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कर्मचारी नहीं बल्कि इन 10 सरकारी कंपनियों की वजह से BSNL के डूबे 2.65 लाख करोड़!

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 4:49 PM IST
कर्मचारी नहीं बल्कि इन 10 सरकारी कंपनियों की वजह से BSNL के डूबे 2.65 लाख करोड़!
बीएसएनएल सरकारी दूरसंचार कंपनी है.

लोकसभा में दूरसंचार मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार गेल इंडिया लिमिटेड बीएसएनएल से आई-2 नाम की सेवा ले रही थी. लेकिन 2001-02 से 2018-19 तक धीरे-धीरे बीएसएनएल की सर्विसेज के बदले भुगतान में कमी आने लगी. इस तरह से गेल पर बीएसएनएल की लेनदारी एक लाख, 72 हजार, 655 करोड़ रुपये हो गई.

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  • Last Updated: February 6, 2020, 4:49 PM IST
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नई दिल्ली. भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की मौजूदा हालत कोई एक-दो दिन की देन नहीं है. बीएसएनएल की सेवाएं लेने वाली दूसरी सरकारी कंपनियों (Government companies) ने ही उसे धीरे-धीरे इस हाल में पहुंचाया है. आज भी उन सरकारी कंपनियों पर बीएसएनएल की हजारों करोड़ रुपये की लेनदारी है. अफसोस की बात तो यह है कि बीएसएनएल को यह हजारों करोड़ रुपये उस वक्त भी नहीं मिले जब उसके पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसा नहीं था. अब जब बीएसएनएल और एमटीएनएल (MTNL) के करीब 90 हजार कर्मचारी वीआरएस (VRS) लेकर जा चुके हैं, तब भी बीएसएनएल को उम्मीद है कि उसे लेनदारी के हजारों करोड़ रुपये मिल जाएं तो कुछ राहत मिले.

बीएसएनएल की सबसे बड़ी देनदार है गेल (GAIL)- 18 साल से किसी कंपनी को उसका ग्राहक सेवाओं के बदले में उसका भुगतान न करे या फिर आधा-अधूरा भुगतान करे तो धीरे-धीरे वो रकम कितनी हो जाएगी. शायद हमारे-आपके सोचने से कहीं ज्यादा. बीएसएनएल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. लोकसभा में दूरसंचार मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार गेल इंडिया लिमिटेड बीएसएनएल से आई-2 नाम की सेवा ले रही थी.



लेकिन 2001-02 से 2018-19 तक धीरे-धीरे बीएसएनएल के भुगतान में कमी होने लगी या फिर रुकने लगा. और इस तरह से गेल पर बीएसएनएल की लेनदारी एक लाख, 72 हजार, 655 करोड़ रुपये हो गई. इस तरह की 9 और कंपनियां हैं जिन पर बीएसएनएल के हजारों करोड़ रुपये बाकी हैं.

हालांकि बीएसएनएल के बकाया का यह मामला कोर्ट में भी गया था. वहीं इस बकाया के बारे में गेल सहित दूसरी कंपनियों ने कहा है कि उन पर कोई बकाया नहीं निकल रहा है और अब उन पर कोई देनदारी नहीं बनती है.

बीएसएनएल को इस काम के लिए जरूरत थी चंद हजार करोड़ की
जब खुद बीएसएनएल को दूसरी कंपनियों से हजारों करोड़ रुपये लेने थे, तो ऐसे में अपने को जिंदा रखने के लिए चंद करोड़ रुपये की जरूरत थी. यह रुपये बीएसएनएल को कुछ इस तरह से खर्च करने थे, 4G स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए, स्पेक्ट्रम एलोकेशन पर जीएसटी के लिए, सॉवरेन गारंटी के लिए.सॉवरेन बॉन्ड कंपनी पर कर्ज को रिस्ट्रक्चर करने के लिए जारी किए जाते हैं. वहीं वीआरएस और रिटायरमेंट लायबिलिटी के लिए भी बीएसएनएल को रुपये की जरूरत थी. लेकिन ऐन वक्त पर भी बीएसएनएल अपने ग्राहकों से इसके लिए रकम नहीं जुटा पाया.

बीएसएनएल का ब्रॉडबैंड मार्केट में है दबदबा
बीएसएनएल सरकारी दूरसंचार कंपनी है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. यह भारत की सबसे बड़ी फिक्स्ड फोन सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी है. इसके अलावा ब्रॉडबैंड मार्केट में भी बीएसएनएल का दबदबा है. ब्रॉडबैंड मार्केट में बीएसएनएल का कुल मार्केट शेयर करीब 60 फीसदी है.

यह भारत की पांचवीं सबसे बड़ी मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी है. फरवरी 2018 में बीएसएनएल का भारत में मार्केट शेयर 9.24 फीसदी था.

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बीएसएनएल को विशाल नेटवर्क के लिए जाना जाता है. मुंबई-दिल्ली को छोड़कर देश के हर दुर्गम और अलग-थलग पड़े इलाकों में भी बीएसएनएल का नेटवर्क मिल जाता है, फिर वो चाहे सियाचिन ग्लेशियर हो या उत्तर पूर्व के राज्य.

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First published: February 6, 2020, 4:44 PM IST
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