कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसी क्या खरीदनी चाहिए? दोनों में कौन सी बेहतर है, यहां जानिए

Corona Kavach और Corona Rakshak

मुंबई. कोरोना ने अचानक से लोगों के स्वास्थ्य खर्चों को बढ़ा दिया है. कोरोना के डर को देखते हुए जिनके पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं था वो भी ले रहे हैं. ऐसे में बीमा कंपनियों ने लोगों के लिए Corona Kavach और Corona Rakshak जैसी पॉलिसी लेकर आई हैं.

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    मुंबई. कोरोना ने अचानक से लोगों के स्वास्थ्य खर्चों को बढ़ा दिया है. कोरोना के डर को देखते हुए जिनके पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं था वो भी ले रहे हैं. कोरोना महामारी के इस दौर में कोरोना संक्रमण के इतने मामले आए कि इससे जुड़े इंश्योंरेस कवर की जरूरत महसूस हुई. ऐसे में बीमा कंपनियों ने लोगों के लिए Corona Kavach और Corona Rakshak जैसी पॉलिसी लेकर आई हैं.
    महामारी के इस दौर में जबकि कोरोना का खतरा अभी गया नहीं है, यह पॉलिसी लेना बहुत जरूरी-सा हो गया है. हालांकि इन दोनों ही पॉलिसीज का उद्देश्य लगभग समान हैं लेकिन बेनेफिट्स को लेकर दोनों में कुछ अंतर है जिसके चलते पॉलिसी खरीदने से पहले एक बार स्टडी जरूर कर लेना चाहिए.

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    क्यों लेनी चाहिए कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसी
    > दोनों ही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को मामूली प्रीमियम पर स्टैंडर्ड कवरेज बेनेफिट्स प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है.
    > बीमा नियामक IRDAI के दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोरोना कवच पॉलिसी के तहत 50 हजार रुपये से 5 लाख रुपये तक का सम एश्योर्ड मिलेगा.
    > 18-65 वर्ष के लोग इस पॉलिसी को खरीद सकते हैं. माता-पिता 1 दिन से लेकर 25 वर्ष तक के बच्चों के लिए इस पॉलिसी को खरीद सकते हैं.
    > दोनों ही पॉलिसीज के तहत कोरोना उपचार के दौरान उत्पन्न होने वाली को-मॉर्बिडीज को कवर किया जाता है.
    > कोरोना महामारी का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है और तीसरी लहर को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं. ऐसे में इससे जुड़ा कवर हासिल कर लेना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय बोझ से बचा जा सके.
    दोनों में किस पॉलिसी को खरीदना बेहतर
    कोरोना कवच और कोरोना रक्षक पॉलिसी दोनों ही कोरोना संक्रमण को लेकर कवर उपलब्ध कराती हैं लेकिन दोनों के कवरेज बेनेफिट्स अलग-अलग हैं. ऐसे में पॉलिसी खरीदने से पहले दोनों के बेनेफिट्स की तुलना कर लेनी चाहिए.

    सम एश्योर्ड: कोरोना कवच पॉलिसी के तहत 50 हजार- 5 लाख रुपये तक का सम एश्योर्ड चुन सकते हैं जबकि कोरोना रक्षक पॉलिसी के तहत 50 हजार-2.5 लाख रुपये तक का सम एश्योर्ड चुन सकते हैं. दोनों ही पॉलिसी कोरोना के इलाज के दौरान उत्पन्न होने वाली को-मॉर्बिडीज को कवर करती हैं, इसलिए अधिक सम एश्योर्ड और ज्यादा पॉलिसी अवधि वाली पॉलिसी को लेना बेहतर होगा. दोनों ही पॉलिसीज 3.5 महीने, 6.5 महीने और 9.5 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध है.
    अस्पताल से जुड़े खर्चे: कोरोना कवच पॉलिसी के तहत न्यूनतम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती हो गए तो बेनेफिट्स मिलेगा जबकि कोरोना रक्षक पॉलिसी के तहत न्यूनतम 72 घंटे भर्ती होने पर ही पॉलिसी बेनेफिट्स मिलता है.
    पॉलिसी की प्रकृति: कोरोना कवच पॉलिसी इंडेम्निटी आधारित प्लान है यानी कि इसमें अस्पताल के बिल के आधार पर क्लेम का भुगतान होगा. इसके विपरीत कोरोना रक्षक पॉलिसी बेनेफिट प्लान है यानी कि कोरोना पॉजिटिव के इलाज पर एक निश्चित एकमुश्त राशि दे देता है. कोरोना कवच पॉलिसी के तहत दिन का अतिरिक्त डेली हॉस्पिटल कैश कवर मिलता है जो सम एश्योर्ड का 0.5 फीसदी होता है और पॉलिसी के दौरान अधिकतम 15 दिनों के लिए वैलिड है जबकि कोरोना रक्षक पॉलिसी में ऐसा कोई बेनेफिट्स नहीं है.
    (सोर्स: पॉलिसीबाजारडॉटकॉम)

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