थोक महंगाई से मिली राहत, जुलाई में WPI 25 महीने के निचले स्तर पर

जुलाई में थोक महंगाई के मोर्चे पर राहत मिली है. जुलाई में थोक महंगाई 1.08% पर रही है जो जून में 2.02% पर थी.

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 12:48 PM IST
थोक महंगाई से मिली राहत, जुलाई में WPI 25 महीने के निचले स्तर पर
राहत! जुलाई में थोक महंगाई 25 महीने के निचले स्तर पर
News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 12:48 PM IST
जुलाई में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) के मोर्चे पर राहत मिली है. जुलाई में थोक महंगाई  (Wholesale Inflation)1.08% पर रही है जो जून में 2.02% पर थी. जुलाई में थोक महंगाई दर पिछले 25 महीने के निचले स्तरों पर रही है. थोक महंगाई दर में गिरावट की प्रमुख वजह खाने-पीने की चीजों, ईंधन और बिजली की दरें कम होना है. इसे देखते हुए रिजर्व बैंक (RBI) मौजूदा वित्त वर्ष की बाकी अवधि में प्रमुख ब्याज दरें और घटा सकता है.

आंकड़ों पर एक नज़र-

>> महीने दर महीने आधार पर जुलाई में खाने-पीने चीजों की थोक महंगाई दर 5.04% से घटकर 4.54% रही है. वहीं प्राइमरी आर्टिकल्स की थोक महंगाई मई के 6.72% से घटकर 5.03% पर पहुंच गई है.
> जुलाई में ईंधन-बिजली की थोक मंहगाई दर में कमी आई है ये जून के -2.20 फीसदी से घटकर -3.64 फीसदी पर आ गई है. वहीं महीने दर महीने आधार पर जुलाई में मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट्स की थोक मंहगाई दर 0.94 फीसदी से घटकर 0.34 फीसदी रही है.




>> महीने दर महीने आधार पर जुलाई में सब्जियों की थोक मंहगाई 24.76 फीसदी से घटकर 10.67 फीसदी पर रही है. वहीं अंडा, मांस और मछली की थोक मंहगाई पिछले महीने के 5.64 फीसदी से फिसलकर 3.16 फीसदी हो गई है.
> महीने दर महीने आधार पर जुलाई में दालों की महंगाई में भी गिरावट दर्ज की गई है. जुलाई में थोक मंहगाई जून के 23.06 फीसदी से घटकर 20.08 फीसदी पर आ गई है. इसी तरह प्याज की मंहगाई दर भी जून के 16.63 फीसदी से घटकर 7.63 फीसदी रही है. हालांकि जुलाई में आलू का थोक महंगाई बढ़ी है जो जून के -23.36 फीसदी से बढ़कर -24.27 फीसदी हो गई. ये भी पढ़ें: भारतीय इकॉनमी को डूबने से बचाने के लिए मोदी सरकार बना रही है ये प्लान, जल्द कर सकती है ऐलान

Loading...



जुलाई थोक महंगाई 25 महीने के निचले स्तर पर
जुलाई में थोक महंगाई दर 25 महीने के निचले स्तर पर आ गई है. पिछले साल जुलाई में WPI 5.27 फीसदी पर थी, जो अब घटकर 1.08 फीसदी हो गई है.



क्या होती है WPI महंगाई दर
भारत में आर्थिक नीतियों को तय करने में थोक मूल्य सूचकांक का बड़ा महत्व होता है. थोक बाजार में वस्तुओं के समूह की कीमतों में सालाना तौर पर कितनी बढ़ोत्तरी हुई है इसका आकलन महंगाई के थोक मूल्य सूचकांक के जरिए किया जाता है. भारत में इसकी गणना तीन तरह की महंगाई दर, प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई में बढ़त के आधार पर की जाती है. भारत में वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के हिसाब से ही की जाती रही है.

महंगाई दर का अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या होता है असर
महंगाई दर का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर दो तरह से होता है. अगर महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है. वहीं अगर महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है. महंगाई के बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है. आरबीआई भी ब्याज दरों में बदलाव के लिए महंगाई के आधार पर फैसला लेता है.

ये भी पढ़ें: रक्षाबंधन पर बहन को दें ये गिफ्ट, समय के साथ बढ़ती जाएगी कीमत
First published: August 14, 2019, 12:42 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...