UPA में ज्यादा बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम या फिर NDA में? जानें कितने सही हैं आंकड़े

तेल सियासत का मुद्दा तो बन गया है, लेकिन आम आदमी के लिए महंगाई की मार भी दे रहा है. एनडीए और यूपीए में तेल के रेट की तुलना को सोशल मीडिया खूब शेयर किया जा रहा है.

Himani Gupta | News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 4:38 PM IST
UPA में ज्यादा बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम या फिर NDA में? जानें कितने सही हैं आंकड़े
तेल सियासत का मुद्दा तो बन गया है, लेकिन आम आदमी के लिए महंगाई की मार भी दे रहा है. एनडीए और यूपीए में तेल के रेट की तुलना को सोशल मीडिया खूब शेयर किया जा रहा है.
Himani Gupta | News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 4:38 PM IST
पेट्रोल और डीजल के दाम में आग लगी हुई है. इस वजह से इस पर राजनीति तेज हो गई है. कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने भारत बंद करवाया है. कांग्रेस जहां पेट्रोल और डीजल के दामों को GST में लाने की मांग कर आम आदमी को राहत देने की बात कर रही है, वहीं सरकार तेल के बढ़ते दामों पर अपने तर्क दे रही है.

तेल सियासत का मुद्दा तो बन गया है, लेकिन आम आदमी के लिए महंगाई की मार भी दे रहा है. एनडीए और यूपीए में तेल के रेट की तुलना को सोशल मीडिया खूब शेयर किया जा रहा है.

सोशल मीडिया में वायरल कुछ आंकड़े में बताया गया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की तुलना में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में पेट्रोल-डीजल के दामों में कम बढ़ोतरी हुई है. इसके आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 16 मई 2014 को दिल्ली में पेट्रोल के दाम 71.41 रुपये थे, जो आज 80.73 रुपये हो गए हैं.

वहीं, डीजल के दाम 16 मई 2014 को को दिल्ली में डीजल के दाम 56.71 रुपये थे, जो आज 72.83 हैं. तब से अब तक पेट्रोल के दाम पर 13 फीसदी का और डीजल के दाम में 28 फीसदी अंतर आया है.




ये जानकारी कितनी सच है इसके बारे में जब हमने बिज़नेस एक्सपर्ट से पूछा, तो मनीकंट्रोल.कॉम के इकॉनमी एडिटर गौरव चौधरी ने बताया कि 2017 से पहले पेट्रोल-डीजल के दाम सरकार तय करती थी, कच्चे तेल और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत को ध्यान में रख कर सरकार उसके ऊपर एक्साइज ड्यूटी लगाती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होता. फिलहाल, पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के मानक पर तय होते हैं.

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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का दावा है कि केंद्र सरकार चाहती तो पेट्रोल के दाम 25 रुपये प्रति लीटर तक कम कर सकती थी, अगर वो क्रूड ऑयल की कीमतों में हुई कमी का लाभ आम आदमी को देना चाहती. बीजेपी समर्थकों ने इस पर पलटवार में कहा कि असल में ये यूपीए सरकार थी, जिसने अपने दस साल के शासन में पेट्रोल की कीमतों से लोगों की जेब में आग लगाई.



कांग्रेस के नेशनल मीडिया कोर्डिनेटर रोहन गुप्ता का कहना है कि जब क्रूड ऑयल 78 डॉलर प्रति बैरल चल रहा है तो पेट्रोल 80 रुपये के पार है. जबकि कांग्रेस सरकार 107 डॉलर प्रति बैरल क्रूड ऑयल खरीदकर इससे काफी सस्ता जनता को मुहैया करवाया. सोशल मीडिया में जो ग्राफिक्स वायरल किया गया है वो बीजेपी का प्रोपोगेंडा है. ऐसे फर्जी आंकड़ों से जनता गुमराह नहीं होने वाली है.

तब से अब तक क्या कितना बदला
बीते 14 साल में क्रूड ऑयल की कीमतें 2004 में सबसे कम थीं, जब यूपीए सत्ता में आया था लेकिन यूपीए 2 के कार्यकाल में ये 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर भी गया. (यहां पूरे साल की औसत कीमत की बात की जा रही है. जब क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर तक भी गई तो भी पेट्रोल की रिटेल कीमत 65.76 रुपये प्रति लीटर ही रही.)



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पेट्रोल का रेट अब लगभग 80 रुपये है, जब क्रूड ऑयल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रही है. ये अब भी क्रूड की औसतन सबसे ज्यादा कीमत 112 डॉलर से 25 फीसदी कम है. क्रूड की सबसे ज्यादा कीमत का कांग्रेस सरकार को 2011-12  में सामना करना पड़ा था. 2015-16 में ये 46 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक नीचे आ गई थी. लेकिन मोदी सरकार ने पेट्रोल की रिटेल कीमतों को समान स्तर पर बनाए रखने का फैसला किया.



इसके लिए पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगातार बढ़ाया जाता रहा. 9.48 रुपये प्रति लीटर से ये बढ़कर जनवरी 2016 में 21.48 रुपये प्रति लीटर के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया. जब क्रूड ऑयल की कीमतों ने फिर बढ़ना शुरू किया, तो उत्पाद शुल्क को 4 अक्टूबर 2017 को दो रुपये प्रति लीटर घटा दिया गया. तब से ये 19.48 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है.

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यूपीए 2 कार्यकाल खत्म होने के बाद बीते चार साल की बात की जाए तो पेट्रोल में उत्पाद शुल्क 126% और डीजल पर 330% बढ़ा है.

 
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