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घर खरीदना या फिर किराए पर रहना है बेहतर! आइए जानें इससे जुड़ी सारी खास बातें

लगभग सभी लोगों के मन में एक संशय हमेशा रहता है कि वो घर किराए पर लें या खरीदें. आइए जानें इस सवाल का जवाब...

लगभग सभी लोगों के मन में एक संशय हमेशा रहता है कि वो घर किराए पर लें या खरीदें. आइए जानें इस सवाल का जवाब...

लगभग सभी लोगों के मन में एक संशय हमेशा रहता है कि वो घर किराए पर लें या खरीदें. आइए जानें इस सवाल का जवाब...

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    लगभग सभी लोगों के मन में एक संशय हमेशा रहता है कि वो घर किराए पर लें या खरीदें. Buy Vs Rent रिपोर्ट 2019, देशभर के 12 शहरों में रियल एस्टेट ट्रेंड को ट्रैक करती है. इसकी मदद से आपको यह समझने में मदद मिलती है कि आप किन जगहों पर घर खरीद सकते हैं और कहां आपके लिए किराए पर रहना ही फायदेमंद है. रिपोर्ट के मुताबिक घर खरीदने के लिए सबसे किफायती शहर:
    इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, कोच्चि, हैदराबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नै, दिल्ली, मुंबई हैं. और इसके साथ ही किराए पर घर लेने के लिए सबसे किफायती शहर: इंदौर, लखनऊ, जयपुर, कोच्चि, अहमदाबाद, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नै, पुणे, बेंगलुरु,दिल्ली, मुंबई हैं. ये नाम लगभग एक ही हैं.

    ऐसे में अब ये सवाल जेहन में भी रहा होगा कि आखिर क्‍या करें- अपना घर लें या फिर किराए पर रहें- आइए जानें...

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    बैंक ब्‍याज दर में बदलाव नहीं होने के फायदे
    बैंकों की ब्‍याज दरों में लगभग दो साल से कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. अगर किसी ने 20 साल के लिए 20 लाख रुपये का लोन ले रखा है तो मासिक ईएमआई पर लगभग 2000 रुपए तक की बचत हो रही है और साल में लगभग 24 हजार रुपए बच जाएंगे.



    अब इस तरह समझें गणित को
    अगर आप दिल्‍ली या नोएडा में 50-60 लाख रुपये का फ्लैट किराये पर लेते हैं तो आपको रेंट के रूप में प्रति महीने औसतन 12-15 हजार रुपये देने होंगे. वहीं अगर आप यही घर खरीदते हैं तो आपको 60 लाख रुपये की कीमत पर 12 लाख रुपये डाउन पेमेंट देने होंगे और बाकी 48 लाख रुपये आप बैंक से ले सकते हैं, जिस पर आपको लगभग 40-43 हजार रुपये के बीच मासिक ईएमआई देनी होगी. इस तरह एक ही फ्लैट के लिए आपको रेंट की तुलना में खरीदने की स्थिति में कई गुना अधिक रकम देनी होगी. ईएमआई पर रेपो रेट बढ़ने या कम होने का भी असर होगा.

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    प्रॉपर्टी के वैल्‍यूएशन में कम इजाफा-हाल के वर्षों के ट्रेंड को देखते हुए कहा जा सकता है कि पहले की तरह अब प्रॉपर्टी के वैल्‍यूएशन में अधिक इजाफा नहीं हो रहा है. पहले 4-5 साल में वैल्‍यूएशन दो गुना हो जाता था, अब 10 साल में दोगुना होने का दावा भी नहीं किया जा सकता है.



    एसआईपी में पैसे डालकर रहें रेंट पर-अगर आप महज 45 हजार रुपये मासिक रूप में 10 साल तक एसआईपी में डालते हैं तो अगले 10 साल में अनुमानित रूप से 12 फीसदी ग्रोथ के साथ यह रकम 1 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है. अगर आपकी प्रॉपर्टी की वैल्‍यू में इस दौरान 2.5 गुना की वृद्धि होती है, तब जाकर ही आप एसआईपी के बराबर पहुंच पाएंगे, जो वर्तमान स्थिति को देखकर संभव नहीं लगता.

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    जॉब की बदल जाती है जगह-आज के युवा जिस तरह की जॉब करते हैं, उसमें जगह की कोई निश्चितता नहीं रहती है. आज कोई दिल्‍ली में तो कल बेंगलुरु, मुंबई या विदेश के किसी शहर में काम कर सकता है. दिल्‍ली जैसा शहर भी इतना बड़ा कि एक कोने से दूसरा कोने तक जाने में काफी समय लग जाता है. जबकि एक जगह फ्लैट ले लेने से उस जगह के प्रति एक तरह का आग्रह डेवलप कर जाता है. इसका बुरा असर करियर की संभावनाओं पर होता है.

    क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट
    रियल एस्‍टेट एक्‍सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने बताया कि वर्तमान परिदृश्‍य में किराये पर रहना फायदेमंद है. उनके अनुसार जिस तरह प्रॉपर्टी कीमतों में अब एप्रिसिएशन नहीं हो रहा है, उससे निवेश के लिहाज से तो यह अच्‍छा नहीं ही रह गया है, बल्कि रेंटल कम होने से किराये पर रहना किफायती हो गया है. ऐसे में अगर कोई एंड यूजर के रूप में फ्लैट लेना चाहता है तो उसे अपनी जिंदगी और जॉब से जुड़ी पूरी संभावनाओं की स्‍टडी कर लेनी चाहिए.

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