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शेयर बाजार में तेजी हो या गिरावट, निवेशक हमेशा अपनाएं सफलता के ये चार मंत्र

शेयर बाजार में तेजी हो या गिरावट, निवेशक हमेशा अपनाएं सफलता के ये चार मंत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुंबई. कोरोना महामारी शुरू होने से अब तक घरेलू शेयर बाजार का रूख मोटे तौर पर हैरत में डालने वाला रहा है. ऐसे माहौल में निवेशकों को इक्विटी इन्वेस्टमेंट के बुनियादी सिद्धांतों पर भरोसा करना चाहिए, ताकि जोखिम कम किया जा सके.

    मुंबई. कोरोना महामारी शुरू होने से अब तक घरेलू शेयर बाजार का रूख मोटे तौर पर हैरत में डालने वाला रहा है.शुरुआती झटके के बाद बाजार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. महामारी की दूसरी लहर भी इसकी उड़ान नहीं रोक पाई, जबकि देश की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे माहौल में निवेशकों को इक्विटी इन्वेस्टमेंट के बुनियादी सिद्धांतों पर भरोसा करना चाहिए, ताकि जोखिम कम किया जा सके.
    अल्टरनेटिव इक्विटीज, एक्सिस एएमसी के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर त्रिदीप भट्टाचार्या कहते हैं कि कोविड महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में शेयर बाजार की जोरदार तेजी निवेशकों को समझ में नहीं आई है. सेंसेक्स-निफ्टी ऐसे समय निरंतर नई ऊंचाई पर हैं, जब लॉकडाउन के चलते बेहद कमजोर मांग ने कंपनियों की बैलेंस शीट और इकोनॉमी की हालात खराब कर दी है.

    रिकॉर्ड डीमैट खाते खुल रहे 

    इन सबके बीच अप्रैल 2020 से लेकर जनवरी 2021 के बीच नए डीमैट खातों की संख्या 1.07 करोड़ तक पहुंच गई हैं. यह 2020,2019 और 2018 में खोले गए नए खातों से दोगुने से भी अधिक है. शेयर बाजार में उछाल की सबसे बड़ी यही मानी जा रही है.इससे बाजार में तेजी की स्थिरता को लेकर सवाल खड़े होते हैं. ऐसे में निवेशकों को सतर्क होने की जरूरत है.

    1- गुणवत्ता को प्राथमिकता दें 

    हमेशा वैसी कंपनियों में निवेश करें जो उच्च विरासत और गुणवत्ता वाली हों. ऐसी कंपनियां जो सभी क्वांटिटेटिव पैरामिटर्स ( आरओई, लीवरेज रेश्यो, अर्निंग ग्रोथ) के साथ-साथ क्वालिटेटिव पैरा मीटर्स ( मैनेजमेंट पेडिग्री, अकाउंटिंग पॉलिसी, माइनॉरिटी शेयरधारकों के हितों की रक्षा) पर खरी उतरती हैं, निवेश के लिए अच्छी मानी जाती हैं.
    2. कंपनी मैनेजमेंट पर गौर करें 

    किसी कंपनी का मैनेजमेंट जितना मजबूत होगा, उसका बिजनेस भी उतना ही अच्छा होगा. मैनेजमेंट की असाधारण टीम किसी औसत बिजनेस को भी बड़ा बना सकती है. लेकिन, यदि प्रबंधन अच्छा न हो तो तगड़े बिजनेस वाली कंपनी भी विनाशकारी स्थिति में पहुंच सकती है. यहीं वजह है कि निवेश से पहले कंपनी के मैनेजमेंट पर गौर करें.
    3. ग्रोथ और प्राइसिंग पावर का विश्लेषण

    निवेश के लिए कोई शेयर चुनने से पहले आपको उन कंपनी की ग्रोथ और प्राइसिंग पावर का विश्लेषण करना चाहिए. यह थोड़ा मुश्किल एनालिसिस है, जिसका एक तरीका यह पता करना हो सकता है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने की स्थित में कोई कंपनी अपना मुनाफा बरकरार रखते हुए अपनी मौजूदा बाजार हिस्सेदारी बचाने में किस हद तक सक्षम है.
    4. पूंजी की सुरक्षा का ध्यान रखें 
    गणित का एक नियम है, 20 फीसदी गिरावट को रिकवर करने के लिए पूंजी पर सिर्फ 25 फीसदी लाभ जरूरी होगा, जबकि 50 फीसदी गिरावट रिकवर करने के लिए निवेश दोगुना करना होगा. इसलिए बतौर निवेशक बाजार में उतरें तो ध्यान रखें कि मुनाफा चाहे कम हो, पूंजी हमेशा सुरक्षित रहे. ज्यादा रिटर्न के चक्कर में पूंजी पर जोखिम बढ़ाना अच्छी रणनीति नहीं होती.

    Tags: BSE, BSE Sensex, Nifty, Share market

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