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जिस प्याज को किसान ने 15 रुपये किलो बेचा, जानिए कैसे बाजार में उसका दाम 100 रुपये पहुंचा

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 3:40 PM IST
जिस प्याज को किसान ने 15 रुपये किलो बेचा, जानिए कैसे बाजार में उसका दाम 100 रुपये पहुंचा
किसान से ज्यादा पैसा बिचौलिए कमाते हैं.

राष्ट्रीय किसान संघ के फाउंडर मेंबर बीके आनंद कहते हैं किसानों (farmers) को सब्जियों का जो पैसा मिलता है और वो उपभोक्ताओं को जितने में मिलती हैं उसमें पांच से आठ गुना का अंतर होता है. किसान से ज्यादा पैसा बिचौलिए कमाते हैं.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 3:40 PM IST
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नई दिल्ली. प्याज (Onion), टमाटर (Tomato) समेत हरी सब्जियों के आसमान छूते दामों ने देश में महंगाई बढ़ा दी है. खुदरा कीमतें इतनी ऊंची हैं कि रसोई का बजट बिगड़ गया है. प्याज और टमाटर की कीमतों को नियंत्रण में रखने की सरकार (Government of India) की कोशिशों के बावजूद देश के प्रमुख शहरों में लोगों को प्याज 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक के भाव पर मिल रहा है. वहीं, टमाटर 60-80 रुपये किलो के भाव पर बिक रहा है. साथ ही, आलू का दाम 20 रुपये/किग्रा से कम होने का नाम नहीं ले रहा. अब सवाल ये उठता है कि क्या महंगी सब्जी से किसान को भी इतना ही फायदा मिल रहा है?

किसान से ज्यादा पैसा बिचौलिए कमाते हैं-राष्ट्रीय किसान संघ के फाउंडर मेंबर बीके आनंद कहते हैं किसानों (farmers) को सब्जियों का जो पैसा मिलता है और वो उपभोक्ताओं को जितने में मिलती हैं उसमें पांच से आठ गुने का अंतर होता है.

किसान से ज्यादा पैसा बिचौलिए कमाते हैं. कोई भी सरकार इन पर रोक नहीं लगा पाई है. टमाटर, प्याज,  आलू (Tomato, Onion, Potato) का इसमें बड़ा योगदान है.

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कौन खा रहा किसानों की मेहनत


आखिर कैसे इनका दाम बढ़ता है. इसे आनंद ने न्यूज18 हिंदी को विस्तार से बताया...
प्याज: देश में सबसे ज्यादा प्याज का उत्पादन महाराष्ट्र में होता है. यह ऐसी फसल है जिसकी जमकर जमाखोरी होती है. प्याज के व्यापारी किसानों से अधिकतम 12 से 15 रुपये किलो की दर पर पूरे खेत का सौदा कर लेते हैं.

वो कई बार किसान को ही रखरखाव की भी जिम्मेदारी दे देते हैं. इसके बाद नासिक से लेकर दिल्ली तक छोटे-छोटे शहरों में इसकी जमाखोरी करके दाम बढ़वा देते हैं. बहुत अच्छी प्याज भी किसान ने 15 रुपये किलो बेचा है और उपभोक्ता 100 रुपये के हिसाब से खरीद रहा है. बैतूल और होशंगाबाद में जमकर जमाखोरी होती है.
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टमाटर: इसकी पैदावार कपूरथला, तरनतारन, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, सतारा और महाबलेश्वर में ज्यादा है. किसान 8 से 10 रुपये किलो की दर पर बेच रहा है और हमें आठ से गुना दाम बढ़ाकर 80 रुपये किलो तक में मिल रहा है. इसका भी दाम किसान नहीं बढ़ा रहा.

आलू: इसी साल जनवरी में आगरा के बरौली अहीर निवासी किसान प्रदीप शर्मा को 19000 किलो (19 टन) आलू बेचने के बाद सिर्फ 490 रुपये का फायदा हुआ था. शर्मा ने गुस्से में यह पैसा मनी ऑर्डर के जरिए सरकार को भेज दिया. दूसरी ओर आज भी खुदरा मार्केट में आलू 20 से 25 रुपये किलो बिक रहा है.

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सब्जियों की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंची!


गोभी: आनंद ने बताया कि किसान को इस समय गोभी कहीं पांच तो कहीं 8 रुपये किलो के हिसाब से बेचनी पड़ रही है. जबकि खुदरा मार्केट में इसका दाम 30 रुपये किलो तक है. कोई यह सोच रहा है कि महंगाई के लिए किसान जिम्मेदार है तो यह गलत है.

बैंगन: मध्य प्रदेश, बिहार और यूपी में बैंगन खूब होता है. किसान को थोक में इसका दाम पांच-छह रुपये किलो के हिसाब से मिल रहा है. जबकि मार्केट में यह 40 रुपये किलो तक बिक रहा है.

भारतीय कृषक समाज के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष कृष्‍णवीर चौधरी कहते हैं कि किसान को किसी फसल का अधिक से अधिक जितना दाम मिलता है, उसके कम से कम तीन गुना दाम पर उपभोक्ता तक वो चीज पहुंचती है. इसकी वजह जमाखोर हैं. किसान को फसल तैयार होते ही बेचने पड़ जाती है. क्योंकि जिस कर्ज को लेकर उसने फसल उगाई होती है उसे वापस देने की चिंता रहती है. इसलिए मांग और आपूर्ति में अंतर का असली फायदा स्टॉकिस्ट उठाते हैं.



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First published: November 14, 2019, 2:35 PM IST
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