Citibank's blunders: जानिए बैंकिंग इतिहास की सबसे बड़ी चूक, जिसमें विप्रो के कर्मचारी रहें जिम्मेदार!

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बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा ब्लंडर करने के मामले में अब विप्रो कर्मचारी (Wipro employees) का नाम सामने आ रहा है. सिटीबैंक (Citi's Bank) के सबसे बड़े ब्लंडर करने के मामले में विप्रो के दो कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2021, 3:50 PM IST
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नई दिल्ली. बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा ब्लंडर करने के मामले में अब विप्रो कर्मचारी (Wipro employees) का नाम सामने आ रहा है. सिटीबैंक (Citi's Bank) के सबसे बड़े ब्लंडर करने के मामले में विप्रो के दो कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रेवलॉन से जुड़े लोन मामले में सिटीबैंक एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंट था. सिटीबैंक ने कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन के लोन एडमिनिस्ट्रेटिव एजेंट के तौर पर काम करते हुए 10 वित्तीय कंपनियों को 900 मिलियन डॉलर भेज दिए थे. दरअसल, हुआ ये था कि कास्मेटिक कंपनी रेवलॉन के लेंडर्स को सिटी बैंक को 58 करोड़ रुपये बतौर ब्याज देने थे, लेकिन गलती से बैंक की ओर से लेंडर्स के खाते में दस गुना से अधिक 6554 करोड़ रुपये (करीब 900 डॉलर) डाल दिए गए. यह लेनदेन पिछले साल अगस्त में हुआ था. हालांकि, कुछ कर्जदाताओं ने तो बैंक के पैसे लौटा दिए, लेकिन जब दस ऋणदाताओं से 3650 करोड़ रुपये (करीब 50 करोड़ डॉलर) वापस नहीं आए.

अगस्त 2016 का है मामला
सिटी बैंक का यह मामला अगस्त 2016 का है जब बैंक ने कॉस्मेटिक कंपनी रेवलॉन को 1.8 मिलियन डॉलर का लोन दिया था. यह लोन कंपनी ने एक बड़े ब्रांड का अधिग्रहण के लिए लिया था. लेकिन बैंक के सॉफ्टवेयर एरर के कारण 500 मिलियन डॉलर की रकम गलती से ज्यादा ट्रांसफर हो गई. बैंक के मुताबिक उनका सॉफ्टवेयर आउट ऑफ डेट होन के कारण यह एरर आया जिसके कारण रकम गलती से कंपनी को ट्रांसफर हो गया. लेकिन कंपनी ने इस रकम को लौटाने से मना कर दिया. उसके बाद मामला अमेरिकी कोर्ट में चला गया. जानकारी के मुताबिक, एबीटीएफ टीम के कई सदस्य जिनमें 11 अगस्त के वायर ट्रांसफर की प्रक्रिया में कुछ लोग शामिल हैं. इसमें विप्रो के दो कर्मचारी भी हैं, जिन्होंने सिटी बैंक के मामलों पर खासतौर पर काम किया.

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इन तीन लोगों को देनी थी मंजूरी


सिटी बैंक की लेनदेन अप्रूवल procedure के तहत हो रहा था, जिसे पास करने से पहले तीन लोगों को समीक्षा करना और लेनदेन की मंजूरी देने की आवश्यकता होती है. इस मामले में पहले लोग ऐसे थे जो कि विप्रो के कर्मचारी थे. पहला एम्पलाॅय जिसे मेकर कहा जाता है, उन्होंने भुगतान की जानकारी बैंक के फ्लेक्सक्यूब ऋण प्रसंस्करण कार्यक्रम (Flexcube loan processing program) में मैन्युअल रूप रखा था. वहीं, दूसरे कर्मचारी जिसे चेकर कहा जाता है, उन्होंने पहले कर्मचारी ने क्या किया उसे चेक करना रहता है. फाइनल अप्रूवल सिटीबैंक टीम से आया था और उस टीम को लेनदेन के लिए जिम्मेदार माना जाता है.

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अमेरिकी कोर्ट ने क्या कहा था ?
करीब 4 साल से कोर्ट में चल रहे इस मामले पर अमेरिकी कोर्ट ने साफ कह दिया है कि यह बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा ब्लंडर है. इसका मतलब साफ है कि अब सिटी बैंक को अपनी इस गलती की बड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी और 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 3650 करोड़ रुपए से हाथ धोना पड़ेगा. इससे पहले भी बैंकिंग सेक्टर में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं लेकिन रकम के मामले में यह अबतक की सबसे बड़ी घटना है.
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