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which factors will decide the movement of stock markets amid heavy selling by foreign investors pmgkp

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच कौन से फैक्टर्स इस सप्ताह तय करेंगे शेयर बाजारों की चाल?

रुपये में उतार-चढ़ाव और मानसून की प्रगति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

रुपये में उतार-चढ़ाव और मानसून की प्रगति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

एक्सपर्ट्स ने कहा कि वैश्विक बाजारों में सुधार और जिंस कीमतों में कमी के कारण दो सप्ताह की तेज गिरावट के बाद भारतीय बाजार निचले स्तरों से उबरने में कामयाब रहे. ऐसा लगता है कि ये सुधार आगे जारी रह सकता है और हम इक्विटी बाजारों में आने वाले दिनों में एक अच्छी तेजी की उम्मीद कर सकते हैं.’’

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नई दिल्ली . शेयर बाजारों का रुख इस सप्ताह वैश्विक रुझानों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेश की चाल से प्रभावित होगा. इसके साथ ही विशेषज्ञों ने कहा कि मासिक वायदा सौदों के पूरा होने के चलते भी बाजार को अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि रुपये में उतार-चढ़ाव और मानसून की प्रगति पर भी निवेशकों की नजर रहेगी.

स्वास्तिका इंवेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, ‘‘वैश्विक बाजारों में सुधार और जिंस कीमतों में कमी के कारण दो सप्ताह की तेज गिरावट के बाद भारतीय बाजार निचले स्तरों से उबरने में कामयाब रहे. ऐसा लगता है कि ये सुधार आगे जारी रह सकता है और हम इक्विटी बाजारों में आने वाले दिनों में एक अच्छी तेजी की उम्मीद कर सकते हैं.’’

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क्रूड ऑयल और एफपीआई की बिकवाली अहम
मीणा ने कहा, ‘‘वायदा सौदों के पूरा होने के अलावा ऑटो बिक्री के मासिक आंकड़ों और मानसून की प्रगति भी बाजार के लिहाज से महत्वपूर्ण है.’’ उन्होंने कहा कि कच्चे तेल, रुपये की चाल और एफआईआई का रुख, अन्य महत्वपूर्ण कारक होंगे.

आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने जून में (24 तारीख तक) इक्विटी से 45,841 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की. विदेशी निवेशक अक्टूबर 2021 से भारतीय इक्विटी से लगातार धन निकाल रहे हैं. इस तरह की निकासी आखिरी बार 2020 की पहली तिमाही में देखी गई थी, जब महामारी तेजी से बढ़ रही थी. आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई द्वारा 2022 में अब तक इक्विटी से शुद्ध निकासी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

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मानसून का भी असर रहेगा
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के उपाध्यक्ष (शोध) अजीत मिश्रा ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि जून महीने के वायदा सौदों के पूरा होने के कारण इस सप्ताह भी अस्थिरता अधिक रहेगी.’’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत और मानसून की प्रगति का भी बाजार पर असर होगा. इस सप्ताह बारिश शुरू हो जानी चाहिए औऱ धान की बुआई होने लगेगी. इसलिए मानसून महत्वपूर्ण फैक्टर है.

Tags: Nifty, Share market, Stock Markets, Stocks

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