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Rakesh Jhunjhunwala के खास मंत्र से सीखें लंबी अवधि में मोटी पूंजी बनाना, 'बिग बुल' छोड़ गए हैं निवेश नियमों की विरासत

बिग बुल राकेश झुनझुनवाला अब हमारे बीच नहीं रहे हैं.

बिग बुल राकेश झुनझुनवाला अब हमारे बीच नहीं रहे हैं.

एक सीए और इनकम टैक्स अधिकारी के बेटे झुनझुनवाला ने साल 1985 में शेयर बाजार में 5 हजार रुपये से प्रवेश किया था, जब सेंसे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

झुनझुनवाला समय-समय पर निवेशकों को शेयर बाजार से पैसा कमाने के मंत्र बताते रहते थे.
ग्रोथ एक प्रक्रिया है, इसे किनारे करने की कोशिश न करें.
झुनझुनवाला ने निवेश सिद्धांतों की अपनी विरासत को छोड़ा है.

नई दिल्ली. भारत के वारेन बफेट के नाम से मशहूर रहे राकेश झुनझुनवाला (Rakesh Jhunjhunwala) पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं. शेयर बाजार के ‘बिग बुल’ के कहे जाने वाले झुनझुनवाला का 14 अगस्त को हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया था. एक सीए और इनकम टैक्स अधिकारी के बेटे झुनझुनवाला ने साल 1985 में शेयर बाजार में 5 हजार रुपये से प्रवेश किया था, जब सेंसेक्स सिर्फ 150 अंक पर था.

फोर्ब्स के आंकड़ों के मुताबिक, वह अपने परिवार के लिए 5.8 बिलियन डॉलर की संपत्ति छोड़कर इस दुनिया को अलविदा कहा. उनकी मृत्यु के बाद भी उन्होंने निवेश सिद्धांतों की अपनी विरासत को छोड़ा है जो शेयर बाजार के निवेशकों को शेयर बाजारों से धन उगाहने के लिए प्रेरित करता रहेगा.

कॉर्पोरेट गवर्नेंस की एक बहुत बड़ी दुनिया
टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2021 के साथ एक इंटरव्यू में राकेश झुनझुनवाला से लॉन्ग टर्म वेल्थ बनाने के लिए उनकी सलाह के बारे में पूछा गया था. उन्होंने बुनियादी सिद्धांतों के बारे में बताते हुए कहा था कि पहली बात यह है कि आपको उस इंडस्ट्री में होना चाहिए जो बड़े अवसरों पर बढ़ रहा है, दूसरा कॉर्पोरेट गवर्नेंस है. उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस की एक बहुत बड़ी दुनिया है. इसमें समाज के प्रति, ग्राहकों के प्रति, कर्मचारियों के प्रति, हितधारकों के प्रति अनुचित जोखिम न लेना शामिल है.

ये भी पढ़ें- शेयर बाजार से बनाना है पैसा तो राकेश झुनझुनवाला के निवेश मंत्रों को कभी मत भूलना!

झुनझुनवाला ने कहा था कि तीसरा सिद्धांत टेक्नोलॉजी और बदलने की क्षमता है. चौथा है मितव्ययिता होना चाहिए. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि मैं इंडिगो और डीमार्ट को एक्सट्रीम कंपनियों के रूप में मानता हूं जो मितव्ययिता का उपयोग करते हैं.

ग्रोथ एक प्रक्रिया है
उन्होंने आगे कहा था, “जो कंपनियां धैर्य रखती हैं, आप जानते हैं कि अगर कल दौड़ खत्म नहीं होने वाली है, तो मुझे हमेशा लगता है कि कछुआ अंत में जीतता है. इसलिए ग्रोथ एक प्रक्रिया है, इसे किनारे करने की कोशिश न करें. लंबी अवधि के रिटर्न के लिए यह मूल सिद्धांत हैं.”

Tags: Rakesh Jhunjhunwala, Share market

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