देश की GDP विकास दर में क्यों आई गिरावट, सरकार ने संसद में दिया जवाब

देश की GDP विकास दर में क्यों आई गिरावट, सरकार ने संसद में दिया जवाब
वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की GDP में 23.9% की गिरावट दर्ज की गई.

India GDP Data- वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की GDP में 23.9% की गिरावट दर्ज की गई है तो यह प्रश्न एक बार फिर से उठ खड़ा हुआ है कि कहीं नोटबंदी के कारण ही तो अर्थव्यवस्था इतने बुरे हाल में नहीं है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 10:23 AM IST
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नई दिल्ली. संसद की कार्यवाही के दौरान लोकसभा में सरकार ने बताया कि आखिर जीडीपी रेट इतनी क्यों गिरी. सांसद एस जगतरक्षकन, राजीव रंजन सिंह, एकेपी चिनराज, कौशलेंद्र कुमार और के मुरीलधरन ने सरकार से पूछा कि कहीं GDP गिरने का कारण Demonetisation तो नहीं है. क्या सरकार GDP पर नोटबंदी और कोविड-19 के प्रभाव का आकलन किया है. इस सवाल का जवाब देते हुए सांख्यिकी मंत्री (Statistics and Programme Implementation minister) राव इंद्रजीत सिंह (Rao Inderjit Singh) ने कहा कि कोरोना वायरस और उसकी रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से इस साल पहली तिमाही में GDP में 23.9% की कमी आई है. नोटबंदी का इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में GDP रेट 5.2% थी.

क्यों आई देश की जीडीपी में गिरावट-केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में कोरोना वायरस के कारण माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, सर्विस सेक्टर आदि में तेज गिरावट दर्ज की गई. केवल एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट्री और मछली पालन के क्षेत्र में पहली तिमाही में तेजी देखी गई. इस वजह से GDP में गिरावट आई.

जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए भारत का जीडीपी ग्रोथ का अनुमान




जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है? राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था पर कोविड-19 के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाए किए हैं. इनमें लोगों के बैंक अकाउंट में सीधे कैश ट्रांसफर, कोरोना से प्रभावित लोगों की आर्थिक मदद, मनरेगा के तहत काम करने वाले लोगों की मजदूरी में वृद्धि और कंस्ट्रक्शन वर्क में लगे मजदूरों को सहायता उपलब्ध कराना शामिल है.

उन्होंने कहा कि स्व सहायता समूहों (Self help groups) के लिए आसान कर्ज, EPF के अंशदान में कमी, प्रवासी मजदूरों के लिए नौकरी, रेहड़ी पटरी वालों के लिए आसान लोन का सुविधा और अत्मनिर्भर पैकेज जैसे कई कदम उठाए गए हैं.
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