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भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या बता रही है लिपस्टिक?, जानें पूरा मामला

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Updated: August 29, 2019, 5:04 PM IST
भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में क्या बता रही है लिपस्टिक?, जानें पूरा मामला
भारत में कलर कॉस्मेटिक्स मार्केट डबल-डिजिट की रफ्तार से बढ़ी है. वो भी ऐसे समय में जब देश में ऑटोमोबाइल (Automobile) और रियल एस्टेट (Real Estate) जैसे सेक्टर में मंदी देखी जा रही है.

भारत में कलर कॉस्मेटिक्स मार्केट डबल-डिजिट की रफ्तार से बढ़ी है. वो भी ऐसे समय में जब देश में ऑटोमोबाइल (Automobile) और रियल एस्टेट (Real Estate) जैसे सेक्टर में मंदी देखी जा रही है.

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  • Last Updated: August 29, 2019, 5:04 PM IST
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'लिपस्टिक इंडेक्स' (Lipstick Index), जो पश्चिमी बाजारों (Western Markets) में मंदी (Slowdown) का एक मार्कर है. लेकिन भारत में कलर कॉस्मेटिक्स मार्केट डबल-डिजिट की रफ्तार से बढ़ी है. वो भी ऐसे समय में जब देश में ऑटोमोबाइल (Automobile) और रियल एस्टेट (Real Estate) जैसे सेक्टर में मंदी देखी जा रही है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लिपस्टिक की बिक्री बढ़ी है. लैक्मे (Lakme) और लॉरिअल (L’oreal) जैसे ब्रैंड्स के लिपस्टिक की बिक्री डबल डिजिट में बढ़ी है. लिपस्टिक इंडेक्स में इसे देखा गया है. Lipstick Index के मुताबिक यह मंदी की ओर ही इशारा कर रहा है. इस फॉर्म्युले के मुताबिक मंदी में लिपस्टिक की बिक्री बढ़ जाती है. ऐसा माना जाता है कि मंदी के दौरान महिलाएं कपड़ों और अन्य महंगे फैशन की बजाय लिपस्टिक पर अधिक खर्च करती हैं.

लियोनार्ड लॉडर ने सबसे पहले किया था Lipstick Index का प्रयोग
Lipstick Index का प्रयोग सबसे पहले 'एस्टी लॉडर' के पूर्व चेयरमैन लियोनार्ड लॉडर ने वर्ष 2000 की आर्थिक मंदी के दौरान कंपनी की कॉस्मेटिक बिक्री में हुई बढ़ोतरी को समझाने के लिए किया था. कई सारे कलर कॉस्मेटिक ब्रांड्स ने 2001 और 2008 की मंदी में समान ट्रेंड दिखाए थे. ये भी पढ़ें: अंडरवेयर सेल्स गिरने और डेटिंग बढ़ने से मिलता है आर्थिक मंदी का संकेत! जानें पूरा मामला

अर्थव्यवस्था में सुस्ती का संकेत दे रही लिपस्टिक की बढ़ती बिक्री


रिपोर्ट के मुताबिक, लैक्मे की मार्केटिंग कंपनी हिन्दुस्तान यूनिलिवर (HUL) को लगता है कि कलर कॉस्मेटिक सुस्ती से अछूत है, इसके पीछे एक कारण यह भी है कि कंज्यूमर उपयोग अभी भी कम है. अर्थशास्त्रियों ने इसे इस सिद्धांत के साथ समझाया है कि इनकम में गिरावट के साथ इंफिरियर गुड्स की खपत बढ़ जाती है. लिपस्टिक हालांकि इंफिरियर गुड्स नहीं है, लेकिन यह महंगी सामानों का एक सस्ता विकल्प है. इंफिरियर गुड्स को आप ऐसे समझ सकते हैं. जब लोगों की इनकम घटती है तो बस सर्विसेज की डिमांड बढ़ जाती है. वहीं इनकम बढ़ने पर लोग कार-बाइक खरीदने लगते हैं.

अधिकांश ब्रांडों के पास अलग-अगल कीमतों में लिपस्टिक के कई वेराइटी हैं, जो हरके उम्र के खरीदार को अपनी ओर आकर्षित करता है. अगर प्रीमियम नहीं है, तो लैक्मे लिपस्टिक 800 रुपये और 200 रुपये की कीमत में भी उपलब्ध है.
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लॉरिअल इंडिया भी तेजी से डबल-डिजिट से बढ़ रही है और कलर कॉस्मेटिक्स में लॉरिअल की बिक्री 35-40 फीसदी होती है. कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक, अवेयरनेस में बढ़ोतरी और मेकअप की शिक्षा बढ़ना, बिक्री में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार हैं. इसके साथ यू-ट्यूब और सोशल मीडिया इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.

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First published: August 29, 2019, 5:04 PM IST
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