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होम लोन महंगा होने पर क्या करें ग्राहक, ईएमआई कम कर टेन्योर बढ़ाने का फैसला क्या सही है?

होम लोन महंगा होने पर क्या करें ग्राहक, ईएमआई कम कर टेन्योर बढ़ाने का फैसला क्या सही है?

रेपो रेट में तीन महीने के भीतर यह तीसरी बढ़ोतरी है.

रेपो रेट में तीन महीने के भीतर यह तीसरी बढ़ोतरी है.

अगर आपने होम लोन लिया है तो बेशक आपकी जेब पर बढ़ी हुई ईएमआई का बोझ पड़ रहा होगा. ऐसे में कई लोग टेन्योर को बढ़ाकर ईएमआई की दर कम करवा लेते हैं. लेकिन क्या ऐसे करने से कर्जदारों को राहत मिलती है या बोझ और बढ़ जाता है?

    नई दिल्ली. आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने के बाद देश के प्रमुख बैंकों ने होम लोन की ब्याज दरें बढ़ानी शुरू कर दी हैं. आरबीआई पिछले 3 महीने में रेपो रेट में 1.4 फीसदी का इजाफा कर चुका है. इससे विभिन्न बैंकों की होम लोन की ब्याज दरें भी 6.5 से बढ़कर 8 फीसदी के पार जा चुकी हैं. बाजार के जानकारों का मानना है कि भारतीय रिजर्व  बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है और रेपो रेट को 6 फ़ीसदी तक ले जा सकता है.

    अगर ऐसा होता है तो होम लोन की ब्याज दरें और बढ़ेंगी. इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर होगा. ऐसे में होम लोन लेने वाले ग्राहकों के सामने बड़ा प्रश्न खड़ा हो गया है कि वे कैसे इस बढ़े हुए खर्च से कैसे निपटें. कई लोग ईएमआई बढ़ने पर टेन्योर बढ़वाकर ईएमआई को कम करवा लेते हैं लेकिन क्या ऐसा करना सही है. आइए देखते हैं.

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    टेन्योर नहीं ईएमआई की राशि ही बढ़ाए
    पैसाबाजार के सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं कि ईएमआई की जगह टेन्योर बढ़ाने से आपको लंबे समय तक ब्याज चुका पड़ेगा जो आपको अधिक महंगा पड़ेगा. एक अन्य इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट प्रांजल भंडारी कहते हैं कि टेन्योर बढ़ाने की बजाय ईएमआई की बढ़ानी चाहिए जिससे वह पूरे टेन्योर में बड़ी बचत कर पाएँगे.

    मौजूदा कर्जदारों के लिए विकल्प
    मौजूदा ग्राहकों कुछ उपायों के जरिए इस समस्या का सामना कर सकते हैं. होम लोन अमूमन 15-20 साल या इससे अधिक की अवधि के होते हैं. इस दौरान आप ब्याज दर में कई उतार-चढ़ाव देखेंगे. क़र्ज़दारों को होम लोन का प्रीपेमेंट करना चाहिए. इससे लोन अवधि घटने से ब्याज में बचत होगी. साथ ही कर्जदार लोन महंगा लगने पर बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प चुन सकते हैं.


    नए ग्राहक क्या करें
    अभी होम लोन लेने वाले लोग हाइब्रिड कर्ज का विकल्प चुन सकते हैं. पहले तीन साल के लिए फिक्स दर वाला लोन लें. बाद में इसे फ्लोटिंग दर में बदल लें. इससे यह होगा कि ब्याज दर में उतार-चढ़ाव कर्ज की अवधि या किस्त को प्रभावित नहीं करेगी. फिक्स्ड रेट में पूरे टेन्योर या जितने साल के लिए आपने प्लान लिया है आपको एक ही ब्याज दर देनी होती है. हालांकि, ये सामान्य ब्याज दर से अधिक होती है.

    Tags: Bank Loan, Business news, Business news in hindi, Home loan EMI, RBI

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