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एक रुपये किलो से भी कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं किसान, इस तरह सरकार कैसे डबल कर पाएगी इनकम?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 2:07 PM IST
एक रुपये किलो से भी कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं किसान, इस तरह सरकार कैसे डबल कर पाएगी इनकम?
प्याज का थोक रेट 59 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है

देश की कई मंडियों में 59 पैसे लेकर 3.5 रुपये तक बिका प्याज (Onion Price), कौन करेगा नुकसान की भरपाई. किसानों की इस दुर्दशा के लिए कौन है जिम्मदार, कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक 9 रुपये किलो आती है लागत

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नई दिल्ली. जब आप दिल्ली में 20 रुपये किलो प्याज खरीद रहे थे तब तेलंगाना की सदाशिवपेट मंडी में कुछ किसान 59 पैसे प्रति किलो के रेट पर (Onion rate) प्याज बेचने को विवश थे. देश की कई मंडियों में पिछले 10 दिन में 59 पैसे से लेकर 3.5 रुपये किलो तक के न्यूनतम रेट पर उत्पादकों को प्याज बेचनी पड़ी है. यह सच सरकारी वेबसाइटों पर दर्ज है. जबकि प्याज की उपज से लेकर उसे मंडी तक पहुंचाने में किसान को कम से कम 8-9 रुपये प्रति किलो की लागत आती है. सवाल ये है कि इस तरह दाम मिला तो सरकार 2022 तक देश के किसानों की इनकम कैसे डबल कर पाएगी.

आप किसानों (farmers) की खुशहाली वाले सरकारी आंकड़ों में बिजी रहिए लेकिन महाराष्ट्र से लेकर तेलंगाना तक के प्याज किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही है. सरकार के रवैये से किसान मायूस हैं. लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि आखिर वे कौन लोग हैं जो किसानों की मेहनत पर साल भर तक मौज करते हैं. औने-पौने दाम पर प्याज खरीदकर उससे मोटा मुनाफा कौन कमाता है? क्या सरकार उनके बारे में नहीं जानती?

पिछले कुछ वर्षों में शायद ही कभी आपकी जिंदगी में ऐसा वक्त आया हो जब प्याज आपको 1-2 रुपये किलो मिली हो. लेकिन, किसान को ऐसा ही दाम मिलता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज की एक बड़ी संगठित लॉबी है जिसका हर साल किसान बहुत आसान शिकार होते हैं.



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इतने कम दाम पर प्याज बेचने को क्योंं मजबूर हैं किसान?




सरकारी वेबसाइट बता रही प्याज का सच

-तेलंगाना की सदाशिवपेट मंडी में 19 मई को प्याज का न्यूनतम रेट 59 पैसे प्रति किलो था.

-महाराष्ट्र की लोणंद मंडी में 19 मई को इसका न्यूनतम रेट 1 रुपये और अधिकतम 6.51 पैसे किलो था.

-महाराष्ट्र की धुले मंडी में 5 मई को लाल प्याज का न्यूनतम दाम 150 रुपये क्विंटल था.

-महाराष्ट्र की धुले मंडी में ही 9 और 13 मई को प्याज 100 रुपये प्रति क्विंटल यानी 1 रुपये किलो बिका.

-महाराष्ट्र की नासिक मंडी में 12 मई को प्याज का न्यूनतम दाम 350 और 14 मई को 351 रुपये प्रति क्विंटल था.

(ये दाम राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) व एग्रीकल्चर मार्केटिंग से लिए गए हैं)

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किसानों के आंसू निकाल रहा प्याज का इतना कम दाम


कौन लोग हैं किसानों की दुर्दशा के जिम्मेदार?

अगर किसानों को इतने कम दाम पर भी प्याज बेचने के बावजूद आपको 20 रुपये किलो खरीदना पड़ रहा है तो यकीन मानिए कोई है जो 19 रुपये किलो का मुनाफा खा रहा है. ये कौन लोग हैं और इन्हें व्यवस्था का कैसा संरक्षण हासिल है जो इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती.

अगर शहर में आपको कोई कृषि उत्पाद (agricultural commodities) महंगा मिल रहा है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि किसान कमाई कर रहा है. बल्कि इसका मतलब यह है कि सप्लाई चेन की गड़बड़ियों की वजह से बिचौलिया बेहिसाब मुनाफा कमा रहा है. कुछ माह पहले जब मार्केट में प्याज 120 रुपये किलो बिक रही थी तब भी किसान को इसका फायदा नहीं मिला और अब जब आपको यह 20 रुपये किलो में मिल रही है तो भी किसान परेशान है.

देश के 62 किसान संगठनों की संस्था राष्ट्रीय किसान महासंघ (Rashtriya Kisan Mahasangh) के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने हमें इसकी वजह बताई.

-गन्ने की तरह प्याज किसानों की लॉबी न होना. इसके किसान सरकार पर दबाव नहीं बना पाते.

-स्टोरेज की कमी. जहां आलू और प्याज का उत्पादन होता है वहां स्टोर नहीं हैं. स्टोर मंडियों के पास हैं, जिसका फायदा किसान नहीं व्यापारी लेते हैं.

-प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न होना. एमएसपी में हो ऐसी नौबत नहीं आएगी.

-जब सरकार प्याज इंपोर्ट करती है तब किसान को लगता है कि देश में इसकी भारी कमी है.

-किसान को प्याज की मांग और बुआई की जानकारी न मिलना. इसके लिए हम लोग सभी फसलों का डैशबोर्ड बनाने की लगातार मांग कर रहे हैं.

-बिचौलियों और जमाखोरों पर कार्रवाई न होना भी किसान की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है. सबको पता है कि जमाखोरी (Hoarding) कौन करता है. लेकिन सरकारें ऐसे लोगों को पकड़ने की राजनीतिक इच्छा शक्ति नहीं दिखातीं.

ई-नाम किसान नहीं ट्रेडर्स की सहूलियत के लिए है: शर्मा

कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-Nam) के बावजूद अगर किसान 59 पैसे से तीन-चार रुपये किलो तक में प्याज बेचने पर विवश है तो इस प्लेटफार्म और ऐसे सुधार की तारीफ करने का हक किसी को नहीं है. इसका मतलब ये है कि सरकार ने ई-नाम को ट्रेडर्स के फायदे के लिए बनाया है न कि किसानों के लिए.

एक एश्योर्ड दाम हो ताकि किसान को न हो घाटा

शर्मा कहते हैं कि सरकार अगर किसानों का हित चाहती है तो उसे यह आदेश जारी करना चाहिए कि किसी भी कृषि उत्पाद की ई-नाम पर ट्रेडिंग एमएसपी से कम पर नहीं होगी. जो फसलें एमएसपी में नहीं हैं उनकी लागत का अनुमान लगाकर उसका न्यूनतम दाम मुनाफे के साथ तय किया जाना चाहिए. यह सुनिश्चित किया जाए कि उससे कम रेट पर ट्रेडिंग न हो. हर चीज की एक एश्योर्ड प्राइस तय होनी चाहिए. अगर कोई किसान 1 रुपये किलो में ई-नाम पर प्याज बेच रहा है तो उसे सरकार भावांतर जैसी किसी योजना के जरिए 8 रुपये की भरपाई करे, ताकि किसान को कम से कम लागत तो मिल जाए.

भारत में प्याज उत्पादन

भारत में प्याज का कुल उत्पादन 2 करोड़ 25 लाख से 2 करोड़ 50 लाख मीट्रिक टन सालाना के बीच है. देश में हर साल कम से कम 1.5 करोड़ मीट्रिक टन प्याज बेची जाती है. करीब 10 से 20 लाख मीट्रिक टन प्याज स्टोरेज  के दौरान खराब हो जाती है. 2019 में तो 32 हजार मिट्रिक टन प्याज सड़ गई थी. औसतन 35 लाख मीट्रिक टन प्याज एक्सपोर्ट की जाती है.

नेशनल हर्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (NHRDF) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018-19 में 2 करोड़, 28 लाख, 19 हजार मीट्रिक टन प्याज पैदा हुई. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, गुजरात और राजस्थान इसके बड़े उत्पादक प्रदेश हैं.

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औसतन 9 रुपये किलो आती है प्याज पर लागत


किसानों की आय दोगुनी करने वाली कमेटी के सदस्य ने कहा

किसानों की इस समस्या को लेकर जब हमने डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी (DFI-doubling farmers income) के सदस्य विजय पाल तोमर से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि प्याज का इतना कम दाम मिलना चिंता का विषय है. तोमर बीजेपी के राज्यसभा सदस्य भी हैं. उन्होंने कहा, इतना कम दाम मिलने की मुख्य वजह स्टोरेज की कमी और इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य न होना है.

सरकार का प्लान करीब 2 लाख पंचायातों में भंडार गृह बनाने का है. इसीलिए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपये और टमाटर, प्याज और आलू (TOP) के लिए 10 करोड़ रुपये का अलग से प्लान किया है. हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि किसान की हर फसल का एक ऐसा तार्किक दाम तय होना चाहिए ताकि उसे ऐसा घाटा न हो कि प्याज 59 पैसा किलो बेचना पड़े.

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First published: May 22, 2020, 12:44 PM IST
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