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क्यों दुनियाभर के शेयर बाजारों में आ गई सूनामी? सोकर उठे भारतीय निवेशकों के 4 लाख करोड़ डूबे

भारतीय निवेशकों को शुरुआती कारोबार में ही लगभग 4 लाख करोड़ की चपत लग चुकी थी.

भारतीय निवेशकों को शुरुआती कारोबार में ही लगभग 4 लाख करोड़ की चपत लग चुकी थी.

शुक्रवार को फेडलर रिजर्व के चीफ जेरोम पॉवेल की स्पीच के बाद शेयर बाजार का मूड बिगड़ा. आज सोमवार को दुनियाभर के बाजारों ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

अमेरिका में होने वाले हर बड़े फैसले का रिएक्शन भारत में नजर आता है.
फेडलर रिजर्व के चीफ जेरोम पॉवेल की स्पीच के बाद बाजार का मूड बिगड़ा.
क्रूड ऑयल अब एक बार फिर से यह 100 डॉलर के ऊपर निकल गया है.

नई दिल्ली. 29 अगस्त 2022 को भारतीय शेयर बाजार ने बड़ा गोता लगाया है. सुबह ओपनिंग के साथ ही सेंसेक्स लगभग 1400 अंक गिर गया था, जबकि निफ्टी में 370 अंकों से अधिक की गिरावट थी. शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाले सेंसेक्स पर नेस्ले और हिन्दुस्तान यूनिलीवर को छोड़कर बाकी तमाम लाल निशान पर थे.

निवेश सकते हैं में है कि आखिर अचानक से ऐसा क्या हुआ कि शेयर बाजार में एकदम से इतनी गिरावट आ गई. दरअसल, शेयर बाजार पर बाहरी तत्वों का काफी प्रभाव रहता है. भारतीय बाजारों की बात करें तो अमेरिका में होने वाले हर बड़े फैसले का रिएक्शन भारत में नजर आता है. इसके अलावा डॉलर की मजबूती और कमजोरी का असर भी हमारे बाजार पर पड़ता है. आज हम आपको इस ताजा गिरावट के मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं.

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शुक्रवार को ही हो गया था आभास

बात है 26 अगस्त, शुक्रवार की. शुक्रवार को भारतीय बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुए थे. सेंसेक्स में लगभग 60 अंक और निफ्टी में 36 अंकों की गिरावट थी. भारतीय बाजार बंद होने के बाद अमेरिकी बाजार काफी दबाव में खुले. नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) शुक्रवार को 538 अंक गिर गया यानी 4 फीसदी से ज्यादा की बड़ी देखी गई. नैस्डैक के अलावा एसएंडपी (S&P) भी 3 प्रतिशत से अधिक टूटा. उसी दिन अंदाजा हो गया था कि सोमवार को भारतीय बाजार काफी गिरावट के साथ खुल सकते हैं और बिलकुल वही हुआ भी.

केवल आज सुबह की बात करें तो ओपनिंग के साथ ही BSE पर लिस्टेड कंपनियों की पूंजी 3.90 लाख करोड़ रुपये कम हो गई. सुबह के समय BSE पर लिस्टेड कंपनियों की कुल पूंजी 273.06 लाख करोड़ रुपये रह गई. इसे दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों के कुछ किए बिना ही उन्हें लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की चपत लग गई. आज सुबह सभी सेक्टर लाल देखे गए, लेकिन टेक्नोलॉजी सेक्टर के शेयर्स में ज्यादा बिकवाली हावी रही.

क्या हैं गिरावट के कारण?

1. पॉवेल की स्पीच

फेडलर रिजर्व के चीफ जेरोम पॉवेल की स्पीच के बाद बाजार का मूड बिगड़ा और निवेशकों ने जोखिमभरे बाजार से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों में निवेश करने का मन बनाया. उन्होंने कहा, “मूल्य स्थिरता बहाल करने में कुछ समय लगेगा. मांग और आपूर्ति को बेहतर संतुलन में लाने के लिए हमें हमारे टूल्स का जबरदस्ती उपयोग करना पड़ेगा… इकॉनमी को महंगाई को नियंत्रण में आने तक कुछ समय के लिए कठोर मौद्रिक नीति की जरुरत है. हमें सुस्त ग्रोथ, कमजोर जॉब मार्केट और कारोबार में सुस्ती के लिए तैयार रहना चाहिए.”

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2. ग्लोबल सेलऑफ (Global selloff)

जैसा कि हम पहले ही बात कर चुके हैं कि अमेरिकी बाजार शुक्रवार को औंधे मुंह गिरे थे, बाकी देशों के बाजारों से भी कोई अच्छा संकेत नहीं मिला. 16 जून के बाद अमेरिकी बेंचमार्क इंडेक्स नैस्डैक में यह सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है.

S&P 500 में 141.46 अंकों (3.37 फीसदी) की गिरावट आई, जबकि Nasdaq Composite 497.56 अंक (3.94 फीसदी) टूटकर 12,141.71 के स्तर पर बंद हुआ. डाउ जोन्स (Dow Jones Industrial Average) में 1,008.38 अंकों की भयंकर गिरावट देखी गई. यह 3.03 फीसदी गिरकर 32,283.40 पर बंद हुआ. आज MSCI की एशिया का सबसे बड़े इंडेक्स भी गिरा. जापान के Nikkei में 2.3 फीसदी की गिरावट आई और साउथ कोरिया के Kospi को भी इतने ही फीसदी नीचे ट्रेड करते देखा गया.

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3. क्रूड का महंगा होगा

पिछले कुछ दिनों से कच्चे तेल में उबाल देखने को नहीं मिला था. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दहाई (डबल डिजिट) में गिर चुका था और धीरे-धीरे शांत हो रहा था. परंतु अब एक बार फिर से यह 100 डॉलर के ऊपर निकल गया है. पॉवेल की स्पीच के बाद यह थोड़ा शांत होता दिखा, लेकिन उतनी स्थिरता नहीं दिखी कि जिस पर शेयर बाजार कोई रिएक्शन नहीं दिखाता. क्रूड ऑयल का महंगा होना अन्य चीजों की महंगाई की तरफ पहला कदम है.

4. रुपये में गिरावट, डॉलर मजूबत

करेंसी बाजार भी शेयर बाजार की तरह ही दिखा. 29 अगस्त, मतलब आज भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिली. यह डॉलर के मुकाबले नए निचले स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में यह 80.11 पर पहुंच गया था, जबकि 26 अगस्त को इसने 79.87 पर क्लोजिंग दी थी.

कोटक सिक्योरिटीज़ के अनिंद्या बनर्जी ने कहा कि डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा होना, और भारतीय बाजारों के कमजोर होने से FPIs के लिए अपने ट्रेड्स को बनाए रखना मुश्किल हो गया है. करेंसी में अगले 1-2 हफ्तों तक 79.70 से 80.50 तक की रेंज देखने को मिल सकती है.

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