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आखिर क्यों जरूरी है हमारे लिवर की सही देखभाल

लिवर रोग के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं.

लिवर रोग के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) के आंकड़ों की मानें, तो हर 5 में से एक भारतीय को लिवर संबंधी बीमारी है. इसके अलावा, एक दूसरा आंकड़ा बताता है कि भारत में हर साल 10 लाख रोगी सिर्फ लिवर सिरोसिस से पीड़ित होते हैं.

आपने बड़े-बूढ़ों की वह कहावत तो सुनी ही होगी, जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन. दरअसल हम जैसा पोषण अपने शरीर को देते हैं, हम वैसे ही बन जाते हैं. यहां भोजन का मेल हमारे दिल से नहीं बल्कि लिवर से है. लिवर को हमारे लिए बहुत से काम करने होते हैं. हमारे शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को छानना, विटामिन और खनिजों को संरक्षित करना और शरीर में चल रहे 500 जरूरी कामों के बीच ही पाचन और विकास जैसे जरूरी काम भी करना.

इसीलिए हमारे लिए अपने इस महत्वपूर्ण अंग की देखभाल करना बेहद जरूरी है!

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) के आंकड़ों की मानें, तो हर 5 में से एक भारतीय को लिवर संबंधी बीमारी है. इसके अलावा, एक दूसरा आंकड़ा बताता है कि भारत में हर साल 10 लाख रोगी सिर्फ लिवर सिरोसिस से पीड़ित होते हैं. लिवर की बीमारी भारत में मौत का दसवां आम कारण है.

अपने लिवर की सुरक्षा के लिए सही पोषण कैसे मिले, यह जानना बेहद जरूरी है. इसीलिए यह बेहतर है कि आप ध्यान दें और सुरक्षित रहने के लिए प्रयास करें. हम आपके लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ अहम बातें यहां बता रहे हैं.

लिवर के लिए पोषण और आखिर ये क्यों इतना जरूरी है-

हमारी एक निष्क्रिय जीवनशैली के साथ-साथ प्रोसेसेड/फास्ट फ़ूड को ज्यादा तवज्जो देने से लिवर पर अपना काम करते रहने के लिए बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. सार में कहें, तो हम आपके शरीर से विषाक्त पदार्थों को लगातार बाहर निकालने के लिए अपने लिवर से बहुत ज्यादा काम ले रहे हैं. लंबे समय तक ज़रूरत से ज्यादा काम करना इसके लिए हानिकारक होता है. इसलिए लिवर को ठीक रखने के लिए, विभिन्न गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) विकारों के प्रबंधन के लिए उचित पोषण बहुत महत्वपूर्ण है.

लिवर रोग के लक्षण और देखभाल–
लिवर रोग के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. लिवर रोग के कुछ सामान्य लक्षणों में मितली, उल्टी,  पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, पीलिया और थकान, खुजली, कमजोरी, वजन कम होना शामिल होना.

जब लिवर की बीमारी अपने आखिरी चरण में पहुंच जाती है, तब आम तौर पर इसका परिणाम लिवर सिरोसिस के रूप में जाना जाता है. रोग की शुरुआत में किसी व्यक्ति को कोई भी लक्षण अनुभव नहीं हो सकता, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, व्यक्ति को थकान, त्वचा पर खुजली, भ्रम और सुस्ती का अनुभव हो सकता है.

इसलिए स्वस्थ लिवर के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को सबसे ज़्यादा मददगार माना गया है. खासतौर पर वजन उठाने के व्यायाम से शरीर की सही ताकत (मसल मास) को बनाने में मदद मिलती है. हालांकि, जैसे-जैसे लिवर के रोग बढ़ते हैं, वैसे-वैसे ही शरीर की मसल्स बनाने की क्षमता खत्म हो जाती है, इसीलिए यह जरूरी है कि जितना जल्दी बीमारी का पता चले, उतनी ही जल्द उसके निदान के लिए काम करना शुरू कर दिया जाए. (4)

इसके साथ ही, खानपान और जीवनशैली संबंधी आदतों पर भी ध्यान दें और सिगरेट, शराब का पूरा परहेज करने की सलाह दी जाती है.

Dr. Deepak Agarwal, Consultant Gastroenterologist, Globe Medicare Lucknow

स्वस्थ लिवर के लिए सुझाव–
लिवर संबंधी रोगों से बचने के लिए सबसे कारगर सुझाव है, एक एक्टिव जीवनशैली को अपनाकर स्वस्थ ज़िंदगी की तरफ कदम बढ़ाना.

एक एक्टिव जीवनशैली के लिए रोजाना व्यायाम करें, शराब पीने में एहतियात बरतें और सिगरेट छोड़ दें. आपके भोजन में फाइबर की मात्रा ज्यादा और फैट कम से कम होना चाहिए. (3)

आपको अपनी उम्र और लिंग के आधार पर सही बॉडी मास इंडेक्स हासिल करने का भी लक्ष्य रखना चाहिए. इसलिए, आवश्यक वजन बनाए रखने का सुझाव दिया जाता है. यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति लिवर से संबंधित बीमारी जैसे हेपेटाइटिस या वायरल संक्रमण से स्वयं का बचाव करे. आखिर में यह पक्का करें कि आप आहार, व्यायाम और/या दवाओं के साथ अपने मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखते हैं, जो लिवर को होने वाले नुकसान को कम करने और रोकने में मदद कर सकते हैं.

References –

  • GE Port J Gastroenterol. 2015;22(6):268—276
  • Bemeur C, et al. J Nutr Metab. 2010;2010:1-12
  • J. Clin. Med. 2019, 8, 1065
  • Plauth M, et al. Clin Nutr. 2019;38(2):485-521 (ESPEN/international guidelines for nutritional recommendation)
  • EASL Clinical Practice Guidelines on nutrition in chronic liver disease. J Hepatol. 2019;70(1):172-193. (EASL/international guidelines for nutritional recommendation)
  • Gottschlich MM, et al. The A.S.P.E.N. NUTRITION SUPPORT CORE CURRICULUM: A CASE-BASED APPROACH—THE ADULT PATIENT. United States of America. ASPEN. 2007 (ASPEN/international guidelines for nutritional recommendation))

IND2214612 (v1.2)

The information provided in this article is meant for the awareness only and this article should not be considered as a substitute for doctor’s advice. Please consult your doctor for more details. Abbott India Limited shall not be liable in any manner whatsoever for any action based on the information provided in this article and does not hold itself liable for any consequences, legal or otherwise, arising out of information in this article. This article has been produced on behalf of Abbott India’s #ULivStrong initiative, by Network18 team.

Tags: Liver transplant, Nutrition

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