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टर्म इंश्योरेंस प्लान के साथ डिसेबिलिटी राइडर लेना क्यों एक समझदारी भरा फैसला, समझिए एक्सपर्ट से

कैंसर, अलजाइमर जैसी बीमारियों को भी डिसेबिलिटी में गिना जा सकता है.

कैंसर, अलजाइमर जैसी बीमारियों को भी डिसेबिलिटी में गिना जा सकता है.

जैसा कि नाम से साफ है कि डिसेबिलिटी राइडर स्थाई विकलांगता की दशा में आर्थिक सहायता मुहैया कराता है. जानकार कहते हैं कि ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

किसी जानलेवा बीमारी को भी डिसेबिलिटी के अंदर गिना जा सकता है.
अगर बीमा लेने से पहले आपको वह बीमारी थी तो वह डिसेबिलिटी राइडर में शामिल नहीं होगी.
डिसेबिलिटी राइडर विकलांगता की सूरत में बीमा लेने वाले के परिवार को आर्थिक सुरक्षा देता है.

नई दिल्ली. टर्म इंश्योरेंस प्लान जिसे जीवन बीमा पॉलिसी भी कहते हैं आपके प्रियजनों को उस समय आर्थिक मदद देती है जब उन्हें उसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है. किसी अपने की मौत का दुख असहनीय होता है और ये तब और भी बढ़ जाता है जब उनके चले जाने से परिवार पर आर्थिक विपदा आ गिरती है. आजकल के अनिश्चितताओं से भरे दौर में टर्म इंश्योरेंस लेना बहुत जरूरी हो गया है. लेकिन क्या केवल टर्म इंश्योरेंस आपके परिवार का आर्थिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है.

मिंट में छपे एक लेख में बजाज कैपिटल लिमिटेड के एमडी संजीव बजाज कहते हैं कि टर्म इंश्योरेंस के अलावा लोगों को डिसेबिलिटी राइडर भी लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि डिसेबिलिटी राइडर ऐसी स्थिति में काम आता है जब कोई व्यक्ति किसी एक्सीडेंट में स्थाई रूप से विकलांग हो जाता है. क्योंकि इसके बाद व्यक्ति पहले की तरह काम नहीं कर सकता जिससे उसकी आय घट या बिलकुल खत्म हो जाती है. इससे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होता है. संजीव बजाज कहते हैं कि अगर आप टर्म इंश्योरेंस के साथ 25 लाख रुपये का राइडर प्लान चुनते हैं तो स्थाई अपगंता की स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी को आपको ये अमाउंट देना होगा.

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विकलांगता की परिभाषा
ये जरूरी नहीं कि हर डिसेबिलिटी किसी एक्सीडेंट के कारण ही हो. कुछ विकलांगताएं गंभीर व लाइलाज बीमारियों से भी हो सकती हैं. इन बीमारियों में कैंसर, दिल की बीमारी, किडनी डिस्ऑर्डर, अलजाइमर, थर्ड डिग्री जलना, तीसरे स्टेज का लीवर या लंग फेलियर. इसका मतलब है कि ऐसी कोई बीमारी जिससे आपकी जान को खतरा हो और उसके कारण आप अपने रोजमर्रा के काम भी न कर पाएं उन्हें विकलांगता में शामिल किया जाएगा.

किन आधारों पर क्लेम हो सकता है रिजेक्ट
उपरोक्त दी गई बीमारियों में और एक्सीडेंटल डिसेबिलिटी में आपको कंपनी तय रकम चुकाएगी. हालांकि, ऐसी कुछ परिस्थितियां है जिनकी वजह से आपका क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है. अगर आपकी बीमारी पहले से मौजूद थी, आत्महत्या की कोशिश, खुद को पहुंचाई गई चोट (भले ही मानसिक स्थिति खराब हो), किसी तरह के नशे में लगी चोट या एक्सीडेंट, जंग या विद्रोह के कारण अपंगता. ये ऐसी कुछ परिस्थितियां हैं जहां कंपनी का आपके या आपने नॉमिनी का क्लेम रिजेक्ट कर सकती है.

Tags: Business news in hindi, Insurance, Insurance Policy, Life Insurance, Personal finance

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