होम /न्यूज /व्यवसाय /दिखने लगें मंदी के आसार तो कहां निवेश करना फायदेमंद, कहां नुकसानदायी? समझें

दिखने लगें मंदी के आसार तो कहां निवेश करना फायदेमंद, कहां नुकसानदायी? समझें

यदि मालूम हो कि मंदी में कहां पैसा डालना सुरक्षित रहेगा तो नुकसान से बचा जा सकता है.

यदि मालूम हो कि मंदी में कहां पैसा डालना सुरक्षित रहेगा तो नुकसान से बचा जा सकता है.

आर्थिक मंदी में बड़े-बड़े निवेशकों को काफी नुकसान हो जाता है, लेकिन यदि मालूम हो कि ऐसी स्थिति में कहां पैसा डालना सुरक ...अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated :

हाइलाइट्स

विशेषज्ञों ने 50 वर्षों के आंकड़ों का विस्तार से अध्ययन किया.
मंदी के शुरू होने से पहले इक्विटी मार्केट ने बहुत अच्छा रिटर्न दिया.
मंदी शुरू होने के बाद फिक्स्ड इनकम ने इक्विटी से कहीं बेहतर रिटर्न दिया.

नई दिल्ली. अमेरिका में संभावित मंदी की खबरों पर हर दिन कोई नया अपडेट आता है. कुछ एक्सपर्ट कहते हैं कि मंदी काफी करीब है, जबकि कुछ का कहना है ये अमेरिका को छूकर निकल जाएगी, लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं होगा. परंतु यदि मंदी आती है तो भारत उससे अप्रभावित नहीं रहेगा. इस बीच बहुत सारे निवेशकों को डर है कि यदि आर्थिक मंदी आई तो क्या होगा? उनके किए गए निवेश का क्या होगा?

अर्थव्यवस्था के पूरे चक्र का एक पहलू आर्थिक मंदी भी है. ऐसा कोई देश नहीं है, जहां मंदी कभी न आए. मंदी की हालत में निवेशकों का पैसा डूबते वक्त नहीं लगता, लेकिन यदि आर्थिक मंदी से निपटने के तरीके आपको मालूम हों तो आप उससे उतने प्रभावित नहीं होंगे, जितना कि दूसरे लोग. आप बल्कि फायदे में रहेंगे, बेशक यह फायदा थोड़ा कम होगा. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देंगे कि मंदी के दौरान किस तरह का निवेश बेहतर होता है और किन चीजों में निवेश करने से बचना चाहिए.

ये भी पढ़ें – प्राइवेट बैंक ने दिया बड़ा ऑफर: सेविंग अकाउंट खुलवाएं और पाएं FD के बराबर ब्‍याज

फिक्स्ड इनकम ने किया कमाल
वाल स्ट्रीट जनरल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार से जुड़े विशेषज्ञों ने अमेरिका के नेशनल ब्यूरो ऑफ इकॉनमिक रिसर्च द्वारा घोषित मंदी के दौरान पिछले 50 वर्षों के आंकड़ों का विस्तार से अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि वर्ष (1973-75, 1980, 1981-82, 1990-91, 2001, 2007-09 और 2020) में जब तक कि मंदी शुरू नहीं हुई थी, तब तक स्टॉक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था ने मंदी में प्रवेश किया उसके बाद फिक्स्ड इनकम (Fixed Income) ने कहीं बेहतर रिटर्न दिया.

शोधकर्ताओं ने यूएस हाई यील्ड बॉन्ड्स, यूएस लॉन्ग टर्म बॉन्ड्स, यूएस शॉर्ट टर्म बॉन्ड्स, यूएस टोटल फिक्स्ड इनकम, यूएस ग्रोथ स्टॉक, यूएस वैल्यू स्टॉक्स, यूएस स्माल-कैप इक्विटी, इंटरनेशनल इक्विटी और यूएस लार्ज-कैप इक्विटी को स्टडी किया.

ये भी पढ़ें – Teacher’s Day Special: लोन से जुड़ी ये 5 शिक्षाएं नहीं फंसने देंगी कर्ज के जाल में, एक्‍सपर्ट बता रहे क्‍या बरतें सावधानी?

मंदी शुरू होने से पहले और बाद में
मंदी शुरू होने से 9 महीने पहले, अमेरिकी ग्रोथ स्टॉक्स ने मासिक तौर पर एवरेज रिटर्न 0.92 फीसदी रिटर्न (11.6 फीसदी कंपाउंड एन्युलाइज्ड रिटर्न) दिया. इसके बाद यूएस स्माल-कैप इक्विटी ने मासिक 0.83% (10.4 फीसदी कंपाउंड एन्युलाइज्ड रिटर्न) दिया. यूएस टोटल फिक्स्ड इनकम ने मासिक तौर पर 0.48% (5.9% एन्युलाइज्ड) रिटर्न दिया.

जब मंदी शुरू हुई तो माहौल बदल गया. इस दौरान यूएस टोटल फिक्स्ड इनकम ने मासिक 0.62% (7.7% एन्युलाइज्ड) रिटर्न दिया, जबकि यूएस ग्रोथ स्टॉक्स ने 0.12% मासिक (1.5% एन्युलाइज्ड) रिटर्न दिया. बाकी सभी इक्विटी क्लास ने नेगेटिव रिटर्न दिया.

क्या है कनक्लूज़न?
यदि इसका सार देखा जाए तो फिक्स्ड इनकम एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट है, जो आर्थिक मंदी में भी निवेशकों को निराश नहीं करता, जबकि इक्विटी में नुकसान भी होता है. उपरोक्त उदाहरण अमेरिकी मंदी के हैं, लेकिन पूरी दुनिया में जब भी मंदी आती है तो ये रूल जरूर काम करते हैं. यही वजह है कि वित्त विशेषज्ञ हमेशा सारा पैसा इक्विटी में न डालने के बजाय डेट् एसेट्स (Debt Assest) में भी निवेश करने की सलाह देते हैं. चूंकि कुछ पैसा डेट में निवेश रहता है तो आर्थिक मंदी के हालात में बैलेंस बना रहता है. मतलब यदि निवेशक को ज्यादा फायदा नहीं होता तो नुकसान होने के चांस भी कम हो जाते हैं.

Tags: Investment, Investment tips, Money Making Tips, Recession

टॉप स्टोरीज
अधिक पढ़ें