क्रिप्टो की बजाय डिजिटल गोल्ड निवेश के लिए क्यों हैं अच्छा विकल्प, जानें सबकुछ

क्रिप्टोकरेंसी त्वरित और ज्यादा तेजी से रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इसमें उतनी ही तेजी से गिरावट भी हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

डिजिटल स्विस गोल्ड (Digital Swiss Gold ) के सीईओ असरफ रिजवी (Ashraf Rizvi)से जानिए क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल गोल्ड में से कौन निवेश के लिए लिहाज से ज्यादा मुफीद

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नई दिल्ली. सोना (Gold) सदियों से भारतीयों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है. अब इसका एक और रूप डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) प्रचलन में आ गया है. इसमें निवेश करना बेहद आसान है. हालांकि, कुछ वक्त से क्रिप्टाेकरेंसी (Cryptocurrencies) तेजी से निवेश के लिए पहली पसंद बन रही है. आज हम दोनों ही निवेश विकल्पों के बीच अंतर और कौन सा बेहतर है, इसके बारे में जानेंगे.
न्यूज18 के पाठकों के लिए डिजिटल स्विस गोल्ड (Digital Swiss Gold & Gilded) के फाउंडर और सीईओ असरफ रिजवी (Ashraf Rizvi) ने इन दोनों के बारे में विस्तार से बताया. उनके मुताबिक, क्रिप्टोकरेंसी त्वरित और ज्यादा तेजी से रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इसमें उतनी ही तेजी से गिरावट भी हो सकती है. बहुत कम वक्त में गिरावट 50% तक हो सकती है. जबकि, सोने में निवेश की गई राशि लगभग 100% तक सुरक्षित रहती है और समय के साथ क्रमिक रूप से रिटर्न मिलता है. इसलिए, क्रिप्टो की तुलना किसी भी तरह से सोना से नहीं की जानी चाहिए और न ही इसे लेकर कोई भ्रम पालना चाहिए. सवाल-जवाब में समझिए क्रिप्टो और सोने में अंतर...
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[q]निवेश पोर्टफोलियो में गोल्ड की भूमिका क्रिप्टो से कैसे अलग है?[/q]
[ans] हालांकि, सोना और क्रिप्टो के बीच सीधी तुलना करना मुश्किल है. क्रिप्टो ने हाल ही में उच्च रिटर्न के साथ-साथ निवेशकों को नुकसान भी दिया है. इसलिए यह सोना जैसी स्थिर संपत्ति की तुलना में अत्यधिक अस्थिर विकल्प है. कुल निवेश का 5-20% हिस्सा सोना आधारित परिसंपत्तियों में निवेश करना चाहिए. हालांकि, यह किसी व्यक्ति की जोखिम, निवेश के उद्देश्यों, आयु, वित्तीय साधनों और अन्य निवेश अवसरों तक पहुंच की क्षमता के आधार पर तय किया जाना चाहिए.[/ans]
[q]फिर क्रिप्टो को लोग इतनी तरजीह क्या दे रहे हैं?[/q]
[ans] क्रिप्टो त्वरित और ज्यादा तेजी से रिटर्न दे सकते हैं, वहीं इसमें उतनी ही तेजी से गिरावट भी हो सकती है, जो कम समय में 50% तक हो सकती है और ऐसे में सोना बचाव के रूप में कार्य करना जारी रखेगा जो आपकी तरफ से निवेश की गई राशि को लगभग 100% तक सुरक्षित रखेगा और समय के साथ क्रमिक रूप से रिटर्न भी देगा, जैसा कि हजारों सालों से होता आया है. क्रिप्टो की तुलना किसी भी तरह से सोना से नहीं की जानी चाहिए और न ही इसे लेकर कोई भ्रम पालना चाहिए.[/ans]
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[q]डिजिटल गोल्ड किन कारणों से निवेश के एसजीबी, क्रिप्टो, आदि जैसे अन्य विकल्पों से अलग है?[/q]
[ans]डिजिटल गोल्ड (Digital Gold), ईटीएफ (ETF), एसजीबी (SGB), गोल्ड फंड (Gold Funds) और भौतिक सोना (Physical Gold)के समान सोना प्राप्त करने का एक और तरीका है. अगर हम वास्तविक सोना के मुकाबले एक व्यावहारिक निवेश के विकल्प के रूप में एसजीबी के बारे में बात करें तो इसकी एक सीमा है. डिजिटल गोल्ड को फोन के जरिए या किसी आसान ऐप की मदद से खरीदा, रखा और बेचा जा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि एसजीबी (सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, Sovereign Gold Bond) वास्तविक भौतिक गोल्ड से बिल्कुल भी जुड़ा हुआ नहीं है. आपको एसजीबी के साथ गोल्ड प्राप्त करने का अधिकार नहीं है. इसके अलावा उसमें तरलता की कमी है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इसे बेचने से पहले आपको इसमें कम से कम 5 साल तक निवेश को प्रतिधारित करना होगा.[/ans]
[q]डिजिटल गोल्ड और क्रिप्टो की कीमतें कैसे काम करती हैं?[/q]
[ans]गोल्ड की कीमतें आपूर्ति, मांग और निवेशकों के व्यवहार जैसे कई कारकों से निर्धारित होती हैं, जो मूल रूप से बाजार सहभागियों के बीच एक निश्चित कीमत पर सोना खरीदने और बेचने का समझौता है. हालांकि मांग से इतर सोने की कीमतें आम तौर पर हमेशा ऊँची रहती हैं. इसकी वजह यह है कि इसे खदानों से निकाला जाता है और फिर उसे इस्तेमाल करने योग्य बनाया जाता है. जरूरत के मुताबिक इसका निर्माण नहीं किया जा सकता है. जहां तक ​​क्रिप्टो का संबंध है तो इसकी कीमतें मुख्य रूप से निवेशकों की माँग, इसकी माइनिंग से जुड़ी लागतों, अन्य प्रतिस्पर्धी क्रिप्टो सिक्कों आदि से निर्धारित की जाती हैं. चूंकि अधिकांश बिटकॉइन पहले से ही निकाले जा चुके हैं, इसलिए इसकी कीमतें अत्यधिक अस्थिर है.[/ans]
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[q]क्रिप्टो से डिजिटल गोल्ड कैसे बेहतर है?[/q]
[ans]क्रिप्टो को दुनिया भर में व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता है, जबकि सोना दुनिया भर में स्वीकार्य है. कई देशों में क्रिप्टो का रखना अवैध माना जा सकता है. हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय अभी भी सरकार के पास है. जबकि, सोना सुरक्षित है और यह समय की अंतिम परीक्षा को पार करने में सफल रहा है. दुनिया भर में अरबों लोगों और यहां तक ​​कि लगभग सभी सरकारों के पास यह मौजूद है. क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी अनिश्चितता को देखते हुए सरकारी नियामकों, विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) और कई अन्य लोगों ने यहां तक ​​​​कहा है कि विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी की सट्टाबाजारी और अस्थिर प्रकृति के कारण यह निश्चित रूप से सोना का कभी विकल्प नहीं बन सकता है.[/ans]
[q]डिजिटल गोल्ड फिजिकल गोल्ड से कैसे अलग है?[/q]
[ans]डिजिटल गोल्ड पूरी तरह से आवंटित किया जाता है और यह प्रतिनिधित्व सूचक नहीं है बल्कि यह वास्तविक व भौतिक रूप में सोना है. इसके अलावा, डिजिटल गोल्ड में तरलता को लेकर कोई बंदिश नहीं है. कोई निवेशक इसे कभी भी अपने विवेक के मुताबिक बेच सकता है और इस दौरान उसे लेन-देन के तौर पर भारी लागत का भी भुगतान नहीं करना होता है. डिजिटल सोना अधिक लोगों के लिए सुलभ है. कोई भी इसे अपनी निवेश क्षमता के अनुसार खरीद सकता है. घर बैठे अपनी सुविधा के मुताबिक अपने मोबाइल फोन पर एक साधारण ऐप के जरिए कुछ सौ रुपये में और हजारों या लाखों में इसे खऱीदा जा सकता है.[/ans]
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[q]सोने के निरंतर प्रदर्शन के क्या कारण हैं?[/q]
[ans]वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच पीली धातु को सर्वाधिक विश्वास और भरोसा हासिल है. इसकी कीमत का एक हिस्सा शायद इस आकर्षण के कारण है कि एक वस्तु के रूप में सोना हमेशा लोगों के मन में रहता है. इसके अलावा, मांग केवल बढ़ रही है और आपूर्ति कम हो रही है. लिहाजा, यह धातु भारी खनन और प्रसंस्करण के बाद प्रकृति से प्राप्त होती है, और तथ्य यह है कि यह धातु अपेक्षाकृत दुर्लभ है और इस वजह से इसकी कीमत लंबे समय तक अत्यधिक स्थिर रहती है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि गोल्ड का मूल्य वैश्विक स्तर पर डॉलर और अन्य सभी मुद्राओं के मूल्य की विपरीत दिशा में चलता है, जिसका सरकारी कर्ज के बोझ और मुद्रास्फीति की मौद्रिक नीतियों के कारण अवमूल्यन जारी रहता है. गोल्ड के साथ विचित्र स्थिति यह है कि इसकी खरीद क्रय शक्ति में इजाफे की वजह से होती है और इसे सरकार की तरफ से देनदारी के तौर पर नियंत्रित नहीं किया जा सकता है. इस वजह से गोल्ड की मांग में वृद्धि होती है और बाद में बाजार में इसकी कीमत बढ़ जाती है.[/ans]

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