इसलिए आधी से कम कीमत में मिलती है जेनेरिक दवाएं, सरकार लाएगी नया कानून

अब आपको जल्द अपने घर के पास मौजूद मेडिकल स्टोर्स पर सस्ती जेनेरिक दवाएं मिलेंगी. इसको लेकर सरकार नया कानून बनाने जा रही है. आइए जानें इसके बारे में...


Updated: August 10, 2018, 2:29 PM IST
इसलिए आधी से कम कीमत में मिलती है जेनेरिक दवाएं, सरकार लाएगी नया कानून
इसलिए आधी से कम कीमत में मिलती है जेनेरिक दवाएं, सरकार बना रही है नया कानून

Updated: August 10, 2018, 2:29 PM IST
अब आपको जल्द अपने घर के पास मौजूद मेडिकल स्टोर्स पर सस्ती जेनेरिक दवाएं मिलेंगी. ब्रांड नेम के जरिए मरीजों से हो रही लूट को रोकने के लिए सरकार दवा लेबलिंग के नए नियम बनाने जा रहा है. सीएनबीसी-आवाज़ को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक ड्रग्स टेक्निकल एडवायजरी बोर्ड यानी डीटीएबी ने इस फैसले पर अपनी मंजूरी भी दे दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही इस पर नोटिफिकेशन जारी करने वाला है. नए नियम अगले साल से लागू हो जाएंगे.दवा लेबलिंग के नए नियमों के तहत जेनरिक दवाओं के लिए कानून बनेगा. (ये भी पढ़ें-अब हर दवा की कीमत तय करेगी सरकार, नए फॉर्मूले पर काम जारी)

नए कानून की तैयारी
>> दवा का जेनरिक नाम ब्रांड नेम से दो फॉन्ट बड़ा होगा.
>>शेड्यूल एच, एच1, जी और एक्स दवा लाल रंग के बॉक्स में होगी.

>>दवा के बॉक्स पर वार्निंग लिखनी भी जरूरी होगी.
>>ये दवाएं बिना डॉक्टर के लिखे नहीं मिलेंगी ये नए नियम 1 अप्रैल 2019 से लागू हो सकते हैं.
>>इन नियमों के पालन के लिए कंपनियों को 6 माह का वक्त मिल सकता है. (ये भी पढ़ें-नोवार्टिस की डाइक्लोफेनेक दवा का लाइसेंस रद्द)

क्या होती है जेनेरिक दवा- किसी एक बीमारी के इलाज के लिए तमाम तरह की रिसर्च और स्टडी के बाद एक रसायन (साल्ट) तैयार किया जाता है जिसे आसानी से उपलब्ध करवाने के लिए दवा की शक्ल दे दी जाती है. इस साल्ट को हर कंपनी अलग-अलग नामों से बेचती है. कोई इसे महंगे दामों में बेचती है तो कोई सस्ते. लेकिन इस साल्ट का जेनेरिक नाम साल्ट के कंपोजिशन और बीमारी का ध्यान रखते हुए एक विशेष समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है. किसी भी साल्ट का जेनेरिक नाम पूरी दुनिया में एक ही रहता है.

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डॉक्टर क्यों नहीं लिखता जेनेरिक दवा का नाम-आमतौर पर डॉक्टर्स महंगी दवाएं लिखते हैं इससे ब्रांडेड दवा कंपनियां खूब मुनाफा कमाती हैं लेकिन क्या आप जानते हैं आप डॉ. की लिखी सस्ती दवाएं भी खरीद सकती हैं. जी हां, आपका डॉक्टर आपको जो दवा लिखकर देता है उसी साल्ट की जेनेरिक दवा आपको बहुत सस्ते में मिल सकती है. महंगी दवा और उसी साल्ट की जेनेरिक दवा की कीमत में कम से कम पांच से दस गुना का अंतर होता है. कई बार जेनरिक दवाओं और ब्रांडेड दवाओं की कीमतों में 90 फीसदी तक का भी फर्क होता है.ये भी पढ़ें-VIDEO: यहां से खरीदें सस्ती दवाएं, आपको होगी 60 फीसदी की बचत

क्यों सस्ती होती हैं जेनेरिक दवाएं- जहां पेंटेट ब्रांडेड दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं वहीं जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है. जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, डॉक्टर्स अगर मरीजों को जेनेरिक दवाएं प्रिस्क्राइब करें तो विकसित देशों में स्वास्थय खर्च 70 फीसदी और विकासशील देशों में और भी अधिक कम हो सकता है.
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