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कहां जाकर टिकेगा बाजार? क्या अब पैसे बनेंगे या नहीं?

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कोई जोखिम नहीं है लेकिन शार्ट टर्म निवेशक या ट्रेडर्स को एफआईआई की वजह से प्रॉफिट बुकिंग का मौका लेना चाहिए.

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कोई जोखिम नहीं है लेकिन शार्ट टर्म निवेशक या ट्रेडर्स को एफआईआई की वजह से प्रॉफिट बुकिंग का मौका लेना चाहिए.

नवरात्र, दशहरा और दिवाली करीब है तो क्या बाजार में पैसा बनेगा? विदेशी निवेशकों की खरीदारी की बदौलत क्या अब वो समय आ गया ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

अगर डॉलर मजबूत रहा तो विदेशी खरीदारों के लिए माल खरीदना आसान नहीं होगा.
रिटेल निवेशक इस बात को समझे कि अगर FPI पूरी तरीके से नहीं आए तो कोई मेगा बुल रन नहीं आने वाला है.
अगर RBI अपनी अगली मॉनिटरी पॉलिसी में महंगाई को 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ाता है तो ये शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं होगी.

करीब 8 महीनों के बाद अब जब बाज़ार में रौनक लौटी है तो सवाल उठने लगे हैं कि बाज़ार की ये चाल कहां जाकर थमेगी? क्या त्योहारों के मौसम में निफ्टी और सेंसेक्स नए हाई बनाएंगे? क्या लैपटॉप से ट्रेडिंग करने वाले नोएडा, बैंगलुरू, गुरूग्राम, रांची और भोपाल के नए नवले रिटेल निवेशक फिर से बुल रन के यूफोरिया में झूम उठेंगे?

ज्यादातर लोगों का ध्यान शेयर मार्केट पर तब जाता है जब निफ्टी और सेंसेक्स नए हाई बनाते हैं. लोग कहते हैं कि अरे मौका चूक चला गया. लेकिन जब शेयर बाजार टूटता है तो लोग इसे जुआ बताने में देर नहीं करते. लेकिन अब सवाल ये है कि जब निफ्टी 18 हजार की तरफ बढ़ रहा है तो आपके लिए मौके हैं या फिर आप भी मौका गंवा चुके हैं या इसे यू कहें कि आपके लिए निवेश का एक सुनहरा मौका फिर से इंतजार कर रहा है.

नवरात्र, दशहरा और दिवाली करीब है तो क्या बाजार में पैसा बनेगा? विदेशी निवेशकों की खरीदारी की बदौलत क्या अब वो समय आ गया है जब रिटेल निवेशक यानि आम आदमी अपना पैसा बनाएगा? आज हम इन्हीं सवालों का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे.

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विदेश निवेशकों ने खरीदारी क्यों शुरू की?
सबसे पहले सवाल आता है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी शुरू क्यों की? अक्टूबर 2021 से जून 2022 तक विदेशी निवेशकों ने 30 बिलियन डॉलर के शेयर बेचे थे. लेकिन जुलाई के बाद वे करीब 5 बिलियन डॉलर के शेयर खरीद चुके हैं. एक तरह से कहा जाए कि जुलाई और अगस्त में ये ट्रेंड बदला है.
विदेश निवेशकों ने चीन के शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी 39 फीसदी से घटाकर 36 फीसदी कर दी है. कारण साफ है कि आने वाले समय में भारत की जीडीपी के शानदार आंकडे, क्रूड और बाकी कमोडिटी के नियंत्रित दाम नया आत्मविश्वास पैदा कर रहे हैं. ये वो कारण है जिससे विदेशी निवेशकों को लगता है कि अगर पैसा बनेगा तो वो चीन नहीं भारत में बनेगा. देर हो या सबेर, विदेशी निवेशक भारत जरूर आएंगे.

शेयरों के वैल्युएशन
यूक्रेन युद्ध और ग्लोबल महंगाई के बाद भारत के बाजार भी करेक्शन के दौर से गुजरे हैं. निफ्टी 50 का पीई इस समय विदेशी निवेशकों को बाकी इमरजिंग मार्केट से बेहतर लग रहा है. हालांकि अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों का करेक्शन काफी बड़ा है लेकिन भारत में महंगाई को देखते हुए करेक्शन निवेश के हिसाब से मुफीद लग रहा है.

रिटेल निवेशक क्या करें?
अब सवाल ये है कि भारतीय रिटेल निवेशकों को क्या इस शार्ट बुल रन में हिस्सा लेना चाहिए. जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कोई जोखिम नहीं है लेकिन शार्ट टर्म निवेशक या ट्रेडर्स को एफआईआई की वजह से प्रॉफिट बुकिंग का मौका लेना चाहिए. यही वजह है कि त्योहारों के मौसम में जब निफ्टी और सेंसेक्स नए हाई की तरफ बढ़े तो रिटेल निवेशक अपने घर दिवाली का गिफ्ट बतौर प्रॉफिट के तौर पर लेकर जा सकते हैं.

खेल गड़बड़ होने की संभावना?
बाजार संभावनाओं का खेल है. सवाल ये भी है कि क्या एफआईआई आगे भी इसी तरह खरीदेंगे. अगर डॉलर मजबूत रहा तो विदेशी खरीदारों के लिए माल खरीदना आसान नहीं होगा. इस समय डॉलर इंडेक्स 108 के ऊपर है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 2.99 के आसपास है. इमर्जिंग मार्केट्स के लिए ये दोनों आकंडे आकर्षक नहीं है. डॉलर की मजबूती विदेशी संस्थागत निवेशकों के इरादों पर पानी फेर सकती है.

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यूएस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफतौर पर कहा, ‘देयर विल बी ए पेन इन फ्यूचर’. मतलब साफ है अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई दर के अपने 2 फीसदी लक्ष्य के प्रति जरूरत से ज्यादा गंभीर है. अब इसका खामियाजा अगर निवेशकों को भुगतना पड़े तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है. अमेरिकी फेड इस बात से खुश हो सकता है कि महंगाई दर 9.1 फीसदी से घटकर 8.5 फीसदी तक आई है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि फेड महंगाई को लेकर अपने टारगेट से विचिलित होने वाला है. यानि फेड महंगाई को 2 फीसदी पर लाने के ऐसे बेकरार है जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका को हर हाल में हासिल करना चाहता हो.

भारत की महंगाई दर
अमेरिका या यूरोपीय देशों के अलावा, भारत की महंगाई भी कैश फ्लो को प्रभावित करेगी..हालांकि भारत में महंगाई नियंत्रित नजर आ रही है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि भारत में महंगाई बिल्कुल नहीं है. अर्थशास्त्र की भाषा में कहें तो भारत में ‘नियंत्रित महंगाई’ है. लेकिन अगर आरबीआई अपनी अगली मॉनिटरी पॉलिसी में महंगाई को 50 बेसिस प्वाइंट बढ़ाता है तो ये शेयर बाजार के लिए अच्छी खबर नहीं होगी.

शॉर्ट बुल रन
रिटेल निवेशक इस बात को समझे कि अगर एफआईआई पूरी तरीके से नहीं आए तो कोई मेगा बुल रन नहीं आने वाला है. बुल रन भी ट्रेंड में चलता है. निफ्टी 50 अगर 17759 के लेवल को ब्रेक करता है तो रिटेल निवेशकों के लिए एक शॉर्ट बुल का लुत्फ उठाने का शानदार मौका होगा.

Tags: Money Making Tips, Share market

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