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OPINION: क्या लॉकडाउन के कारण गरीबों को राहत पैकेज का लाभ मिलने में हो सकती है देरी!

News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 11:07 PM IST
OPINION: क्या लॉकडाउन के कारण गरीबों को राहत पैकेज का लाभ मिलने में हो सकती है देरी!
लॉकडाउन के समय सब्जियां खरीदने के लिए कतार में खड़े लोग (PTI)

वित्त मंत्री ने उन सवालों के बारे में भी नहीं बताया कि इस पैकेज का दबाव पहले से खराब राजकोषीय घाटे पर क्या पड़ेगा या नहीं. पहले से ही राजकोषीय घाटा चिंताजनक स्थिति में है और सरकार के पास सीमित रेवेन्यू है.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 11:07 PM IST
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केंद्र सरकार ने गुरुवार को 'गरीब से गरीब लोगों' के लिए राहत पैकेज का ऐलान किया है ताकि कोरोना वायरस की वजह से किए गए लॉकडाउन से उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तृत तरीके से बताया कि 1.7 लाख करोड़ रुपये के इस पैकेज को कैसे 9 सेग्मेंट के लोगों में आवंटित किया जाए. लेकिन उन्होंने यह जानकारी नहीं दी कि ऐसे पैकेज को कैसे फंड किया जाएगा. उन्होंने सुनिश्चित किया, 'कोई भी भूखे नहीं रहेगा.' वित्त मंत्री ने आगे कहा कि अन्य​ चिंताओं को अलग से संज्ञान में लिया जाएगा.

वित्त मंत्री ने उन सवालों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी कि क्या इस पैकेज का दबाव पहले से खराब राजकोषीय घाटे पर पड़ेगा या नहीं. पहले से ही राजकोषीय घाटा चिंताजनक स्थिति में है और सरकार के पास सीमित रेवेन्यू है. चूंकि, यह पैकेज गरीब तबके के​ लिए था, इसलिए इसमें मध्यम वर्ग पर ईएमआई की बोझ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.

मध्यम वर्ग को केवल प्रॉमिस मिला है कि धीरे—धीरे उनकी बात भी मानी जाएगी. हालांकि, उन्होंने पहले ही टैक्स अनुपालन के लिए डेडलाइन की राहत दे दी है.

इस ऐलान से यह तो साफ है केंद्र सरकार सबसे पहले कमजोर पर वर्ग की मदद करना चाहती है, वह भी एक ऐसे समय में जब छोटे—बड़े कारोबार, मध्यम वर्ग भी सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद करता है. कोविड—19 महामारी की वजह से इनपर भी ज्यादा प्रभाव पड़ा है. हालां​कि, अभी यह देखना बाकी है कि केंद्र सरकार इस वर्ग को क्या राहत देती है.



1. हेल्थ और सेनिटेशन वर्कर्स के लिए 50 लाख रुपये के इंश्योरेंस का ऐलान किया गया है. इससे करीब 20 लाख वर्कर्स को लाभ मिल सकेगा. अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि कैसे इस इंश्योरेंस को मुहैया कराया जाएगा. क्या इसमें प्राइवेट सेक्टर को भी जोड़ा जाएगा और सरकार की झोली पर इसके प्रीमियम का कितना बोझ पड़ेगा.

2. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को 5 किलो अनाज और एक किलो दाल देने का ऐलान किया गया है. कृषि विशेषज्ञों का कहना कि सरकार की मंशा भले ही अच्छी हो लेकिन वास्तव में स्कीम को लागू करने में कई तरह की अड़चने आ सकती हैं. सरकारी गोदाम में अनाज तो भरपूर है लेकिन लाभार्थियों तक इसे पहुंचने में कम से कम 3 सप्ताह तक लग सकता है.

3. प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत 8.9 करोड़ किसानों को पहला इंस्टॉलमेंट देने का फैसला किया गया है. इसका मतलब है कि लाभार्थियों को एडवांस में 2,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे. लेकिन इससे किसानों के हाथ में नकदी को बढ़ाने में इससे मदद नहीं मिलेगी.

4. MGNREGA वर्कर्स की मजूदरी को 182 रुपये प्रति दिन से बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया गया है. इससे 5 करोड़ परिवारों को लाभ मिल सकेगा. अगले 3 महीनों में इन परिवारों को करीब 2,000 रुपये का फायदा हो सकेगा. लेकिन इसको लेकर भी विशेषज्ञों का कहना है कि MGNREGA मजदूरों को इससे कुछ खास लाभ नहीं मिलेगा.

5. महिला जनधन अकाउंट होल्डर्स के खाते में अगले 3 महीनों के लिए 500 रुपये कैश ट्रांसफर किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे करीब 20.5 करोड़ महिलाओं को लाभ मिलेगा. सरकार की यह पहल स्वागत योग्य है, जिससे एक बड़े वंचित तबके को लाभ मिल सकेगा.

6. वरिष्ठ नागरिक, विधवाओं, और विकलांगों को भी 1000 रुपये दिए जाएंगे. यह रकम अगले 3 महीने के दौरान दो इन्स्टॉलमेंट में दिए जाएंगे, जिससे 3 करोड़ा लाभार्थियों को लाभ मिल सकेगा. यह रकम बेहद कम है.

7. उज्ज्वला योजना के तहत 8.3 करोड़ लाभार्थियों को अगले 3 महीने तक मुफ्त में गैस सिलेंडर दिया जाएगा. जब तक इन परिवारों के पास खाने के लिए अनाज नहीं होगा तो आखिर कुकिंग गैस का इन्हें लाभ का कोई मतलब नहीं है.

8. 63 लाख महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को कोलेटरल फ्री लोन की रकम को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि इसे करीब 7 करोड़ परिवारों के हाथ में नकदी पहुंच सकेगा.

9. संगठित क्षेत्रों के लिए सरकारने कहा कि अगले तीन महीनों के लिए प्रोविडेंट फंड में कर्मचारी और नियोक्ता की तरफ से 12 फीसदी की रकम सरकार ही ट्रांसफर करेगी. यह उन्हीं कंपनियों के लिए होगा, जहां 100 कर्मचारी काम करते होंगे और उसमें से 90 फीसदी कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये से कम होगा. ईपीएफ स्कीम में संशोधन किया जाएगा ताकि कर्मचारी 3 महीने के लिए 75 फीसदी नॉन—रिफंडेबल रकम निकाल सकें. इससे 4.8 करोड़ लोगों को राहत मिलेगी.

10. कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के वर्कर्स के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों को कहा है किवो मौजूदा वेलफेयर फंड में से मदद करें. यह मदद 31,000 करोड़ रुपये की होगी. अभी तक यह साफ नहीं है कि किस राज्य के हिस्से में कितनी रकम आएगी.

सरकार ने इस बारे में भी जानकारी नहीं दी है कि 1.7 लाख करोड़ रुपये कहां से आएंगे. सरकार ने यह भी सुनिश्चित नहीं किया है कि गरीब तबके इन ऐलानों का लाभ जल्द से जल्द मिल सके. इस लेख को विस्तृत तौर पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.

(लेखक एक ​वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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First published: March 26, 2020, 9:54 PM IST
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