुई कीमतें, कब मिलेगी राहत

आम आदमी की बढ़ी मुश्किलें आलू का दाम हुआ दोगुना, आसमान छू रही हैं सब्जियों कीमत

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई हिस्सों में जो सब्जियां 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम (Vegetable Price Today) बिकते थे, उन्हीं सब्जियों के दाम अब 100 रुपये के पार चले गए हैं. बीते एक महीने के दौरान प्याज की कीमतें दोगुनी हो चुकी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:
    नई दिल्ली. कोरोना के इस संकट में आम आदमी की मुश्किलें रोजाना (Inflation) बढ़ती जा रही है. रोजमर्रा की चीजों के बाद अब सब्जियों (Vegetable Price Today) की कीमतें भी सातवें आसमान पर पहुंच गई है. रिटेल में 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिकने वाली प्याज की कीमतें अब 35-45 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. कारोबारियों का कहना है कि आलू के बाद अब प्याज की कीमतों में तेजी आ रही है. इसकी वजह प्याज की फसल का खराब होना है. दरअसल, कर्नाटक में भारी बारिश की वजह से फसल को नुकसान हुआ है. इसी वजह से उत्तर भारत समेत कई इलाकों में आवक घट गई है. हालांकि, अगले 15 दिन तक प्याज की कीमतों में कमी की उम्मीद नहीं है.

    100 रुपये के पार पहुंचे सब्जियों के दाम-दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) सहित देश के कई हिस्सों में जो सब्जियां 20 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम बिकते थे, उन्हीं सब्जियों के दाम अब 100 रुपये के पार हो गए हैं.

    ब्रोकली (Broccoli) जैसी सब्जियां तो 400 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा दामों में बिक रही हैं. सब्जियों के बढ़ते दाम से सभी वर्गों के लोग परेशान हैं.दिल्ली की मंडियों में टमाटर 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तो आलू 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे हैं.

    80 नई ट्रेनों में टिकट बुक करने से पहले चेक करें रेलवे की ओर से जारी रिजर्वेशन के नियम

    गाजीपुर मंडी में धनिया 200 रुपये प्रति किलोग्राम और लहसुन 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है.वहीं मिर्च 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है. बैंगन, भिंडी और प्याज के दामों भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है.

    क्यों महंगी हो रही है प्याज- अंग्रेजी के अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, प्याज की थोक मंडियों में 8 अगस्त के बाद से प्याज की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है. इस दौरान कीमतें बढ़कर 2500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.

    एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर सब्जी मंडी के अध्यक्ष और ट्रेडर राजेंद्र शर्मा कहते हैं, शर्मा आगे कहते हैं, अगर प्याज 12-14 रुपये बिकते हैं तो सोचिए किसान को क्या मिलता होगा? जबकि सरकार कहती है कि किसान को डबल मुनाफा मिले. बताइए इस रेट में किसान को मुनाफा डबल मिलेगा? लोग सब्जी कम खरीद रहे हैं, इसके कई कारण हो सकते हैं. बरसात के समय में अक्सर मंडियों में सब्जियों की सप्लाई कम हो जाती है.

    प्याज का उत्पादन मुख्यत: छह राज्यों में होता है. 50 प्रतिशत प्याज भारत की 10 मंडियों से ही आता है. इनमें से छह महाराष्ट्र और कर्नाटक में हैं. इसका मतलब हुआ कि कुछ सौ व्यापारियों के हाथ में 50 प्रतिशत प्याज की कीमतें रहती हैं. ये व्यापारी अपने तरीकों से प्याज की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. साथ ही प्याज का कोई न्यूनतम समर्थन मूल्य तय नहीं है.